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Short Question Answers - ल्हासा की ओर

Short Question Answers - ल्हासा की ओर

प्रश्न 1: तिब्बत में यात्रियों के आराम के लिए क्या-क्या हैं?
उत्तरः नेपाल-तिब्बत मार्ग पर अनेक फ़ौजी चौकियाँ और किले बने हुए हैं। पहले यह एक सैनिक मार्ग भी था, इसलिए उनमें चीनी सैनिक रहा करते थे। आजकल कई किले गिर चुके हैं, और कुछ में किसानों ने अपने घर बना लिए हैं। यात्रियों को वहीं थोड़ी देर रुककर आराम करने की सुविधा मिल जाती है।

प्रश्न 2: भारत की महिलाओं की तुलना में तिब्बत की महिलाओं की सामाजिक स्थिति कैसी थी? ल्हासा की ओर पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तरः तिब्बत की औरतें पर्दा नहीं करती थीं। वे अतिथि का स्वागत-सत्कार करती थीं, चाहे घर में कोई पुरुष हो या न हो। तिब्बती औरतें जाति-पाँति और छुआछूत में विश्वास नहीं करती थीं। यही अंतर भारत और तिब्बत की औरतों में था।

ल्हासाल्हासाप्रश्न 3: लेखक ने कितनी बार तिब्बत यात्रा की और कैसा अनुभव प्राप्त किया था? पठित पाठ के आधार पर बताइए।
उत्तरः  लेखक ने दो बार तिब्बत की यात्रा की। पहली बार वे एक भिखमंगे के रूप में गए और दूसरी बार पाँच साल बाद एक भद्र यात्री के वेश में घोड़ों पर सवार होकर लौटे। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने वहाँ के समाज, भौगोलिक स्थितियों और परंपराओं का अनुभव किया। उन्होंने यह भी जाना कि लोगों का व्यवहार समय, परिस्थिति और मनोवृत्ति पर निर्भर करता है।

प्रश्न 4: तिब्बत के निर्जन स्थानों में यात्रियों की स्थिति का वर्णन कीजिए और वहाँ की कानून व्यवस्था पर प्रकाश डालिए।
उत्तरः तिब्बत के निर्जन स्थानों में यात्रियों की स्थिति बहुत दयनीय थी। डाँड़ों जैसे ऊँचे और सुनसान इलाकों में मीलों तक कोई बस्ती नहीं होती, जिससे डाकू आसानी से छिप जाते हैं। नदियों के मोड़ और पहाड़ों के कोनों के कारण दूर तक किसी को देखा नहीं जा सकता। वहाँ कानून-व्यवस्था बहुत कमजोर थी; सरकार खुफ़िया विभाग और पुलिस पर अधिक खर्च नहीं करती थी, और गवाह भी मिलना मुश्किल होता था। हथियारों पर कोई कानून नहीं था, इसलिए लोग लाठी की तरह पिस्तौल और बंदूक लेकर चलते थे। डाकू पहले यात्री को मार देते, फिर देखते कि उसके पास कुछ पैसा है या नहीं।

प्रश्न 5: तिब्बत में डाँड़े के देवता का स्थान कहाँ था? उसे कैसे सजाया गया था ?
उत्तरः तिब्बत में डाँड़े के देवता का स्थान सर्वोच्च चोटी पर था, जिसे पत्थरों के ढेर, जानवरों की सींगों और रंग-बिरंगे कपड़े की झंडियों से सजाया गया था।

प्रश्न 6: डाकुओं के लिए तिब्बत में सबसे सुरक्षित स्थान कौन-सा था जहाँ उन्हें पकड़े जाने का डर नहीं था?
उत्तरः तिब्बत में डाँड़े डाकुओं के लिए सबसे सुरक्षित स्थान थे, क्योंकि उनकी ऊँचाई के कारण मीलों तक कोई आबादी नहीं थी। नदियों के मोड़ और पहाड़ों के कोनों के कारण दूर तक कोई व्यक्ति दिखाई नहीं देता था। वहाँ कानून-व्यवस्था का प्रभाव भी बहुत कम था, क्योंकि न तो पुलिस थी और न ही सरकार खुफिया विभाग पर अधिक खर्च करती थी। इसलिए डाकुओं को पकड़े जाने का डर नहीं था।

प्रश्न 7: लेखक राहुल सांड्डत्यायन लङ्कोर के मार्ग में अपने साथियों से किस प्रकार पिछड़ गए थे और कब साथ हुए?
उत्तरः लेखक लङ्कोर के मार्ग में अपने साथियों से इसलिए पिछड़ गए क्योंकि रास्ता ऊँची चढ़ाई वाला था और उन्हें जो घोड़ा मिला था वह बहुत सुस्त था। चलते-चलते वह बहुत पीछे रह गए। रास्ते में एक स्थान पर दो रास्ते निकलते थे, जिनमें से उन्होंने गलत रास्ता ले लिया और मील-डेढ़ मील आगे चले गए। आगे एक घर में पूछने पर उन्हें सही रास्ते का पता चला। फिर वे वापस लौटे और सही रास्ता पकड़कर गाँव के पास पहुँचे, जहाँ उनके साथी सुमति उनका इंतज़ार कर रहे थे।

प्रश्न 8: सुमति गंडे कैसे बनाता था?
उत्तरः सुमति बोधगया से लाए गए कपड़े से गंडे बनाता था। उसके यजमान अधिक होने के कारण जब वह कपड़ा समाप्त हो जाता, तो वह किसी भी कपड़े की पतली-पतली चीरियों से गंडे बना लेता था।

प्रश्न 9: तिब्बत में डाकुओं द्वारा मारे गये आदमी की क्या स्थिति होती है?
उत्तरः तिब्बत में यदि डाकू किसी यात्री को मार देते हैं, तो उसकी मौत की कोई परवाह नहीं करता। निर्जन स्थानों में मरे हुए व्यक्तियों के लिए सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती। वहाँ हत्या का गवाह मिलना मुश्किल होता है और पुलिस जाँच भी नहीं होती।

प्रश्न 10: लेखक का घोड़ा कैसे चल रहा था और क्यों?
उत्तर: लेखक का घोड़ा बहुत धीरे-धीरे चल रहा था, क्योंकि वह थका हुआ और सुस्त था। लेखक समझ रहा था कि यह थकावट की वजह से है, इसलिए वह उसे मारना नहीं चाहता था। धीरे-धीरे घोड़ा इतना पीछे रह गया कि लेखक रास्ता भी भटक गया।

प्रश्न 11: लेखक सुमति को यजमानों से मिलने क्यों नहीं जाने देना चाहता था? 

उत्तर: लेखक को डर था कि सुमति अपने यजमानों के पास जाकर कई दिन वहीं ठहर जाएगा, जिससे लेखक को भी उसकी प्रतीक्षा में रुकना पड़ेगा। इससे उसकी यात्रा और अध्ययन के उद्देश्य में बाधा आ सकती थी।

प्रश्न 12: लेखक ने तिब्बत यात्रा किस वेश में की और क्यों?
उत्तर: लेखक ने भिखमंगे के वेश में तिब्बत की यात्रा की क्योंकि उस समय भारतीयों को वहाँ जाने की अनुमति नहीं थी और रास्ते में डाकुओं का डर भी था। इस वेश में वह आसानी से छिपकर यात्रा कर सकता था।

प्रश्न 13: सर्वोच्च स्थान को क्यों और किस प्रकार सजाया गया था?
उत्तर: सर्वोच्च स्थान को इसलिए सजाया गया था क्योंकि वहाँ डाँड़े के देवता का स्थान माना जाता है। इसे श्रद्धा से पत्थरों, जानवरों के सींगों और रंग-बिरंगी झंडियों से सजाया गया था।

प्रश्न 14: भीटे की तरफ दिखने वाले पहाड़ कैसे थे?
उत्तर: भीटे की तरफ दिखाई देने वाले पहाड़ बिल्कुल सूने और नंगे थे। उन पर न तो बर्फ की सफेदी दिखती थी और न ही हरियाली दिखाई देती थी।

प्रश्न 15: लङ्कोर में वे कहाँ ठहरे और क्या खाया?
उत्तर: लङ्कोर में वे अपने पुराने यजमान के घर ठहरे। वहाँ पहले चाय पी, सत्तू खाया और रात को थुक्पा खाने को मिला।

प्रश्न 16: अपनी यात्रा के दौरान लेखक ने तिब्बत के विषय में क्या अनुभव किया?
उत्तर: अपनी यात्रा के दौरान लेखक ने अनुभव किया कि तिब्बत की जमीन छोटे-बड़े जमींदारों में बँटी है, वहाँ की संस्कृति अच्छी है, और लोगों का व्यवहार अच्छा है।

प्रश्न 17: तिब्बत के मार्ग में आदमी कम क्यों दिखाई देते हैं?
उत्तर: तिब्बत के रास्तों में आदमी बहुत कम दिखाई देते हैं क्योंकि ये रास्ते बहुत कठिन हैं - कहीं नदियों के तीखे मोड़ हैं, तो कहीं पहाड़ों के कोने हैं। रास्ते सुनसान और दुर्गम हैं।

प्रश्न 18: गाँव पहुँचकर लेखक को क्या बात मालूम हुई? 
उत्तर: गाँव पहुँचकर लेखक को मालूम हुआ कि पिछले साल थोङला के पास खून हो गया था। लेकिन लेखक को इस बात की परवाह नहीं थी, न ही कोई डर था क्योंकि लेखक इस समय कंगाल था। अर्थात् भिखमंगे के वेश में था और डाकू भिखमंगों पर हमला नहीं करते थे।

प्रश्न 19: तिब्बत में जमीन की क्या स्थिति है?
उत्तर: तिब्बत में जमीन का अधिकतर भाग छोटे-बड़े जागीरदारों और मठों में बँटा हुआ है। मठों को बेगार में मजदूर मिलते हैं। खेती का इंतजाम भिक्षु करता है, जिसका रुतबा किसी राजा से कम नहीं होता।

प्रश्न 20: यजमान से क्या तात्पर्य है? सुमित द्वारा दिए गए गंडों को वे इतना महत्व क्यों देते थे? 'ल्हासा की ओर' पाठ के आधार पर बताइए।
उत्तरः 'यजमान' का शाब्दिक अर्थ है - यज्ञ कराने वाला या यज्ञ का आयोजक। गाँव वाले सुमति के यजमान थे और सुमति उन गाँव वालों के धर्मगुरु थे। उनके प्रति गाँव वालों की गहरी श्रद्धा थी, इसलिए वे उनके दिए हुए गंडों को बहुत महत्व देते थे।

ल्हासा की ओर पाठ के सारांश को यहाँ पढ़ें।

ल्हासा की ओर पाठ इस वीडियो की मदद से  पूरा समझें। 

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FAQs on Short Question Answers - ल्हासा की ओर

1. What is the main theme of "ल्हासा की ओर" and why does Rahul Sankrityayan write about this journey?
Ans. "ल्हासा की ओर" (Towards Lhasa) documents Rahul Sankrityayan's travelogue describing his journey to Tibet, emphasizing adventure, cultural exploration, and geographical discovery. The author writes to share firsthand experiences of traversing difficult terrain, encountering diverse communities, and understanding Tibetan culture. This narrative reflects the spirit of exploration and scholarly curiosity that defines travel literature in Hindi.
2. Who are the main characters and what challenges do they face during their expedition in ल्हासा की ओर?
Ans. Rahul Sankrityayan and his companions undertake the treacherous journey across mountains and valleys towards Lhasa. They encounter extreme weather conditions, physical exhaustion, altitude sickness, and geographical obstacles. The text vividly portrays their perseverance against natural hardships, food scarcity, and unfamiliar terrain. These challenges highlight human resilience and determination in the face of adversity during their expedition through the Himalayas.
3. What are the important descriptive passages in ल्हासा की ओर that explain the landscape and environment?
Ans. The chapter contains vivid landscape descriptions of snow-covered peaks, barren plateaus, and river valleys encountered during the journey. Sankrityayan's detailed environmental portrayal includes observations of weather patterns, vegetation changes, and geographical features across different altitudes. These descriptive passages serve dual purposes: they establish the physical setting while revealing the author's observational skills and appreciation for natural beauty in travelogue writing.
4. How does the short question answer format help in understanding character motivations and plot progression in this chapter?
Ans. Short question-answer sections break complex narrative elements into digestible segments, clarifying why characters make specific decisions and how events unfold sequentially. This format enables students to extract key motivations-such as intellectual curiosity and adventurous spirit-without navigating lengthy paragraphs. Structured Q&A format strengthens comprehension of cause-and-effect relationships and character development within the travelogue narrative for CBSE Class 9 Hindi examinations.
5. What literary devices and writing techniques does Rahul Sankrityayan use to make the journey in ल्हासा की ओर engaging for readers?
Ans. Sankrityayan employs vivid imagery, metaphorical language, and first-person narrative to create immediacy and authenticity in his travelogue. He uses descriptive techniques to transport readers into harsh Himalayan conditions while incorporating cultural observations and personal reflections. Dialogue with local people and detailed sensory descriptions-sight, sound, temperature-enhance reader engagement. These literary strategies transform factual journey documentation into compelling narrative prose suitable for Class 9 Hindi curriculum.
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