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NCERT Solutions: गीता सुगीता कर्तव्य

पृष्ठम् 57: प्रश्नानि

1. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरम्:ं लिखत-
(क) श्रद्धावान् जनः किं लभते? 
उत्तरम्: ज्ञानम् 

(ख) कस्मात् सम्मोहः जायते? 
उत्तरम्: क्रोधात् 

(ग) सम्मोहात् किं जायते? 
उत्तरम्: स्मृतिविभ्रमः 

(घ) अर्जुनाय गीतां कः उपदिष्टवान्? 
उत्तरम्: श्रीकृष्णः 

(ङ) हर्षामर्षभयोद्वेगैः मुक्तः नरः कस्य प्रियः भवति? 
उत्तरम्: भगवतः 

2. पूर्णवाक्येन उत्तरम्:ं लिखत -
(क) कीदृशं वाक्यं वाङ्मयं तपः उच्यते ?
उत्तरम्: अनुद्वेगकरं, सत्यं, प्रियहितं च वाक्यं वाङ्मयं तपः उच्यते।

(ख) कीदृशः जनः स्थितधीः उच्यते ?

उत्तरम्: यः दुःखेषु अनुद्विग्नमनाः, सुखेषु विगतस्पृहः, वीतरागभयक्रोधः च भवति, सः स्थितधीः उच्यते।

(ग) जनः कथं प्रणश्यति ?

उत्तरम्: क्रोधात् सम्मोहः, सम्मोहात् स्मृतिविभ्रमः, स्मृतिभ्रंशात् बुद्धिनाशः, बुद्धिनाशात् प्रणश्यति।

(घ) जनः कथम् उत्तमां शान्तिं प्राप्नोति ?
उत्तरम्: श्रद्धावान्, तत्परः, संयतेन्द्रियः जनः ज्ञानं लभते, ततः सः उत्तमां शान्तिं प्राप्नोति।

(ङ) उपदेशप्राप्तये त्रयः उपायाः के भवन्ति ?
उत्तरम्: प्रणिपातः, परिप्रश्नः, सेवया - एते त्रयः उपायाः भवन्ति।

पृष्ठम् 58-59: प्रश्नानि

3. कोष्ठके दत्तानि पदानि उपयुज्य वाक्यानि रचयत-

पृष्ठम् 58-59: प्रश्नानि

(क) अनुद्वेगकरं सत्यं प्रियहितं च वाक्यं _______ तपः उच्यते।
(ख) सततं सन्तुष्टः दृढनिश्चयः च _______ भवति।
(ग) अनुद्विग्नमनाः मुनिः _______ उच्यते।
(घ) तद् आत्मज्ञानं प्रणिपातेन परिप्रश्नेन _______ च विद्धि।
(ङ) सम्मोहात् _______ भवति।

उत्तरम्:
(क) अनुद्वेगकरं सत्यं प्रियहितं च वाक्यं वाङ्मयं तपः उच्यते।
(ख) सततं सन्तुष्टः दृढनिश्चयः च योगी भवति।
(ग) अनुद्विग्नमनाः मुनिः स्थितधीः उच्यते।
(घ) तद् आत्मज्ञानं प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया च विद्धि।
(ङ) सम्मोहात् स्मृतिविभ्रमः भवति।

4. अधोलिखितानि पदानि उपयुज्य वाक्यानि रचयत
(क) उच्यते  ________________
(ख) च   ________________
(ग) न  ________________
(ङ) लब्ध्व   ________________
(ङ) कुर्यात्  ________________
उत्तरम्:
(क) उच्यते - सत्यं प्रियं हितं च वाक्यं वाङ्मयं तपः उच्यते।
(ख) च - अर्जुनः वीरः च ज्ञानी च आसीत्।
(ग) न - असत्यं न वदेत्।
(घ) लब्ध्व - ज्ञानं लब्ध्व मानवः शान्तिं प्राप्नोति।
(ङ) कुर्यात् - स्वधर्मे स्थितः पुरुषः कार्यं यत्नेन कुर्यात्।

5. पाठानुसारं समुचितेन पदेन श्लोकं पूरयत
(क) श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्परः ________________।
(ख) ________________ चैव वाङ्मयं तप उच्यते ।
(ग) सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा ________________ ।
(घ) ________________ भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः ।
(ङ) तद्विद्धि ________________ परिप्रश्नेन सेवया ।

उत्तरम्:
(क) श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः। (जो श्रद्धालु और इंद्रियों को वश में रखने वाला है, वह ज्ञान प्राप्त करता है।)
सन्दर्भ: श्लोक ४।
(ख) अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च चैव वाङ्मयं तप उच्यते। (जो वचन उद्वेगहीन, सत्य, प्रिय और हितकारी हो, वह वाचिक तप कहा जाता है।)
सन्दर्भ: श्लोक ८।
(ग) सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः। (जो सदा संतुष्ट, योगी, आत्मा को वश में रखने वाला और दृढ़ निश्चयी है।)
सन्दर्भ: श्लोक ६।
(घ) क्रोधात् भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः। (क्रोध से मोह होता है, मोह से स्मृति का भ्रम होता है।)
सन्दर्भ: श्लोक २।
(ङ) तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया। (इसे प्रणाम, प्रश्न और सेवा से जानो।)
सन्दर्भ: श्लोक ३।

6. उदाहरणानुसारं पदानि स्त्रीलिङ्गे परिवर्तयत
उदाहरणम्:
श्रद्धावान् = श्रद्धावती
बुद्धिमान् = बुद्धिमती
(क) गुणवान् = _______________
(ख) आयुष्मान् = _______________
(ग) क्षमावान् = _______________
(घ) ज्ञानवान् = _______________
(ङ) श्रीमान् = _______________

उत्तरम्:
(क) गुणवान् = गुणवती
(ख) आयुष्मान् = आयुष्मती
(ग) क्षमावान् = क्षमावती
(घ) ज्ञानवान् = ज्ञानवती
(ङ) श्रीमान् = श्रीमती

७. समुचितेन पदेन सह स्तम्भौ मेलयत
पृष्ठम् 58-59: प्रश्नानि
उत्तरम्:
पृष्ठम् 58-59: प्रश्नानि

8: श्रीमद्भगवद्गीतायाः विषये पञ्च वाक्यानि लिखत
(क) _______________________
(ख) _______________________
(ग) _______________________
(घ) _______________________
(ङ) _______________________

उत्तरम्:
(क) श्रीमद्भगवद्गीता भगवान् श्रीकृष्णस्य अर्जुनाय उपदेशः अस्ति।
(ख) गीतायां सप्तशतं श्लोकाः सन्ति।
(ग) अर्जुनस्य संशयं दूरं कर्तुं गीता लिखिता।
(घ) महाभारते भीष्मपर्वणि गीता वर्णिता।
(ङ) गीतायाः उपदेशाः जीवनं शोभयन्ति।

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FAQs on NCERT Solutions: गीता सुगीता कर्तव्य

1. गीता सुगीता का क्या महत्व है और यह किस प्रकार के पाठों को प्रस्तुत करती है ?
Ans. गीता सुगीता एक महत्वपूर्ण पाठ है जो जीवन के नैतिक और आध्यात्मिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करता है। इस ग्रंथ में हम अपने कर्तव्यों को समझते हैं और जीवन में सही निर्णय लेने के लिए प्रेरित होते हैं। यह पाठ हमें सिखाता है कि हमें अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए, बिना फल की चिंता किए।
2. गीता सुगीता में कर्तव्य और अधिकार के बीच का संबंध कैसे दर्शाया गया है ?
Ans. गीता सुगीता में कर्तव्य और अधिकार का संबंध इस प्रकार दर्शाया गया है कि हर व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। कर्तव्य का पालन करते समय हमें अपने अधिकारों की चिंता नहीं करनी चाहिए। यह दिखाता है कि जब हम अपने कर्तव्यों को निभाते हैं, तब ही हम अपने अधिकारों का सही उपयोग कर सकते हैं।
3. गीता सुगीता के पाठों को जीवन में कैसे लागू किया जा सकता है ?
Ans. गीता सुगीता के पाठों को जीवन में लागू करने के लिए हमें अपने कार्यों में ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण का पालन करना चाहिए। हमें अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहना चाहिए और हर स्थिति में सही निर्णय लेने का प्रयास करना चाहिए। इससे हम अपने जीवन को अधिक सार्थक बना सकते हैं।
4. गीता सुगीता में प्रस्तुत कर्तव्यों का पालन करने से क्या लाभ होते हैं ?
Ans. गीता सुगीता में प्रस्तुत कर्तव्यों का पालन करने से व्यक्ति में अनुशासन, आत्मविश्वास और संतोष बढ़ता है। यह व्यक्ति को मानसिक शांति प्रदान करता है और उसे अपने जीवन के लक्ष्य की ओर अग्रसर करता है। जब हम अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं, तो हम न केवल व्यक्तिगत विकास करते हैं, बल्कि समाज में भी सकारात्मक योगदान देते हैं।
5. गीता सुगीता के नैतिक पाठों का समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
Ans. गीता सुगीता के नैतिक पाठों का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ये पाठ लोगों को नैतिकता, ईमानदारी और सामूहिकता का महत्व समझाते हैं। जब समाज के लोग इन शिक्षाओं को अपनाते हैं, तो समाज में एकता, शांति और समृद्धि बढ़ती है। यह समाज को एक बेहतर स्थान बनाने में मदद करता है।
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