पाठ का सार - पाठ 16 - पतझर में टूटी पत्तियाँ, सपर्श II, हिंदी, कक्षा - 10 Class 10 Notes | EduRev

Hindi Class 10

Class 10 : पाठ का सार - पाठ 16 - पतझर में टूटी पत्तियाँ, सपर्श II, हिंदी, कक्षा - 10 Class 10 Notes | EduRev

The document पाठ का सार - पाठ 16 - पतझर में टूटी पत्तियाँ, सपर्श II, हिंदी, कक्षा - 10 Class 10 Notes | EduRev is a part of the Class 10 Course Hindi Class 10.
All you need of Class 10 at this link: Class 10

पाठ का सार

इस पाठ में दो प्रसंग सम्मिलित हैं।

1. गिन्नी का सोना -शुद्ध सोना अलग होता है और गिन्नी का सोना अलग होता है। गिन्नी के सोने में थोड़ा-सा ताँबा मिलाया जाता है, इसलिए यह अलग से चमकता है। यही कारण है कि यह श्यादा चमकता है और शुद्ध सोने से मज़बूत होता है। औरतें इसी सोने के गहने बनवाती हैं।

लेखक सोने के माध्यम से आदर्शों की बात करता है। शुद्ध आदर्श भी शुद्ध सोने के समान होते हैं। कुछ लोग उसमें व्यावहारिकता का थोड़ा-सा-ताबाँ मिलाकर उसे चलाते हैं। इन लोगों को हम ‘प्रै्रक्टिकल आइडियालिस्ट’ कहते हैं। वास्तविकता में बखान आदर्शों का नहीं होता, बल्कि व्यावहारिकता का होता है। कुछ समय पश्चात आदर्श पीछे हटने लगते हैं तथा व्यावहारिक सूझ-बूझ आगे आने लगती है। कुछ लोग कहते हैं कि गांधीजी प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट थे। वे व्यावहारिकता को पहचानते थे। इसीलिए वे अपने विलक्षण आदर्श चला सके। गांधी जी कभी भी आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर उतरने नहीं देते थे। बल्कि व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर पर चढ़ाते थे। वे सोने में ताँबा नहीं बल्कि ताँबा में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाते थे। इसीलिए सोना हमेशा आगे आता रहा। व्यवहारवादी लोग हमेशा सजग रहते हैं। लाभ-हानि का हिसाब लगाकर ही कदम उठाते हैं। वे जीवन में सफल होते हैं तथा अन्यों से आगे जाते हैं। पर क्या वे उपर चढ़ पाते हैं। खुद उपर चढ़ें और अपने साथ दूसरों को भी उफपर चढ़ा लें । यही महत्व की बात है। यह काम तो हमेशा आदर्शवादी लोगों ने ही किया है। समाज को आदर्शवादी लोगों ने ही शाश्वत मूल्य दिए हैं। व्यवहारवादी लोगों ने तो समाज को गिराया ही है।

2. झेन की देन - इस प्रसंग में जापान की दिनचर्या  एवं रहन-सहन का वर्णन करते हुए लेखक कहता है कि जापान में अस्सी फीसदी लोग मनोरोगी हैं। यहाँ जीवन की रफ्रतार बढ़ गई है। यहाँ व्यक्ति चलते नहीं हैं बल्कि दौड़ते हैं। यहाँ लोग बकते हैं तथा एकांत में बड़बड़ाते रहते हैं। यहाँ के लोग अमेरिका से टक्कर लेने की होड़ में एक महीने में पूरा होने वाला काम एक दिन में ही पूरा करने की कोशिश करते हैं। इससे तनाव बढ़ता है। यही कारण है कि यहाँ मानसिक रोगी बढ़ रहे हैं। लेखक के जापानी मित्र उन्हें एक शाम एक टी-सेरेमनी में ले गए। यह चाय पीने की एक विधि है। जापानी में इस विधि को चा-नो-यू कहते हैं।

वह एक छह मंजिली इमारत थी, जिसकी छत पर दफ्रती की दीवारों वाली और तातामी (चटाई) की ज़मीन वाली एक सुंदर पर्णकुटी थी। बाहर एक बेढब-सा मिट्टी का बरतन था। उसमें पानी भरा हुआ था। उस पानी में उन लोगों ने हाथ-पाँव धोए। तौलिये से पोंछकर अंदर गए। अंदर बैठे ‘चाजीन’ ने उन्हें झुककर प्रणाम किया और बैठने की जगह दिखाई। फिर उसने अँगीठी सुलगा कर उस पर चायदानी रखी। वह बगल के कमरे से कुछ बरतन ले आया। उसने तौलिये से बरतन साफ किए। उसने ये सब कार्य अत्यंत संज़ीदगी से किए। उस शांत वातावरण में चायदानी के पानी का उबाल भी सुनाई दे रहा था। चाय तैयार होने पर उसने उसे प्यालों में भरा। फिर उसने वे प्याले हम तीन मित्रों के सामने रख दिए। वहाँ की विशेषता यह है कि वहाँ तीन आदमियों से श्यादा को प्रवेश नहीं दिया जाता। प्यालों में दो घूँट से श्यादा चाय नहीं थी। वे लोग होंठों से प्याला लगाकर एक-एक बूँद चाय पीते रहे। करीब डेढ़ घंटे तक चुस्कियों का यह सिलसिला चलता रहा। इस गतिविधि से दिमाग की रफ्रतार धीमी पड़ने लगी। फिर थोड़े समय बाद पूरी तरह से बंद हो गई। लेखक को लगा कि वह अनंतकाल में जी रहा है। उसे सन्नाटा भी सुनाई देने लगा। अकसर हम या तो गुशरे हुए दिनों की खट्टी-मीठी यादों में उलझे रहते हैं या भविष्य के रंगीन सपने देखते रहते हैं। हम या तो भूतकाल में रहते हैं या भविष्यकाल में। असल में दोनों काल मिथ्या हैं। हमारे सामने जो वर्तमान क्षण है, वही सत्य है। हमें उसी में जीना चाहिए। चाय पीते-पीते लेखक, के मन से भूत और भविष्य, दोनों काल उड़ गए थे। उसके सामने केवल वर्तमान क्षण था और वह अनंतकाल जितना विस्तृत था। उस दिन लेखक को जीने का वास्तविक अर्थ मालूम हुआ। जापानियों को झेन परंपरा की यह एक बड़ी देन है।
 

Offer running on EduRev: Apply code STAYHOME200 to get INR 200 off on our premium plan EduRev Infinity!
43 videos|264 docs

Complete Syllabus of Class 10

Dynamic Test

Content Category

Related Searches

पाठ का सार - पाठ 16 - पतझर में टूटी पत्तियाँ

,

Sample Paper

,

Viva Questions

,

Free

,

हिंदी

,

Objective type Questions

,

pdf

,

Summary

,

सपर्श II

,

हिंदी

,

Semester Notes

,

MCQs

,

कक्षा - 10 Class 10 Notes | EduRev

,

सपर्श II

,

सपर्श II

,

study material

,

कक्षा - 10 Class 10 Notes | EduRev

,

ppt

,

practice quizzes

,

mock tests for examination

,

हिंदी

,

Previous Year Questions with Solutions

,

Extra Questions

,

video lectures

,

पाठ का सार - पाठ 16 - पतझर में टूटी पत्तियाँ

,

पाठ का सार - पाठ 16 - पतझर में टूटी पत्तियाँ

,

कक्षा - 10 Class 10 Notes | EduRev

,

Important questions

,

past year papers

,

shortcuts and tricks

,

Exam

;