Important Question & Answers - बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर Humanities/Arts Notes | EduRev

Hindi Class 12

Humanities/Arts : Important Question & Answers - बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर Humanities/Arts Notes | EduRev

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प्रश्न 1. डाॅ. अंबेडकर के विचार से दासता की व्यापक परिभाषा क्या है? स्पष्ट कीजिए

उत्तर: लेखक के मत में ‘दासता’ की व्यापक परिभाषा इस प्रकार है-दासता शब्द का अर्थ  गुलामी के अर्थ  में लिया जा सकता है। दासता में जकड़कर रखना होगा, क्योंकि दासता केवल कानूनी पराधीनता को ही नहींकहा जा सकता। ‘दासता’ में वह स्थिति भी सम्मिलित हैं जिन से कुछ व्यक्तियों को दूसरे

लोगों द्वारा निर्धारित व्यवहार एवं कर्तव्यों का पालन करने के लिए विवश होना पड़ता है। यह स्थिति कानूनी पराधीनता न होने पर भी पाई जा सकती है।


प्रश्न 2. डाॅ. अंबेडकर के मतानुसार ‘दासता’ की व्याख्या कीजिए
उत्तर: डाॅ. अम्बेडकर के अनुसार दासता वह स्थिति है जब कुछ व्यक्तियोंकोदूसरे लोगों द्वारा निर्धारित व्यवहार एवंकर्तव्यों का पालन करने के लिए विवश होना पड़ता है। इसे दूसरे शब्दों में पराधीनता भी कह सकते हैं। व्यक्ति जब अपनी इच्छा से कुछ न करके दूसरे की इच्छा के अधीन रहता है तब वह ‘दास’ कहा जाता है।

प्रश्न 3. डाॅ. अम्बडेकर ने जाति प्रथा कोश्रम विभाजन का ही एक रूप क्यों माना है
उत्तर: डाॅ. अम्बेडकर ने जाति प्रथा को श्रम विभाजन का ही एक रूप माना है क्योंकि यह श्रम विभाजन के साथ-साथ श्रमिकों का विभिन्न वर्गों में अस्वाभाविक विभाजन करती है जो, ऐसा विभाजन मनुष्य की रुचि पर आधारित नहीं होता। साथ ही यह श्रमिको केविभिन्न वर्गों को एक-दूसरे की अपेक्षा ऊँचा-नीचा भी बताती है। जाति प्रथा का सिद्धांत इसलिए भी दूषित है क्योंकि इसमें मनुष्य की प्रशिक्षण अथवा उसकी निजी क्षमता पर विचार किए बिना दूसरे दृष्टिकोण; जैसे: माता-पिता के सामजिक स्वर के अनुसार या जन्म से ही उनका पेशा निर्धारित कर दिया जाता है।

प्रश्न 4. जाति प्रथा और श्रम विभाजन में बुनियादी अंतर बताइए
उत्तर: जाति प्रथा आरै श्रम विभाजन में बुनियादी अंतर यह है कि श्रम-विभाजन-श्रमिको को विभिन्न वर्गों में अस्वाभाविक रूप सेविभाजन करता हैं जबकि जाति-प्रथा श्रमिकोे का अस्वाभाविक विभाजन करने के साथ-साथ उन्हें एक-दूसरेकी तुलना में ऊँच-नीच भी करार देती है।

प्रश्न 5. जाति प्रथा को श्रम-विभाजन का ही एक अंग न मानने के पीछे अम्बेडकर के क्या तर्क थे ?
उत्तर:

(i) जाति प्रथा को श्रम-विभाजन का ही एक अंग न मानने के पीछे डाॅ. अम्बेडकर के निम्नलिखित तर्क थेकृ ;पद्ध जाति-प्रथा श्रम विभाजन के साथ-साथ श्रमिक विभाजन का रूप लिए हुए है।
(ii) श्रम-विभाजन निश्चय ही सभ्य समाज की आवश्यकता है, परन्तु किसी भी सभ्य समाज में श्रम-विभाजन की व्यवस्था श्रमिकों का विभिन्न वर्गों में अस्वाभाविक विभाजन नहीं करती।
(iii) भारत की जाति प्रथा श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन ही नहीं करती, बल्कि विभाजित विभिन्न वर्गों को दूसरे की अपेक्षा ऊँच-नीच भी करार देती है, जो कि विश्व के किसी भी समाज में नहीं पाया जाता।
(iv) जाति प्रथा को यदि श्रम विभाजन मान लिया जाये तो यह सामाजिक विभाजन नहीं है, क्योंकि यह मनुष्य की रुचि पर आधारित नहीं है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न 1. भारत में किस चीज की छूट नहीं मिलती है?
उत्तर: अपनी मर्जी सेव्यवसाय चनुने की छटू भारत में नहीं मिलती है

प्रश्न 2. जाति प्रथा के दोषपूर्ण होने का मनुष्य के व्यवसाय पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: जातिप्रथा के दोषपूर्ण होने पर मनुष्य आजीवन एक ही व्यवसाय से बँधा रहता है।

प्रश्न 3. श्रम विभाजन का दूसरा रूप क्या है?
उत्तर: श्रम विभाजन का दूसरा रूप जाति प्रथा है।

प्रश्न 4. ‘अवाध संपर्क’ से लेखक का क्या अभिप्राय है?
उत्तर: अवाध सम्पर्क सेअभिप्राय बंधन, रूढ़िबद्धता की बाधा के बिना होने वाले सम्पर्क से है।

प्रश्न 5. लेखक के अनसुार कानै सा विभाजन स्वाभाविक नहीं ह?ै
उत्तर: जाति प्रथा को श्रम विभाजन मानना लेखक के अनुसार स्वाभाविक विभाजन नहीं है।

2. श्रम विभाजन और जाति प्रथा 
लघु उत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न 1. डाॅ. अंबेडकर की कल्पना के आदर्श समाज की तीन विशेषताएँ लिखिए
उत्तर: डाॅ. अंबेडकर की कल्पना के आदर्श समाज स्वतंत्रता, समता और भ्रातृता अर्थात् भाईचारे पर आधारित है। उनके अनुसार ऐसे समाज में सभी के लिए एक जैसा मापदण्ड तथा उसकी रुचि के अनुसार कार्यों की उपलब्धता होनी चाहिए। सभी व्यक्तियों को समान अवसर व समान व्यवहार उपलब्ध होना चाहिए। उनके आदर्श समाज में जातीय भेदभाव का तो नामोनिशान ही नहीं है। इस समाज में करनी पर बल दिया गया है कथनी पर नहीं।

प्रश्न 2. डाॅ. भीमराव अम्बडेकर के आदर्श समाज की कल्पना में ‘भ्रातृ’ का महत्व स्पष्ट कीजिए
अथवा
डाॅ. भीमराव अम्बडेकर की कल्पना के आदर्श समाज की आधारभूत बातें संक्षेप में समझाइए

अथवा
आदर्श समाज की स्थापना में डाॅ. अम्बेडकर के विचारों की सार्थकता पर अपनेविचार प्रकट कीजिए
उत्तर:
लेखक का आदर्श समाज स्वतन्त्रता, समता व भ्रातृता पर आधारित होगा। लेखक के आदर्श समाज में परिवर्तन का लाभ सभी को मिलेगा। ऐसे समाज में बहुविधि हितों में सबकी सहभागिता होगी। समाज के हित के लिए सभी सजग होंगे। सामाजिक जीवन में सबके लिए अबाध सम्पर्क के अनेक साधन व अवसर मिलेंगे। समाज में भाईचारा दूध और पानी केमिश्रण के समान होगा। हर कोई  अपनेसाथियों के प्रति प्रेम और सम्मान की भावना रखेगा।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न 1. भीमराव अंबेडकर के अनुसार आदर्श समाज किस पर आधारित होगा?
उत्तर:
आर्दश समाज स्वतंत्रता, समता व भ्रातृता पर आधारित होगा।

प्रश्न 2. सभ्य समाज की जरूरत क्या है?
उत्तर:
सभ्य समाज की जरूरत श्रम विभाजन है।

प्रश्न 3. व्यवहार्य सिद्धांत क्या होता है?
उत्तर:
सब मनुष्यों के साथ समान व्यवहार करना ही व्यवहार्य सिद्धांत कहलाता है।

प्रश्न 4. किस दृष्टिकोण से समाज को दो वर्गों व श्रेणियों में नहीं बाँटा जा सकता।
उत्तर:
मानवता के दृष्टिकोण से समाज को दो वर्गों व श्रेणियों में नहीं बाँटा जा सकता ।

प्रश्न 5. किसे ‘उत्तम व्यवहार’ का हकदार माना जाता है?
उत्तर: पूर्ण सुविधा सम्पन्नों को ही उत्तम व्यवहार का हकदार माना जाता है।

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