घर की याद - पठन सामग्री और सार Humanities/Arts Notes | EduRev

Hindi Class 11

Humanities/Arts : घर की याद - पठन सामग्री और सार Humanities/Arts Notes | EduRev

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सारांश -: घर की याद कविता में घर के मर्म का उद्घाटन है| कवि को जेल-प्रवास के दौरान घर से विस्थापन की पीड़ा सालती है| कवि के स्मृति-संसार में उसके परिजन एक-एक कर शामिल होते चले जाते हैं| घर की अवधारणा की सार्थक और मार्मिक याद कविता की केन्द्रीय संवेदना है|

कवि 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के कारण जेल में बंद है| बरसात के दिनों में कवि अपने घर-परिवार को याद करता है| उसे खुशियों से भरे अपने घर की याद आती है| कवि के चार भाई और चार बहनें हैं जिनसे पूरा परिवार भरा-पूरा लगता है| एक विवाहिता बहन है जो मायके आई हुई है| परिवार के सभी सदस्य आपस में प्रेम के कारण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं| जेल में बंद कवि अपने शोकाकुल परिवार के बारे में सोचकर दुखी है| कवि को अपनी माँ की याद आ रही है जो अनपढ़ होने के कारण पत्र नहीं लिख सकती| वे अपने पिता को भी याद करते हैं जो बूढ़े होने के बाद भी मन से युवा हैं| वे एक जिंदादिल तथा हँसमुख व्यक्ति हैं| मौत भी उन्हें डरा नहीं सकती| उनके पिता धार्मिक हैं जो नियमित रूप से गीता का पाठ करते हैं| अपने बेटे की याद करके उनकी आँखें नम हो जाती हैं| कवि अपने पिता को याद करके भावुक हो उठता है| कवि पिता के पाँचवे बेटे हैं जिस पर उनके पिता को नाज था, लेकिन दुर्भाग्यवश कवि जेल में बंद हैं| ऐसे कठिन समय में कवि की माँ ही है जो पिताजी को ढांढ़स बँधा रही होगी| कवि के माता-पिता दोनों देशभक्ति की भावना से प्रेरित हैं| उनकी माँ कहती हैं कि यदि वह ऐसा न करता तो हमें लज्जित होना पड़ता| उनके पिता भी इस परिस्थिति में अपना धैर्य नहीं खोते|

 जेल में बंद कवि ‘सावन’ से आग्रह करते हैं कि वो उनके परिवार तक उनकी सलामती का संदेश पहुँचा दे| उनके परिवार को उनके दुखी होने की बात का पता न चले| जेल में उन्हें नींद नहीं आती है तथा घर से बिछड़ने का वियोग उनके मन को व्यथित करता है| लेकिन वे अपने पिता को अपनी वास्तविक स्थिति बताकर दुखी नहीं करना चाहते|  कवि सावन से कहते हैं कि वह उनके पिता को उनके आनंद का समाचार दे जिससे कि उन्हें कवि की चिंता न हो|


कवि-परिचय -: भवानी प्रसाद मिश्र

जन्म- सन् 1913, टिगरिया गाँव, होशंगाबाद (म.प्र.) में|

प्रमुख रचनाएँ- सतपुड़ा के जंगल, सन्नाटा, गीतफरोश, चकित है दुख, बुनी हुई रस्सी, खुशबू के शिलालेख, अनाम तुम आते हो, इदं न मम्|

प्रमुख सम्मान- साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन का शिखर सम्मान, दिल्ली प्रशासन का ग़ालिब पुरस्कार एवं पद्मश्री|

मृत्यु - सन् 1985 में|

सहज लेखन और सहज व्यक्तित्व का नाम है भवानी प्रसाद मिश्र| कविता और साहित्य के साथ-साथ राष्ट्रीय आंदोलन में जिन कवियों की सक्रिय भागीदारी थी उनमें ये प्रमुख हैं| भवानी प्रसाद की कविता हिंदी की सहज लय की कविता है| इस सहजता का संबंध गाँधी के चरखे की लय से जुड़ता है इसीलिए उन्हें कविता का गाँधी भी कहा गया है| 

भवानी प्रसाद मिश्र जिस किसी विषय को उठाते हैं उसे घरेलू बना लेते हैं- आँगन का पौधा, शाम और दूर दिखती पहाड़ की नीली चोटी भी जैसे परिवार का एक अंग हो जाती है| नई कविता के दौर के कवियों में मिश्र जी के यहाँ व्यंग्य और क्षोभ भरपूर है किंतु वह प्रतिक्रियापरक न होकर सृजनात्मक है|


कठिन शब्दों के अर्थ -:

• नजर में तिर रहा है- आँखों में तैर रहा है

• पूर है जो- वह घर जो परिपूर्ण है यानी खुशियों से भरपूरा है

• परिताप- अत्यधिक दुख

• नवनीत- मक्खन

• हेटे- गौण, हीन

• लीक- परंपरा

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