Class 8 Exam  >  Class 8 Notes  >  कक्षा - 8 हिन्दी (Class 8 Hindi) by VP Classes  >  लघु उत्तरीय एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न - कबीर की साखियाँ, हिंदी, कक्षा - 8

लघु उत्तरीय एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न - कबीर की साखियाँ, हिंदी, कक्षा - 8 | कक्षा - 8 हिन्दी (Class 8 Hindi) by VP Classes PDF Download

I. लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. साधु की जाति न पूछने की बात कहकर कवि सामाजिक कुरीति को दूर करने का प्रयास करता  है।* स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - कवि लोगों से कहता है कि वे साधु से उसकी जाति न पूछकर ज्ञान की बातें पूछ लें अर्थात वे जाति को महत्व न देकर ज्ञान को महत्वदें। समाज में जातिगत आधार पर भेदभाव किया जाता है, कवि ने इस भेदभाव को दूर करने का प्रयास किया है।

प्रश्न 2. साधु का स्वभाव सामान्य व्यक्तियों से किस तरह भिन्न होता है?  
उत्तर- साधु जाति-पाँति की भावना से ऊपर उठकर प्रभु की भक्ति में लीन रहते हैं। वे जाति-पाँति को महत्व न देकर ज्ञान को  महत्व देते हैं; जबकि सामान्य मनुष्य ज्ञान को भूलकर जाति-पाँति के झगड़ों में ही उलझे रहते हैं। इससे समाज में विषमता आती है।

प्रश्न  3. क्या अपशब्द का जवाब अपशब्द से देना ठीक है? यदि नहीं तो क्यों?
उत्तर - हमें अपशब्द का जवाब कभी भी अपशब्द से नहीं देना चाहिए क्योंकि पलटकर अपशब्द का जवाब देने से वह एक से अनेक हो जाता है। इस प्रकार अपशब्द को (गालियों) का सिलसिला रुकने के बजाये बढ़ता ही जाता है।

प्रश्न  4. कबीर किस तरह की भक्ति को सच्ची भक्ति नहीं मानते?
उत्तर - कबीर उस भक्ति को सच्ची भक्ति नहीं मानते हैं जब व्यक्ति हाथ में मनका घुमाता रहता है और मुँह से राम-राम उच्चारित तो करता है पर उसका मन एकाग्रचित्त होने की बजाये इधर-उधर भटकता रहता है।

प्रश्न 5. 'मनुष्य आपा अपना खोता है, पर व्यवहार दूसरों का बदलता है।' इस विरोधाभास को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - जब कोई व्यक्ति अपने मन का घमंड त्यागता है तो उसका स्वभाव शांत, मन स्वच्छ तथा निर्मल हो जाता है। ऐसे में सभी उसके प्रति अपना व्यवहार बदलने को विवश हो जाते हैं। सभी उस पर दयाभाव बनाए रखते हैं। इस प्रकार हम देखते हैं कि व्यक्ति स्वयं बदलता है तो दूसरे भी बदलने के लिए मजबूर होते हैं।

II. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. मनुष्य को तिनके का भी अपमान क्यों नहीं करना चाहिए? यहाँ तिनका किसका प्रतीक है, स्पष्ट कीजिये,?
उत्तर - कवि ने मनुष्य को सीख दी है कि उसे तिनके का भी अपमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि हवा के साथ यदि यही तिनका उड़कर आँख में पड़ जाता है तो बड़ी पीड़ा पहुँचाता है। यहाँ तिनका समाज के कमज़ोर एवं उपेक्षित व्यक्ति का प्रतीक है। हमें उनका भी अपमान नहीं करना चाहिए क्योंकि यदि उस व्यक्ति को कभी शक्ति या सत्ता मिल जाएगी तो वह बदला अवश्य लेना चाहेगा। वैसे भी किसी का अपमान करना मानवता के खिलाफ है।

प्रश्न 2. कबीर ने अपशब्द का जवाब अपशब्द से न देने की सीख दी है। वर्तमान में उनकी यह सीख कितनी प्रासंगिक है?
उत्तर -  किसी को पलटकर अपशब्द से जवाब न देने की सीख जितनी उस समय प्रासंगिक थी उससे ज्यादा यह वर्तमान में प्रासंगिक है। हम देखते हैं कि सडक़ों पर चलते समय किसी आदमी का दूसरे से छू जाने से यह वाहनों का एक-दूसरे से छूकर खरोंच आ जाने से या ज़रा सी टक्कर होते ही गालियाँ दोनों तरफ से शुरू हो जाती हैं। परिणामस्वरूप मारपीट तथा हत्या तक की नौबत आ जाती है ।अपशब्द  का जवाब अपशब्द  से न देकर इसे रोका जा सकता है।

प्रश्न 3. कबीर की साखियाँ वर्तमान समाज के लिए कितनी प्रासंगिक एवं सार्थक हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - 
 कबीर की साखियाँ वर्तमान समाज में फैले झूठ, हिंसा, लूटमार, छल, बेईमानी आदि के बीच और भी प्रासंगिक एवं सार्थक हो जाती हैं। पहली साखी में जातीय भेदभाव कम करने की सीख दी है, तो दूसरी में अपशब्द  का जवाब अपशब्द  से न देकर सहनशील बनने की-  तीसरी सीखी में आडंबरहीन भक्ति न करके प्रभु की सच्ची भक्ति करने की - चौथी साखी में कमज़ोर एवं उपेक्षित व्यक्ति का भी अपमान न करने की तथा अंतिम साखी में मनुष्य को अपना घमंड त्यागने की सीख देकर स्रद्घश ह्वह्य समाज में समरसता  सद्भाव तथा भाईचारा फैलाने का संदेश दिया है जिसकी वर्तमान में प्रासंगिकता तथा सार्थकता और भी बढ़ जाती है।

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FAQs on लघु उत्तरीय एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न - कबीर की साखियाँ, हिंदी, कक्षा - 8 - कक्षा - 8 हिन्दी (Class 8 Hindi) by VP Classes

1. कबीर की साखियाँ क्या हैं?
उत्तर: कबीर की साखियाँ उनके द्वारा लिखी गई कुछ छोटी-छोटी कविताएं हैं जो जीवन के मूल्यों, धर्म और मानवता के विषयों पर आधारित होती हैं। इन साखियों में व्याकरणिक और भाषिक दोषों की कमी होती है और वे आम लोगों की भाषा में लिखी जाती हैं।
2. कबीर की साखियों का महत्व क्या है?
उत्तर: कबीर की साखियाँ भारतीय साहित्य के महत्वपूर्ण हिस्से मानी जाती हैं। वे साहित्यिक और धार्मिक महानताओं के द्वारा उठाए गए सवालों और समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करती हैं। इन साखियों का महत्व उनके सरल और सांस्कृतिक भाषा में भी होता है, जो सभी को समझने में आसानी प्रदान करती है।
3. कबीर के कितने प्रमुख रचनाकार हैं?
उत्तर: कबीर के अनुसार, उनकी रचनाएं सिर्फ उन्हीं की नहीं हैं, वरन् उनके संबंधित गुरुओं और सम्प्रदाय के अन्य साधकों की भी हैं। इसलिए, उन्हें एक मान्यता दी जाती है कि वे अकेले कबीरी मत के ग्रंथों के लेखक नहीं हैं, बल्कि उनके द्वारा लिखे गए ग्रंथों का संग्रहकर्ता हैं।
4. कबीर की साखियाँ किस भाषा में लिखी गई हैं?
उत्तर: कबीर की साखियाँ आपदान काल में लिखी गईं थीं, जब हिंदी भाषा का निर्माण अपूर्ण था। इन साखियों में आपब्रंश की भाषा, अवधी, ब्रज और खड़ी भाषा का प्रयोग किया गया है।
5. कबीर की साखियाँ किस प्रकार के विषयों पर आधारित हैं?
उत्तर: कबीर की साखियाँ मुख्यतः धार्मिक और जीवन की स्वीकृति, न्याय, समानता, निर्भरता, ईश्वर की उपासना और मानवता के मूल्यों के विषयों पर आधारित हैं। इन साखियों में व्यक्ति को सही और गलत के बीच अंतर समझाने का प्रयास किया गया है।
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