अभ्यास प्रश्न - साना - साना हाथ जोड़ि Class 10 Notes | EduRev

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Class 10 : अभ्यास प्रश्न - साना - साना हाथ जोड़ि Class 10 Notes | EduRev

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प्रश्न 1. ‘आप चैन की नींद सो सकें इसीलिए तो हम यहाँ पहरा दे रहे हैं?- एक फौजी के इस कथन पर जीवन-मूल्यों की दृष्टि से चर्चा कीजिए।
उत्तरः लेबिका का सफर जब आगे बढ़ा तो वहाँ उसे कुछ फौजी छावनियाँ दिखाई दी। यह बार्डर एरिया था जहाँ से थोड़ी दूर पर ही चीन की सीमा है। एक फौजी से मधु ने पूछा कि इतनी कड़कड़ाती सर्दी में आपको बहुत तकलीफ होती होगी तब उसने उदास भाव से जैसे हँसते हुए कहा - ”आप लोग चैन की नींद सो सकें इसीलिए तो हम सब यहाँ पहरा दे रहे हैं। उसके इस कथन से पता चलता है कि फौजी लोग कितने कष्ट में भी अपने कर्तव्य पालन के प्रति संचेत रहते हैं। वे देश के सच्चे जवान है और देश वासियाों की सुरक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों में भी निरतंर सजग रहते हैं।

प्रश्न 2. लोंग स्टाॅक में घूमते हुए लेखिका को क्या अनुभूति हुई ? इस प्रसंग में किन जीवन-मूल्यों का परिचय मिलता है?
उत्तरः 
जब लेखिका ने हिमालय की घाटियों में घूमना प्रारम्भ किया। एक जगह हिचकोले खाती लेखिका की जीप ‘लोंग स्टाॅक’ नामक जगह पहुँची। गाइड जितेन बताने लगा यहाँ गाइड’ नामक फिल्म की सूटिंग हुई थी। यहाँ एक पत्थर स्मारक के रूप में भी है। उन्हीं रास्तों पर लेखिका ने एक कुटिया के अन्दर घूमता चक्र देखा जो धर्म-चक्र बताया गया। इसको घुमाने से सारे पाप धुल जाते हैं। वहाँ के लोगों की आस्थाएँ, विश्वास, पाप-पुण्य की अवधारणाएँ एक जैसी। आगे बढ़ते हुए देखा कि स्वेटर बुनती नेपाली युवतियाँ और पीठ पर भारी-भरकम कार्टून ढोते हुए काम कर रही हैं।

प्रश्न 3. ऐसा कौन-सा दृश्य लेखिका ने देखा जिसने उनकी चेतना को झकझोर डाला ? ‘‘साना-साना हाथ जोड़ि’’ पाठ के आधार पर संक्षेप में लिखिए।
उत्तर- लेखिका जब प्रकृति के अलौकिक सौन्दर्य में डूबी हुई थी उसी समय उसका ध्यान पत्थर तोड़ती हुई पहाड़ी औरतों पर गया। जिनके शरीर तो गुँथे हुए आटे के समान कोमल थे किन्तु उनके हाथों में कुदाल और हथौड़े थे। उनमें से कुछ की पीठ पर बँधी एक बड़ी टोकरी में उनके बच्चे भी थे। इतने स्वर्गीय सौन्दर्य के बीच मातृत्व और श्रम साधना के साथ-साथ भूख, मौत, दैन्य और ज़िदा रहने की जंग जो पहाड़ों में रास्ता बनाने वाली ये श्रमिक औरतें झेल रही हैं। प्राकृतिक सौन्दर्य में इस दृश्य ने लेखिका की चेतना को झकझोर डाला।

प्रश्न 4. ‘कितना कम लेकर ये समाज को कितना अधिक वापस लौटा देती हैं।’ ‘साना-साना हाथ जोड़ि’ पाठ के इस कथन में निहित जीवन मूल्यों को स्पष्ट कीजिए और बताइए कि देश की प्रगति में नागरिक की क्या भूमिका है?
उत्तरः
लेखिका ने यह बात उन स्त्रियों को देखकर कही है जो पहाड़ों के भारी-भरकम पत्थरों को तोड़कर रास्ता बनाने का श्रमसाध्य कार्य करने में लगी रहती हैं। उन्हें बहुत कम पैसा मिलता है, पर वे देश-समाज को बहुत अधिक लौटा देती हैं। देश की आम जनता भी देश की प्रगति में भरपूर योगदान करती है और उसे उतना नहीं मिल पाता जितने की वह हकदार होती है। देश के श्रमिक एवं किसान देश की प्रगति के लिए कष्टसाध्य कार्यों में लगे रहते हैं। यदि वे कार्य न करें तो देश प्रगति की राह पर नहीं बढ़ सकता। उसके अलावा अन्य लोगों की भी बहुत बड़ी भूमिका है। देश की प्रगति में नागरिक की भी अहम भूमिका है कि वह देश की प्रगति के लिए कष्ट

साध्य कार्यों में अपना सहयोग देते हैं। यदि वे कार्य न करें तो देश प्रगति की राह पर नहीं बढ़ सकता। उनके अलावा अन्य लोगों की भी बहुत बड़ी भूमिका है।

प्रश्न 5. ‘साना-साना हाथ जोड़ि’ पाठ में प्रदूषण के कारण हिमपात में कमी पर चिंता व्यक्त की गई है। प्रदूषण के और कौन-कौन से दुष्परिणाम सामने आए हैं? हमें इसकी रोकथाम के लिए क्या करना चाहिए?
उत्तर- लेखिका लाचुंग नामक स्थान पर हिमपात का आनंद लेने की आशा से पहुँची थीं, किन्तु वहाँ बर्फ का कहीं पता न था। उन्हें एक सिक्किमी युवक ने बताया कि प्रदूषण बढ़ने से स्नोफाॅल (बर्फ गिरना) मे कमी आ गई है। बढ़ते प्रदूषण के फलस्वरूप अनेक संकट और दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। तापमान में वृद्धि होने से पर्वतों पर हिमपात कम होता जा रहा है और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, इससे नदियों में जल की मात्रा कम होती जा रही है। जल, वायु, भूमि सभी प्रदूषण के ज़हर से कुप्रभावित हो रहे हैं। न पीने को शुद्ध जल है, न साँस लेने को शुद्ध वायु। लोग अनेक बीमारियों से ग्रस्त और त्रस्त हो रहे है। कैंसर, टी.बी., मधुमेह, मानसिक तनाव और

रक्तचाप में वृद्धि आदि से पीड़ित लोगों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। वाहनों के बेतहाशा बढ़ते जाने से वायुमण्डल तो विषाक्त हो ही रहा है, लोग मानसिक गड़बड़ी नींद न आना और बहरेपन के शिकार भी हो रहे हैं। वृक्षों की कटाई को रोकना चाहिए। साथ ही अधिकाधिक वृक्षारोपण करना चाहिए तथा प्राकृतिक स्थलों पर गंदगी नहीं फैलानी चाहिए। जागरूकता पैदा कर लोगों को पर्वतीय स्थलों को स्वच्छ बनाए रखने के लिए प्रेरित करना चाहिए तथा नवयुवकों के द्वारा जनजागरण के कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए।

प्रश्न 6. ‘काश कश्मीर के साथ भी ऐसा सहज विलय हो जाता’ लेखिका मधु कांकरिया का इस बात को कहने के पीछे क्या उद्देश्य निहित है ? आपके मन में कश्मीर की स्थिति पर विचार करके क्या अनुभव होता है ?
उत्तर-
सिक्किम की राजधानी गंगटोक और उसके आगे हिमालय की यात्रा करते हुए मधु कांकरिया सोचती है कि ‘काश कश्मीर के साथ भी ऐसा सहज विलय हो जाता। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग तो है परन्तु वहाँ शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय सेना को तैनात किया गया है। कुछ अलगाववादी लोग कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाना चाहते हैं और इसके लिए वे आतंकवादियों को प्रश्रय देते हैं। सीमा पार से आतंकी गतिविधियाँ कश्मीर में चल रही हैं। पाकिस्तान उन आतंवादियों को नैतिक एवं आर्थिक समर्थन दे रहा है, हथियार दे रहा है और भारत के इस राज्य को अशांत किए हुए है। जब तक हम सीमा पार चल रहे आतंकी ट्रेनिंग शिविरों को नष्ट नहीं कर देते तब तक कश्मीर में शांति नहीं हो सकती।

लेखिका यह कहना चाहती है कि जिस तरह सिक्किम का भारत के विलय हुआ और जनता ने उसे जिस रूप में स्वीकार किया काश कश्मीर का भी इसी प्रकार का विलय भारत में हुआ होता तो यह अशांति देखने को नहीं मिलती।

प्रश्न 7. जितेन नोर्गे ने लेखिका को सिक्किम की प्रकृति तथा वहाँ की भौगोलिक स्थिति और जन जीवन के बारे में जो-जो महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं ? उन्हें अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- ”साना-साना हाथ जोड़ि“ पाठ में जितेन नोर्गे द्वारा लेखिका को सिक्किम की प्रकृति और भौगोलिक स्थिति एवं जन-जीवन के बारे में बताया गया कि-
(i) गंगटोक की यात्रा में पूरे रास्ते हिमालय की गहनतम घाटियाँ और फूलों से भरी वादियाँ मिलेंगी।
(ii) यह घाटी प्रियुता और रूडो ड्रेड्रों के फूलों से इस प्रकार भर जाती हैं मानों फूलों की सेज हो।
(iii) ”कटाओ“ को प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर होने के कारण हिन्दुस्तान का स्विट्जरलैंड बताया। वहाँ ताजी बर्फ मिलती है।
(iv) जितेन नोर्गे ने गंताम, यूमथांग, कवी लोंग स्टाॅक, लायुंग, कटाओ आदि स्थानों के भौगोलिक स्वरूप की जानकारी दी। गंगटोक का सही नाम गंतोक बताया जिसका अर्थ है - पहाड़। जब यह भारत में विलय हुआ तो आर्मी कप्तान शेखर दत्ता ने इसे टूरिस्ट स्पाॅट बनाने का सुझाव दिया।
जनजीवन - नोर्गे ने बताया कि यहाँ के लोग बहुत परिश्रमी हैं। यहाँ के बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ शाम को अपनी माँ के साथ मवेशी चराने, पानी भरने, लकड़ियों के गट्ठर ढोने का काम भी करते हैं। वहाँ के लोग बौद्ध धर्म में आस्था रखते हैं। जब कोई अप्रिय घटना या मृत्यु हो जाती है तो किसी धार्मिक स्थान पर 108 श्वेत पताकाएँ फहराते हैं तथा किसी शुभ कार्य के अवसर पर 108 रंगीन पताकाएँ फहराते हैं। जितेन ने यह भी बताया कि प्रेयर व्हील घुमाने से सारे पाप धुल जाते हैं।

प्रश्न 8. जितेन नार्गे की गाइड की भूमिका के बारे में विचार करते हुए लिखिए कि एक कुशल गाइड में क्या गुण होते हैं ?
अथवा
जितने नार्गे एक कुशल गाइड है-‘साना-सान हाथ जोड़ि’ पाठ के आधार पर बताइए।
उत्तरः जितेन नार्गे एक कुशल गाइड है। वैसे तो पर्यटक वाहनों में ड्राइवर अलग और गाइड अलग होते हैं लेकिन जितेन ड्राइवर-कम-गाइड है। अतः हम कह सकते हैं कि एक कुशल गाइड को वाहन चलाने में भी कुशल होना चाहिए ताकि आवश्यकता पड़े तो वह ड्राइवर की भूमिका भी निभा सके।
एक कुशल गाइड को अपने क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति तथा विभिन्न स्थानों के महत्व तथा उनसे जुड़ी रोचक जानकारियों का ज्ञान भी होना चाहिए, जैसे कि जितेन को पता है कि देवानंद अभिनीत ‘गाइड’ फिल्म (यह अपने समय की अति लोकप्रिय फिल्म थी) की शूटिंग लोंग स्टाॅक में हुई थी। इससे पर्यटकों का मनोरंजन भी होता है और उनकी स्थान में रुचि भी बढ़ जाती है। जितेन यद्यपि नेपाली है, लेकिन उसे सिक्किम के जन-जीवन, संस्कृति तथा धार्मिक मान्यताओं का पूरा ज्ञान है। वहाँ की कठोर जीवन-स्थितियों से भी वह भली-भाँति परिचित है। यह किसी कुशल गाइड का आवश्यक गुण है।

जितेन का सबसे अच्छा गुण है-मानवीय संवेदनाओं की समझ तथा परकृति संवाद शैली। वह सिक्किम की सुन्दरता का गुणगान ही नहीं करता, वहाँ के लोगों के दुःख-दर्द के बारे में लेखिका से बातचीत करता है। उसकी भाषा बड़ी परिष्कृत और संवाद का ढंग अपनत्व से पूर्ण है, जो किसी गाइड का आवश्यक गुण है।

प्रश्न 9. साना-साना हाथ जोड़ि में कहा गया है कि कटाओ पर किसी दुकान का न होना वरदान है, ऐसा क्यों ? भारत के अन्य प्राकृतिक स्थानों को वरदान बनाने में नवयुवकों की क्या भूमिका हो सकती है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तरः अपनी प्राकृतिक सुन्दरता के कारण कटाओ को भारत का स्विट्जरलैण्ड कहा जाता है या यों भी कह सकते हैं कि यह उससे भी कहीं अधिक सुन्दर है। इसकी यह सुन्दरता इसलिए भी विद्यमान है क्योंकि यहाँ एक भी दुकान नहीं है। क्योंकि दुकानें प्रदूषण फैलाने का एक जरिया बन जाती हैं। लोग सामान खरीदते और कचरे को वहीं पड़ा छोड़ देते जिसके कारण इसकी सुन्दरता नष्ट हो जाती।

भारत के अन्य प्राकृतिक स्थानों को भी इसी के समान सुन्दर बनाने के लिए नवयुवकों के द्वारा जनजागरण के कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए। जिसके माध्यम से प्राकृतिक स्थानों के महत्व को स्पष्ट किया जाना चाहिए। लोगों को यह समझाना चाहिए कि उन्हें प्राकृतिक सौन्दर्य को बर्बाद नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 10. देश के प्राकृतिक स्थानों के सौन्दर्य का आनंद लेते समय अधिकांश सैलानी वहाँ के पर्यावरण को दूषित कर देते हैं। इस नैसर्गिंक सौन्दर्य की सुरवाजें आप अपने दायित्व का निर्वाह कैसे करेंगे ? ‘साना-साना हाथ जोड़ि’ पाठ के आलोक में उत्तर दीजिए।
उत्तरः सैलानी जब प्राकृतिक स्थानों के सौन्दर्य का आनंद लेते हैं तब वहाँ के पर्यावरण को अनजाने में ही प्रदूषित कर देते हैं। वहाँ तमाम खाली डिब्बे, कूड़ा-कचरा, प्लास्टिक बैग फेंककर वातावरण को प्रदूषित कर देते हैं। हमें वहाँ जाकर ऐसा नहीं करना चाहिए और साथियों को भी ऐसा करने से रोकना चाहिए। जन जागरूकता फैलाकर हम इन स्थानों को प्रदूषण से बचा सकते हैं। यही नहीं अपितु स्थानीय पक्षियों, जानवरों पर प्रहार करना भी ठीक नहीं है। वहाँ की वनस्पतियों को उखड़ना भी उचित नहीं है।

प्रश्न 11. सैलानियों को प्रकृति की अलौकिक छटा का अनुभव करवाने में किन-किन लोगों का योगदान होता है ? उल्लेख कीजिए।
उत्तरः सैलानियों को प्रकृति की अलौकिक छटा का अनुभव करवाने में निम्न लोगों का योगदान रहता है-
(1) वे सरकारी लोग जो व्यवस्था में संलग्न होते हैं।
(2) सर्वप्रथम सैलानियों को कुशल गाइड की आवश्यकता होती है।
(3) पर्यटन स्थल के स्थानीय निवासियों का योगदान रहता है।
(4) उस स्थान के झरने, पेड़, फूल एवं वन्य जीवों का भी योगदान रहता है।
(5) वे सहयोगी यात्री जो यात्रा में मस्ती भरा महौल बनाए रखते हैं और कभी निराश नहीं होते हैं। उत्साह से भरपूर होते हैं।

प्रश्न 12. प्रकृति के साथ हो रहे खिलवाड़ को कैसे रोका जा सकता है ?
अथवा
आज की पीढ़ी द्वारा प्रकृति के साथ किस तरह का खिलवाड़ किया जा रहा है ? इसे रोकने के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं? जीवन मूल्यों की दृष्टि से लिखिए।

उत्तरः प्रकृति के साथ हो रहे खिलवाड़ को निम्नलिखित उपायों द्वारा कम कर सकते हैं-
(1) पहाड़ों पर लगे वृक्षों को न काटें और काटने वालों को भी रोकने से।
(2) पहाड़ों पर अधिक से अधिक पेड़ लगाएँ व दूसरों को भी लगाने के लिए प्रेरित करके।
(3) कम से कम वाहनों का प्रयोग करके जिससे प्रदूषण कम फैलेगा।
(4) नदियों आदि में गंदे नाले, अपशिष्ट पदार्थों को बहाना बन्द करके।
(5) पाॅलीथिन का प्रयोग कम से कम करके।

प्रश्न 13. प्राकृतिक सौन्दर्य के अलौकिक दृश्यों में डूबकर मनुष्य अपनी परेशानियाँ भूल जाता है। ‘साना-साना हाथ जोड़ि’ पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए।
उत्तरः
प्राकृतिक सौंदर्य के अलौकिक आनंद में डूबी लेखिका मौन भाव से शांत हो, किसी ऋषि की भाँति सारे परिदृश्य को अपने भीतर भर लेना चाहती थी। वह कभी आसमान छूते पर्वतों के शिखर देखती तो कभी ऊपर से दूध की धार की तरह झर-झर गिरते प्रपातों को, तो कभी नीचे चिकने-चिकने गुलाबी पत्थरों के बीच इठला-इठला कर बहती चाँदी की तरह कौंध मारती बनी-ठनी तिस्ता नदी को, नदी का सौंदर्य पराकाष्ठा पर था। इतनी खूबसूरत नदी लेखिका ने पहली बार देखी थी वह इसी कारण रोमांचित हो चिड़िया के पंखों की तरह हल्की थी। शिखरों के भी शिखर से गिरता फेन उगलता झरना ‘सेवन सिस्टर्स वाटर फाॅल’ मन को आल्हादित कर रहा था। लेखिका ने जैसे ही झरने की बहती जलधारा में पाँव डुबोया वह भीतर तक भीग गई और उसका मन काव्यमय हो उठा। जीवन की अनंतता का प्रतीक वह झरना जीवन की शक्ति का अहसास दिला रहा था। लेखिका ने कटाओ पहुँचकर बर्फ से ढँके पहाड़ देखे जिन पर साबुन के झाग की तरह सभी ओर बर्फ गिरी हुई थी। पहाड़ चाँदी की तरह चमक रहे थे।

प्रश्न 14. पर्वतीय स्थलों पर बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों का इन स्थलों व प्रकृति पर क्या प्रभाव पड़ रहा है ? इस प्रभाव को किस प्रकार रोका जा सकता है ?
अथवा
आप किसी पर्वतीय स्थल पर घूमने गए थे। व्यावसायिक गतिविधियों से प्रभावित जीवन मूल्यों वाले उसे क्षेत्र के दर्द को 
एक लेख के रूप में लिखिए।
उत्तरः पर्वतीय स्थलों पर बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों का इन स्थलों व प्रकृति पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। प्रदूषण बढ़ रहा है। प्रकृति में असंतुलन बढ़ा है। पर्वतीय स्थलों पर घूमने आने वाले पर्यटक वहाँ पर अपने साथ ले जाए गए सामान, कूड़ा-करकट, बचा हुआ भोज्य पदार्थ आदि वहीं पड़ा छोड़ आते हैं जिसके कारण उनका प्राकृतिक सौन्दर्य नष्ट तो होता ही है साथ ही साथ प्रदूषण भी बढ़ता है। इसलिए इन सबको रोकने हेतु जागरूकता अभियान चलाने चाहिए। विभिन्न प्रकार की गतिविधियों को नियंत्रित किया जाए। पहाड़ों को स्वच्छ बनाए रखने के लिए प्रेरित किया जाए। सरकार द्वारा कठोर कदम उठाए जाने चाहिए जिससे कि इनके प्राकृतिक सौंदर्य को बचाया जाए।

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