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अनौपचारिक पत्र

अनौपचारिक पत्र

1. अपने मित्र को नव वर्ष पर शुभकामना पत्र लिखिए।
बी-413 डी० एल० एफ०
अंकुर विहार
दिनांक ......
प्रिय मित्र कुणाल
स्नेह!
तुम खुशहाल होंगे मैं यहां आनंद में हूं। मेरे मित्र तुम्हें नव वर्ष की ढेर सारी शुभकामनाएं। तुम्हें यह साल नाविन्यपूर्ण जाओ और यह साल सुख समृद्धि से जाओ। तुम्हें आनंद पूर्वक यह साल जाओ। तुमको तुम्हारे सारे मार्ग अच्छे हो और तुम्हें हर कदम पर सफलता प्राप्त हो। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि तुम्हारी इच्छा पूर्ण हो। और तुम हर साल अव्वल आओ। फिर से नव वर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएं और तुम्हारे पूरे परिवार को भी शुभकामनाएं।
शुभकामनाएँ स्वीकार करो।
सधन्यवाद
तुम्हारा मित्र
क ख ग


2. आपके जन्म दिन पर आपके मामा जी ने आपको एक सुंदर उपहार भेजा है। इस उपहार के लिए धन्यवाद एवं कृतज्ञता।
व्यक्त कीजिए।
जी० 501 सुंदर विहार
नई दिल्ली
दिनांक ......
पूज्य मामा जी
सादर प्रणाम
मेरे जन्म दिन पर आपके द्वारा भेजा गया बधाई संदेश तथा एक सुंदर हाथ-घड़ी का उपहार मिला। आपके द्वारा भेजा गया यह उपहार मेरे सभी मित्रों एवं सहपाठियों को भी काफ़ी पसंद आया।
मैं तो आशा कर रहा था कि इस बार आप मेरे जन्म-दिन पर स्वयं उपस्थित होकर मुझे स्नेह आशीर्वाद देंगे, परंतु किसी कारण आप न आ सके। जब आपको उपहार प्राप्त हुआ, तो मेरी सारी शिकायत दूर हो गई और आपके प्रति कृतज्ञता से भर गया। आपके द्वारा भेजा गया उपहार मुझे आपके स्नेह का स्मरण कराता रहेगा।
इतने सुंदर उपहार के लिए मैं आपका कृतज्ञ हूँ। आदरणीय मामा जी को सादर प्रणाम, ओजस्व को स्नेह।
आपका भानजा
क ख ग


3. अपने पिता जी को कुछ रुपए मंगवाने के लिए पत्र।
पैरामाउंट छात्रावास
सैक्टर-18, नोएडा
उत्तर प्रदेश
दिनांक ..........
पूज्य पिता जी,
सादर चरण-स्पर्श ।
आपके आशीर्वाद से मैं पूर्णतः स्वस्थ हूँ। मैं आशा करता हूँ कि आप भी सपरिवार सकुशल होंगे और ईश्वर से यही कामना करता हूँ। आपको यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता होगी कि मेरी वितीय सत्र की परीक्षा का परिणाम आ गया है। मुझे गणित तथा विज्ञान में शत-प्रतिशत अंक मिले हैं तथा शेष विषयों में 93 प्रतिशत अंकों के आधार पर मैं कक्षा में प्रथम आया हूँ।
अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह से मेरी नई कक्षा की पढ़ाई शुरू हो जाएगी। मुझे नई किताबें, कापियाँ तथा हॉस्टल की फीस देने के लिए सात हजार रुपयों की जरूरत है। मुझे हॉस्टल की फ़ीस तथा पुस्तकों का कार्य 30 मार्च से पहले करना है, इसलिए शीघ्र पैसे भेजने का कष्ट करें।
मेरी ओर से पूजनीय माता और चाची को सादर प्रणाम तथा दीदी को प्रणाम।
आपका आज्ञाकारी पुत्र
अक्षत कुमार


4. अपनी सखी को अपनी बड़ी बहन के विवाह पर आमंत्रित करते हुए पत्र।
J-415 नेहरू नगर
सोनीपत (हरियाणा)
दिनांक.........
प्रिय सखी कोमल
मधुर स्मृति
तुम्हें यह जानकर अति प्रसन्नता होगी कि मेरी बड़ी बहन नेहा दीदी का शुभ विवाह 10 फरवरी 20XX को होना निश्चित हुआ है। मेरी हार्दिक इच्छा है कि इस अवसर पर तुम भी यहाँ आ जाओ और कार्यक्रम में सम्मिलित हो।
पत्र के साथ मैं कार्यक्रम संबंधी पूरी जानकारी भेज रही हूँ तथा एक निमंत्रण पत्र तुम्हारे माता-पिता के लिए भी संलग्न कर रही हूँ। मेरे माता-पिता की इच्छा है कि तुम्हारे माता-पिता भी इस अवसर पर पधारकर कृतार्थ करें। पत्र के उत्तर की प्रतीक्षा में।
तुम्हारी सखी
अंशु


5. मित्र के दादा जी के निधन पर उसे सांत्वना पत्र लिखिए।
परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक .....
प्रिय मित्र रोहन
सस्नेह नमस्कार
कल शाम को तुम्हारा मित्र मिला। यह जानकर बड़ा दुख हुआ कि तुम्हारे पूज्य दादा जी को अचानक निधन गत सप्ताह हो गया। यह सुनकर मैं स्तब्ध रह गया। मुझे इस समाचार पर सहसा विश्वास नहीं हुआ। पिछले महीने जब मैं तुम्हारे यहाँ आया था तब वे कितने प्रसन्नचित एवं स्वस्थ लग रहे थे। उन्होंने उपहार के तौर पर एक कलम भी दिया था। वह कलम सदैव उनकी स्मृति बनकर मेरे पास रहेगा।
ईश्वर से मेरी प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को सद्गति और तुम्हें एवं तुम्हारे परिवारजनों को यह दुख सहने की शक्ति एवं धैर्य प्रदान करे।
मित्र, ईश्वर की लीला बड़ी विचित्र है। उनकी मरजी पर किसी का ज़ोर नहीं। जीवन-मरण उनके साथ ही में है। मैं तुमसे मिलने अवश्य आऊँगा।
तुम्हारा अभिन्न मित्र
राकेश


6. अपने विद्यालय में खेल का सामान मँगवाने के लिए प्रधानाचार्या को पत्र लिखिए।

सेवा में,
प्रधानाचार्य जी,
विद्या निकेतन विद्यालय
दरियागंज - दिल्ली
10 अगस्त, 20XX
विषय: विद्यालय में खेल का सामान मँगवाने हेतु पत्र
महोदय
हमारे विद्यालय में खेल के सामान की कमी काफ़ी दिनों से महसूस की जा रही है। बास्केट बॉल का नेट तथा बॉल, क्रिकेट के बैट बॉल, हॉकी तथा बैडमिंटन के रैकेट आदि पुराने हो चले हैं एवं उनकी मात्रा भी कम हैं। खेलप्रेमी बच्चे दिनोंदिन बढ़ते चले जा रहे हैं। ऐसे में अनेक बच्चे तो निराश होकर लौट ही जाते हैं।
आपसे अनुरोध है कि आप इस समस्या का जल्द से जल्द निपटारा करें। खेल के पुराने सामान के स्थान पर अधिक मात्रा में नया सामान मँगवाएँ, जिससे खिलाड़ी बच्चों की मुसकान वापस लाई जा सके और उन्हें आगे बढ़ने के लिए नए अवसर प्रदान किए जा सकें।
धन्यवाद
आपकी आज्ञाकारी छात्रा
कोमल श्रीवास्तव
कक्षा 7 'सी'


7. पुनः प्रवेश हेतु प्रधानाचार्या को पत्र लिखिए।
सेवा में,
प्रधानाचार्या महोदया,
रा.स.स.शि.उ.मा. विद्यालय,
सूरजमल विहार,
नई दिल्ली।
विषय: पुनः प्रवेश हेतु प्रार्थना पत्र।
महोदया,
निवेदन है कि मुंबई में रह रहे मेरे बड़े भाई को दुर्घटना में गंभीर चोट आ गई थी। उस सूचना के मिलने पर यकायक पिता जी के साथ मुझे मुंबई जाना पड़ा और वहाँ मुझे अधिक दिनों तक रहना पड़ा, जिसकी कोई सूचना विद्यालय नहीं भेजी गई थी। इसलिए लगातार अनुपस्थित रहने के कारण मेरा नाम काट दिया गया है।
अतः आपसे प्रार्थना है कि पुनः प्रवेश करने के लिए अनुमति प्रदान करने की कृपा करें। आपका आभारी रहूँगा।
सधन्यवाद।
आपका आज्ञाकारी शिष्य।
हेमांग शर्मा
X-B, अनुक्रमांक
15 जुलाई, 20XX


8. चरित्र प्रमाण पत्र के लिए प्रधानाचार्या को पत्र लिखिए।
सेवा में,
प्रधानाचार्या महोदया,
दिल्ली पब्लिक स्कूल,
नोएडा,
गौतम बुद्ध नगर (उ.प्र.)।
विषय: चरित्र प्रमाण पत्र हेतु।
महोदया,
निवेदन यह है कि मैं इस विद्यालय में 2010 में IX कक्षा की छात्रा रही हूँ। अब मेरे पिता जी का स्थानांतरण नोएडा से जनकपुरी दिल्ली में हो गया है। मुझे जनकपुरी स्थित विद्यालय में प्रवेश लेना है। प्रवेश हेतु आवेदन पत्र के साथ चरित्र प्रमाण पत्र भी आवश्यक है।
मैं पढ़ाई के साथ-साथ पाठ्य सहगामी क्रियाओं में भी सक्रिय भाग लेती रही हूँ। मैं कबड्डी टीम की कप्तान रही हूँ। मैंने वाद-विवाद प्रतियोगिता में पुरस्कार भी जीता है।
आपसे प्रार्थना है कि मुझे चरित्र प्रमाण पत्र प्रदान करने की कृपा करें जिसमें शैक्षिक एवं अन्य सहगामी क्रियाओं का उल्लेख किया गया हो।
सधन्यवाद।
आपकी आज्ञाकारिणी शिष्या।
आकांक्षा मौर्या
X-A, अनुक्रमांक 08
05 जुलाई, 20XX


9. किसी छात्र को सम्मानित करने हेतु विद्यालय की प्रधानाचार्या को अनुरोध पत्र लिखिए।
सेवा में,
प्रधानाचार्या महोदया,
डी.पी.एस. पब्लिक स्कूल,
गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश।
विषय: छात्रा को सम्मानित करने हेतु पत्र।
महोदय,
निवेदन है कि तृषा चौधरी हमारे विद्यालय की ऐसी प्रतिभाशालिनी छात्रा है, जिसने तैराकी-प्रतियोगिता में अनेक मैडल प्राप्त कर विद्यालय की उपलब्धियों में वृद्धि की है। इतना ही नहीं, वह अदम्य उत्साह से भरपूर है।
एक दिन प्रातः काल वह अपने पिता जी के साथ दिल्ली स्थित किसी तरणताल में अभ्यास के लिए आ रही थी। वह पिता जी से अपनी तैराकी के अभ्यास और उपलब्धियों के बारे में बात करने में मग्न थी। तभी सड़क पर एक घायल व्यक्ति को चीखते-कराहते हुए देखा। कोई वाहने उसे टक्कर मारकर भाग गया था। उस घायल की चीख सुनकर पिता जी से कार रुकवाकर उसे अस्पताल पहुँचाया और घायल व्यक्ति की जेब से परिचय-पत्र निकाल, उस पर लिखे पते के माध्यम से उसके घरवालों को सूचित किया। तृषा के इस मानवीय कार्य की अखबारों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की है, उसका चित्र भी छपा है। महोदया, तृषा हमारे लिए प्रेरणामयी छात्रा है, जिसमें मानवता-करुणा कूट-कूट कर भरी हुई है। उसने तैराकी में भी विद्यालय को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। अपनी कक्षा की ओर से आपसे अनुरोध है कि संपूर्ण विद्यालय के सामने उसके इस कृत्य की सराहना करते हुए सम्मानित और पुरस्कृत करें जिससे हम सभी छात्रों को प्रेरणा मिले तथा तृषा के इस मानवीयपूर्ण कार्य से कुछ सीख सकें।
सधन्यवाद।
प्रार्थिनी,
आकांक्षा
X-अ, अनुक्रमांक......
20 अगस्त, 20XX


10. राजीव के पिता जी हाथरस से स्थानांतरित होकर दिल्ली आ गए हैं। उनकी ओर से डी.ए.वी. के प्रधानाचार्य को पत्र लिखिए जिसमें ग्यारहवीं कक्षा में प्रवेश देने के लिए अनुरोध किया गया हो।
सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल,
श्रेष्ठ विहार, दिल्ली-110092
विषय: ग्यारहवीं में प्रवेश हेतु प्रार्थना-पत्र।
महोदय,
विनम्र निवेदन यह है कि मैं भारतीय स्टेट बैंक, सुलतानपुर (उ.प्र.) की शाखा में वरिष्ठ लिपिक पद पर कार्यरत था। मेरी पदोन्नति होने के साथ ही मेरा स्थानांतरण दिल्ली स्थित आनंद विहार शाखा में हो गया। गत सप्ताह से मैंने कार्यभार ग्रहण कर यहीं आनंद विहार के पास रहना शुरू कर दिया है। मेरे पुत्र राजीव ने इसी सत्र अर्थात् 2010 में उ.प्र. बोर्ड से दसवीं परीक्षा 92 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की है। मैं अपने पुत्र का XI में प्रवेश इस विद्यालय में कराना चाहता हूँ।
आपसे विनम्र अनुरोध है कि आप इसे अपने विद्यालय में प्रवेश देने की कृपा करें। साथ में आश्वस्त करता हूँ कि मेरा बेटा एक अनुशासित, उत्साहित और अध्ययन के प्रति विशेष रूप से गंभीर है।
राजीव का विद्यालय छोड़ने का प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र आवेदन पत्र के साथ संलग्न है।
सधन्यवाद।
भवदीय,
विनय सिंह कुशवाहा (पिता)
51, आनंद विहार,
दिल्ली-110092
25 जुलाई, 20XX

The document अनौपचारिक पत्र is a part of the Class 7 Course Hindi Grammar Class 7.
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FAQs on अनौपचारिक पत्र

1. अनौपचारिक पत्र और औपचारिक पत्र में क्या अंतर होता है?
Ans. अनौपचारिक पत्र मित्रों, रिश्तेदारों और परिचितों को लिखे जाते हैं और सरल, व्यक्तिगत भाषा का उपयोग करते हैं, जबकि औपचारिक पत्र सरकारी संस्थाओं, कार्यालयों और अधिकारियों को लिखे जाते हैं जिनमें शुद्ध व्याकरण और गंभीर शैली होती है। अनौपचारिक पत्र में भावनाएँ और अपनत्व होता है, जबकि औपचारिक पत्र में व्यावसायिकता और शिष्टाचार होता है।
2. अनौपचारिक पत्र लिखते समय पत्र का आरंभ और समापन कैसे करते हैं?
Ans. अनौपचारिक पत्र का आरंभ प्रिय दोस्त, प्रिय भैया, बहुत समय बाद लिख रहा हूँ जैसे व्यक्तिगत संबोधन से होता है। समापन में तुम्हारा प्रिय, शुभकामनाएँ, प्रेम सहित, या तुम्हारा मित्र जैसे स्नेहपूर्ण और अपनत्व भरे शब्द आते हैं। यह शैली पत्र को व्यक्तिगत और हृदयस्पर्शी बनाती है।
3. अनौपचारिक पत्र का प्रारूप या संरचना क्या होती है?
Ans. अनौपचारिक पत्र की संरचना में पता, तारीख, संबोधन, पत्र का मुख्य भाग (विषय वस्तु), और हस्ताक्षर होते हैं। मुख्य भाग में कई अनुच्छेद हो सकते हैं जो विभिन्न विचारों, सूचनाओं और भावनाओं को व्यक्त करते हैं। इस पत्र में कोई विषय पंक्ति नहीं होती और भाषा सरल, आत्मीय एवं प्रभावी होती है।
4. अनौपचारिक पत्र में कौन सी भाषा शैली और व्याकरण का प्रयोग करते हैं?
Ans. अनौपचारिक पत्र में सरल, सहज और बोलचाल की भाषा शैली का उपयोग किया जाता है जो व्यक्तिगत संवाद को दर्शाती है। वाक्य संरचना छोटी और सीधी होती है, और लेखक अपनी भावनाओं को स्वतंत्र रूप से व्यक्त कर सकता है। व्याकरण में कुछ लचीलापन होता है, लेकिन बुनियादी शुद्धता बनाई जानी चाहिए।
5. अनौपचारिक पत्र लिखते समय कौन सी गलतियाँ और त्रुटियाँ करने से बचना चाहिए?
Ans. अनौपचारिक पत्र में बहुत अधिक अलंकृत या जटिल भाषा, व्याकरणिक त्रुटियाँ, पत्र की संरचना को भूलना, और अत्यधिक लंबाई वाली, अव्यवस्थित लेखन शैली से बचना चाहिए। संबोधन और समापन को सही तरीके से लिखना आवश्यक है। EduRev पर उपलब्ध नमूना पत्र, PPT और अभ्यास कार्यपत्रक देखकर आप प्रचलित गलतियों को समझ सकते हैं।
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