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NCERT Solutions: मैया मैं नहिं माखन खायो

पाठ से

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर न-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए-

(1) मैं माखन कैसे खा सकता हूँ? इसके लिए श्रीकृष्ण ने क्या तर्क दिया?

  • मुझे तुम पराया समझती हो।
  • मेरी माता, तुम बहुत भोली हो।
  • मुझे यह लाठी-कंबल नहीं चाहिए।
  • मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?

उत्तर: मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं? (★) 

(2) श्रीकृष्ण माँ के आने से पहले क्या कर रहे थे?

  • गाय चरा रहे थे।
  • माखन खा रहे थे।
  • मधबुन में भटक रहे थे। 
  • मित्रों के संग खेल रहे थे।

उत्तर: माखन खा रहे थे। (★) 

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर न-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए-

उत्तर:

  • माँ यशोदा जब कृष्ण के मुँह पर माखन लगा देखती हैं और उन्हें डाँटने लगती हैं, तो वे छींके तक हाथ न पहुँचने का बहाना बनाते हैं।
  • 'माखन खा रहे थे' यह विकल्प सही है क्योंकि पद्यांश की शुरुआत ही इस पंक्ति से हुई है-'मैया मैं नहिं माखन खायो', अर्थात कृष्ण माँ से माखन न खाने की बात कर रहे हैं।

मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुनकर यहाँ कुछ शब्द दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
मिलकर करें मिलान

उत्तर:
मिलकर करें मिलान

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए। 

(क) 'भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो "
उत्तर:
इस पंक्ति में श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा से कहते हैं कि सुबह होते ही उन्हें गायों के साथ मधुबन भेज दिया जाता है। इसका अर्थ है कि दिन की शुरुआत में ही वे गायों को चराने के लिए वन में चले जाते हैं।

(ख) " सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो "
उत्तर: 
इस पंक्ति में कवि सूरदास कहते हैं कि यशोदा ने श्रीकृष्ण की बातों को सुनकर हँसते हुए उन्हें गले से लगा लिया। यह दर्शाता है कि यशोदा ने श्रीकृष्ण की मासूमियत और भोलेपन पर प्रेमपूर्वक प्रतिक्रिया दी।

सोच-विचार के लिए

पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर ढूँढ़कर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-

(क) पद में श्रीकृष्ण ने अपने बारे में क्या-क्या बताया है?
उत्तर: 
श्रीकृष्ण ने अपनी माँ यशोदा से कहा कि उन्होंने माखन नहीं खाया है। वे सुबह होते ही गायों को चराने के लिए मधुबन चले जाते हैं और शाम को घर लौटते हैं। उनके छोटे-छोटे हाथ छीके तक नहीं पहुँच सकते, इसलिए वे माखन नहीं चुरा सकते। उन्होंने यह भी कहा कि ग्वाल-बाल उनके मुख पर जबरदस्ती माखन लगा देते हैं, जिससे वे दोषी नज़र आएं।

(ख) यशोदा माता ने श्रीकृष्ण को हँसते हुए गले से क्यों लगा लिया?
उत्तर: 
श्रीकृष्ण की मासूमियत और उनके भोले तर्कों को सुनकर यशोदा माता का हृदय प्रेम से भर गया। उनकी बातों में सच्चाई और सरलता देखकर यशोदा हँस पड़ीं और अपने पुत्र को स्नेहपूर्वक गले से लगा लिया।

कविता की रचना

" भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो ।
चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर यो । ।

इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों को ध्यान से देखिए । 'पठायो' और 'आयो' दोनों शब्दों की अंतिम ध्वनि एक जैसी है। इस विशेषता को 'तुक' कहते हैं। इस पूरे पद में प्रत्येक पंक्ति के अंतिम शब्द का तुक मिलता है । अनेक कवि अपनी रचना को प्रभावशाली बनाने के लिए तुक का उपयोग करते हैं।

(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस पाठ की विशेषताओं की सूची बनाइए, जैसे इस पद की अंतिम पंक्ति में अपना नाम भी दिया है आदि ।
उत्तर: 
इस पद की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • तुकांतता: प्रत्येक पंक्ति के अंतिम शब्दों में तुकांतता है, जो कविता को लयबद्ध बनाती है।
  • कवि परिचय: अंतिम पंक्ति में कवि सूरदास ने अपना नाम उल्लेखित किया है, जो उस समय की परंपरा थी।
  • भाषा शैली: कविता ब्रज भाषा में रचित है, जो उस समय की लोकप्रिय भाषा थी।
  • भावनात्मक चित्रण: श्रीकृष्ण और यशोदा के बीच के स्नेहपूर्ण संबंधों का सुंदर चित्रण किया गया है।
  • बाल सुलभ तर्क: श्रीकृष्ण के तर्क उनके बाल सुलभ स्वभाव को दर्शाते हैं, जो पाठक को आकर्षित करते हैं।

(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर: 
छात्र अपने समूह में चर्चा करके उपरोक्त विशेषताओं को कक्षा में साझा कर सकते हैं।

अनुमान या कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-

(क) श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा को तर्क क्यों दे रहे होंगे ?
उत्तर:
श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा को तर्क इसलिए दे रहे थे क्योंकि उन पर माखन चोरी करने का आरोप लगा था। वे अपनी मासूमियत और भोलेपन से माँ को समझाना चाहते थे कि उन्होंने माखन नहीं खाया है और ग्वाल-बाल उनके खिलाफ झूठी शिकायत कर रहे हैं।

(ख) जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को गले से लगा लिया, तब क्या हुआ होगा?
उत्तर:
जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को गले से लगा लिया, तब श्रीकृष्ण ने अपनी माँ के स्नेह को महसूस किया होगा और उन्हें संतोष मिला होगा कि उनकी माँ ने उनकी बातों पर विश्वास किया। यशोदा माता का सारा संदेह दूर हो गया होगा और उन्होंने अपने पुत्र की मासूमियत पर प्रेम जताया होगा।

शब्दों के रूप

नीचे शब्दों से जुड़ी कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं। इन्हें करने के लिए आप शब्दकोश, अपने शिक्षकों और साथियों की सहायता भी ले सकते हैं।

(क) 'भोर भयो गैयन के पाछे"
इस पंक्ति में 'पाछे' शब्द आया है। इसके लिए 'पीछे' शब्द का उपयोग भी किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते लिखते हैं, उस प्रकार से लिखिए।

  • परे - _____________
  • कछु - _____________
  • छोटो - _____________
  • लै - _____________
  • बिधि - _____________
  • नहिं - _____________
  • भोरी - _____________

उत्तर:

  • परे - पड़े
  • कछु - कुछ
  • छोटो - छोटा
  • लै - लेना
  • बिधि - विधि, प्रकार
  • नहिं - नहीं
  • भोरी - भोली

(ख) पद में से कुछ शब्द चुनकर नीचे स्तंभ 1 में दिए गए हैं और स्तंभ 2 में उनके अर्थ दिए गए हैं। शब्दों का उनके सही अर्थों से मिलान कीजिए-
शब्दों के रूपउत्तर:
शब्दों के रूप

वर्ण - परिवर्तन

" तू माता मन की अति भोरी'
'भोरी' का अर्थ है 'भोली'। यहाँ 'ल' और 'र' वर्ण परस्पर बदल गए हैं। आपने ध्यान दिया होगा कि इस पद में कुछ और शब्दों में भी 'ल' या 'ड़' और 'र' में वर्ण- परिवर्तन हुआ है। ऐसे शब्द चुनकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर:

  • परे - पड़ना
  • भोरी - भोली

पंक्ति से पंक्ति

नीचे स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं और स्तंभ 2 में उनके भावार्थ दिए हैं। रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए।
पंक्ति से पंक्तिउत्तर:
पंक्ति से पंक्ति

पाठ से आगे

आपकी बात

"मैया मैं नहिं माखन खायो "
यहाँ श्रीकृष्ण अपनी माँ के सामने सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं कि उन्होंने माखन महीं खाया है। कभी-कभी हमें दूसरों के सामने सिद्ध करना पड़ जाता है कि यह कार्य हमने नहीं किया। क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है? कब? किसके सामने? आपने अपनी बात सिद्ध करने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए? उस घटना के बारे में बताइए ।

उत्तर: हाँ, जीवन में कई बार ऐसी घटनाएँ घट जाती हैं जब हम सत्य कह रहे होते हैं तब भी लोग उस पर विश्वास नहीं कर पाते और यदि ऐसे में साक्ष्य न हो तो अच्छा-खासा सच भी झूठ की शंका के नीचे दबकर दम तोड़ देता है। इसके लिए काफी हद तक दोषी हम सभी हैं क्योंकि अधिकतर लोग अपनी आदत के कारण झूठ का सहारा लेते हैं।
मैं विद्यालय अपनी साइकिल से जाता हूँ। आज मेरी वार्षिक परीक्षा थी। वर्षा हो रही थी । मैं घर से थोड़ी दूर ही गया था कि मैंने देखा कि एक वृद्ध व्यक्ति सड़क के किनारे दुर्घटनाग्रस्त पड़े हैं। उनके पाँव से खून बह रहा था। मैंने उन्हें अस्पताल पहुँचाने का निश्चय किया। मैंने उन्हें अपनी साइकिल पर बिठाया और सरकारी अस्पताल ले गया। अधिक खून बह जाने के कारण वे अर्ध-मूर्च्छित हो रहे थे। उन्हें अस्पताल छोड़कर मैं विद्यालय आया । उस समय तक मैं आधा घंटा देर से विद्यालय पहुँचा था । देर से आने के कारण मुझे विद्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया गया। मेरी बात पर स्कूल के गेट पर खड़े गार्ड ने विश्वास ही नहीं किया। उन्होंने कहा कि वे विद्यालय के नियम के विरुद्ध नहीं जा सकते। तभी वहाँ पर हमारे पी.टी. सर आ गए। उन्हें मेरी बात पर विश्वास हो गया। उन्होंने प्रधानाध्यापक से बात की। विद्यालय से जब अस्पताल फ़ोन करके पूछा गया तो मेरी बात सत्य सिद्ध हुई। मुझे मेरे काम की शाबासी देते हुए प्रधानाचार्य जी ने मुझे परीक्षा पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय भी दिया और अगले दिन मेरे कार्य की प्रशंसा प्रात:कालीन प्रार्थना सभा में भी की गई।

घर की वस्तुएँ

"मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।" 'छीका' घर की एक ऐसी वस्तु है जिसे सैकड़ों वर्ष से भारत में उपयोग में लाया जा रहा है।
नीचे कुछ और घरेलू वस्तुओं के चित्र दिए गए हैं। इन्हें आपके घर में क्या कहते हैं? चित्रों के नीचे लिखिए। यदि किसी चित्र को पहचानने में कठिनाई हो तो आप अपने शिक्षक, परिजनों या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।
घर की वस्तुएँ

उत्तर: मटका, प्रेस (इस्तरी), चौपाया, सिलाई मशीन, चारपाई, मर्तबान, सूप, सिल- लोढ़ा (पट्टा), जाँत, बेना (पंखा), मथानी, चलनी, कटोरदान, ओखली, मथानी - मटका

आप जानते ही हैं कि श्रीकृष्ण को मक्खन बहुत पसंद था। दूध से दही, मक्खन बनाया जाता है और मक्खन से घी बनाया जाता है। नीचे दूध घी बनाने की प्रक्रिया संबंधी कुछ चित्र दिए गए हैं। अपने परिवार के सदस्यों, शिक्षकों या इंटरनेट आदि की सहायता से दूध से घी बनाने की प्रक्रिया लिखिए ।

घर की वस्तुएँ
उत्तर: सर्वप्रथम दूध को जामन लगाकर दही बनाया जाता है। दही को मथने से माखन बनता है। माखन को हांड़ी या किसी बड़े बर्तन में डालकर गर्म किया जाता है। धीरे-धीरे वह घी में परिवर्तित होने लगता है। हांड़ी में बने घी को छान लिया जाता है और बची 'करोनि' को भी खा सकते हैं।

समय का माप

" चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो।।"

(क) 'पहर' और 'साँझ' शब्दों का प्रयोग समय बताने के लिए किया जाता है। समय बताने के लिए और कौन-कौन से शब्दों का प्रयोग किया जाता है? अपने समूह में मिलकर सूची बनाइए और कक्षा में
साझा कीजिए ।
(संकेत- कल, ऋतु, वर्ष, अब पखवाड़ा, दशक, वेला अवधि आदि )
उत्तर: 
अभी, प्रात: सांय, दोपहर, रात, कल, आज, परसो, साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक, त्रैमासिक, छमाही वार्षिक आदि।

(ख) श्रीकृष्ण के अनुसार वे कितने घंटे गाय चराते थे?
उत्तर: 
दस से बारह घंटे ।

(ग) मान लीजिए वे शाम को छह बजे गाय चराकर लौटे। वे सुबह कितने बजे गाय चराने के लिए घर से निकले होंगे?
उत्तर: 
पाँच-छह बजे के बीच में।

(घ) 'दोपहर' का अर्थ है 'दो पहर' का समय। जब दूसरे पहर की समाप्ति होती है और तीसरे पहर का प्रारंभ होता है। यह लगभग 12 बजे का समय होता है, जब सूर्य सिर पर आ जाता है। बताइए दिन के पहले पहर का प्रारंभ लगभग कितने बजे होगा?
उत्तर: 
सुबह के छह बजे से नौ बजे तक पहला पहर होता है।

हम सब विशेष हैं

(क) महाकवि सूरदास दृष्टिबाधित थे। उनकी विशेष क्षमता थी उनकी कल्पना शक्ति और कविता रचने की कुशलता ।
हम सभी में कुछ न कुछ ऐसा होता है जो हमें सबसे विशेष और सबसे भिन्न बनाता है।
नीचे दिए गए व्यक्तियों की विशेष क्षमताएँ क्या हैं, विचार कीजिए और लिखिए-
आपकी.................................................
आपके .........................................
आपके शिक्षक की ............................
आपके मित्र की ..........................
उत्तर: 
आपकी- मुझे कहानियाँ और पुस्तकें पढ़ने-लिखने का शौक है।
आपके किसी परिजन की- मेरे दादा जी एक कुशल व्यापारी हैं। वे अपने बल, बुद्धि और मेहनत के बूते एक सफल व्यापारी हैं। मेरे पापा और मेरे चाचा जी भी अब उनके साथ व्यापार में उनका सहयोग करते हैं। व्यापार में दादा जी से सीखकर अब वे दोनों भी कुशल व्यापारी बन गए हैं।
आपके शिक्षक की- हमारे शिक्षक हमारे आदर्श हैं। वे हमारी पूरी कक्षा के आदर्श हैं। वे हम छात्रों को बहुत प्रेम से पढ़ाते हैं। अपने विषय पर उनका पूरा अधिकार है। वे हमें सरल और रोचक ढंग से पढ़ाते हैं। वे सभी छात्रों पर एक समान ध्यान देते हैं । यहाँ तक कि यदि हममें से किसी छात्र को कोई समस्या हो तो उस पर भी उनकी नज़र रहती है।
आपके मित्र की- वैसे तो मेरे सारे सहपाठी मेरे मित्र हैं किंतु हम चार विद्यार्थियों का समूह अपनी मित्रता के लिए प्रसिद्ध हैं। हम चारों के परिवारिक संबंध भी बहुत अच्छे हैं। हम चारों हर समय एक-दूसरे की सहायता करने के लिए तत्पर रहते हैं।

(ख) एक विशेष क्षमता ऐसी भी है जो हम सबके पास होती है। वह क्षमता है सबकी सहायता करना, सबके भले के लिए सोचना । तो बताइए, इस क्षमता का उपयोग करके आप इनकी सहायता कैसे करेंगे-

  • एक सहपाठी पढ़ना जानता है और उसे एक पाठ समझ में नहीं आ रहा है।
  • एक सहपाठी को पढ़ना अच्छा लगता है और वह देख नहीं सकता।
  • एक सहपाठी बहुत जल्दी-जल्दी बोलता है और उसे कक्षा में भाषण देना है।
  • एक सहपाठी बहुत अटक अटक कर बोलता है और उसे कक्षा में भाषण देना है।
  • एक सहपाठी को चलने में कठिनाई है और वह सबके साथ दौड़ना चाहता है।
  • एक सहपाठी प्रतिदिन विद्यालय आता है और उसे सुनने में कठिनाई है।

उत्तर:

  • मेरा एक सहपाठी पढ़ना जानता है और उसे एक पाठ समझ में नहीं आ रहा। मेरे परिवार से मुझे एक-दूसरे की सहायता करने के संस्कार मिले हैं। इसलिए उस पाठ को पहले मैं दो बार पढूँगा ताकि अपने उस सहपाठी को भली-भाँति समझा सकूँ। इसके पश्चात मैं अपने उस सहपाठी को पाठ समझाऊँगा।
  • एक सहपाठी को पढ़ना अच्छा लगता है और वह देख नहीं सकता। अपने उस सहपाठी की पढ़ने में मदद करूँगा। उसे पढ़कर पाठ सुनाऊँगा और उसके लिए ब्रेल लिपि की पुस्तक लाऊँगा ।
  • एक सहपाठी बहुत जल्दी-जल्दी बोलता है और उसे कक्षा में भाषण देना है। इसके लिए हमें भरसक प्रयत्न करना है। उसे हम धीरे-धीरे बोलने का अभ्यास करवाकर कक्षा के भाषण को बोलने का भी अभ्यास करवाएँगे। बार-बार का अभ्यास उसे सफल बनाएगा और उसमें आत्मविश्वास की भावना बढ़ेगी और वह जीवन में सफलता की ओर अग्रसर होगा।
  • एक सहपाठी अटक-अटक कर बोलता है और उसे भाषण देना है। कहावत प्रसिद्ध है- 'करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।' उसे एक ही वाक्य बार-बार बोलने का अत्यधिक अभ्यास करवाया जाएगा ताकि उसकी यह कमी दूर हो जाए और वह भाषण देने में सफल हो जाए ।
  • एक अन्य सहपाठी को चलने में कठिनाई है और वह सबके साथ दौड़ना चाहता है। ऐसे सहपाठी को दौड़ने में कठिनाई तो बहुत होगी, किंतु बार-बार के अभ्यास से उसमें कुछ-न- कुछ सुधार अवश्य होगा।
  • एक सहपाठी प्रतिदिन विद्यालय आता है और उसे सुनने में कठिनाई है। हम उसे सुनने का उपकरण खरीदकर देकर उसकी सहायता कर सकते हैं।

आज की पहेली

दूध से मक्खन ही नहीं बल्कि और भी बहुत कुछ बनाया जाता है। नीचे दूध से बनने वाली कुछ वस्तुओं के चित्र दिए गए हैं। दी गई शब्द पहेली में उनके नाम के पहले अक्षर दे दिए गए हैं। नाम पूरे कीजिए-

आज की पहेलीउत्तर:
आज की पहेली

खोजबीन के लिए

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उत्तर: संकेत:

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  • साहित्यलहरी
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FAQs on NCERT Solutions: मैया मैं नहिं माखन खायो

1. Who is maidservant (maidservant) in "Maiya Main Nahi Makhan Khayo" and what does she accuse Krishna of?
Ans. The maidservant is Yashoda's servant who accuses Krishna of stealing butter and eating it secretly. She complains to Krishna's mother about his mischievous behaviour, claiming he sneaks into the kitchen at night to consume makhan (butter). This accusation forms the central conflict of the poem, highlighting Krishna's playful nature and his love for butter, which becomes the basis for the entire narrative in this NCERT Hindi Class 6 chapter.
2. What does Krishna's response reveal about his character in this poem?
Ans. Krishna's denial and innocent excuse reveal his clever, mischievous, and charming personality. He deflects the accusation by claiming he cannot reach the butter due to his small size, displaying wit and quick thinking. His response showcases the childlike innocence mixed with cunning typical of young Krishna, making him both endearing and mischievous-a key characterization explored throughout this Class 6 Hindi poem.
3. Why does the poet describe butter as so important in Krishna's life?
Ans. Butter (makhan) symbolises Krishna's divine love for earthly pleasures and his playful nature as a child. The poet emphasises makhan to highlight Krishna's innocence, mischief, and the tender relationship between mother and son. This imagery connects to traditional Krishna legends where his butter-stealing antics demonstrate his humanity despite being divine, making the poem relatable for Class 6 students studying NCERT Hindi literature.
4. How does Yashoda's perspective differ from the maidservant's accusation?
Ans. Yashoda, as Krishna's mother, likely views his mischief with affection and protective love rather than anger. While the maidservant sees only wrongdoing, Yashoda understands her child's playful nature and innocence. This contrast between a servant's formal complaint and a mother's emotional bond illustrates the theme of unconditional maternal love central to the poem's meaning in your Hindi Class 6 curriculum.
5. What literary devices does the poet use to make the butter-stealing incident memorable?
Ans. The poet employs vivid imagery, dialogue, and repetition to create memorable scenes of Krishna's mischief. Direct speech between the maidservant and Yashoda engages readers emotionally, while descriptive language about butter and the kitchen brings the narrative alive. These poetic techniques make the NCERT solutions for this chapter easier to understand, helping Class 6 students grasp both language skills and literary appreciation simultaneously.
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