Board Paper Of Class 10 2019 Hindi (B) Delhi(SET 2) - Solutions Class 10 Notes | EduRev

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Class 10 : Board Paper Of Class 10 2019 Hindi (B) Delhi(SET 2) - Solutions Class 10 Notes | EduRev

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प्रश्न 1: निम्निलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए - सफलता चाहने वाले मनुष्य का प्रथम कर्तव्य यह देखना है कि उसकी रूचि किन कार्यों की ओर अधिक है। यह बात गलत है कि हर कोई मनुष्य हर एक काम कर सकता है। लार्ड वेस्टरफील्ड स्वाभाविक प्रवृत्तियों के काम को अनावश्यक समझते थे और केवल परिश्रम को ही सफलता का आधार मानते थे। इसी सिद्धांत के अनुसार उन्होंने अपने बेटे स्टेनहाप को, जो सुस्त, ढीलाढाला, असावधान था, सत्पुरुष बनाने का प्रयास किया। वर्षों परिश्रम करने के बाद भी लड़का ज्यों का त्यों रहा और जीवन भर योग्य न बन सका। स्वाभाविक प्रवृत्तियों को जानना कठिन भी नहीं है, बचपन के कामों को देखकर बताया जा सकता है कि बच्चा किस प्रकार का मनुष्य होगा। प्रायः यह संभावना प्रबल होती है कि छोटी आयु में कविता करने वाला कवि, सेना बनाकर चलने वाला सेनापति, भुट्टे चुराने वाला चोर-डाकू, पुरजे कसने वाला मैकेनिक और विज्ञान में रूचि रखने वाला वैज्ञानिक बनेगा। 
जब यह विदित हो जाए कि लड़के कि रूचि किस काम की ओर है तब यह करना चाहिए कि उसे उसी विषय में ऊँची शिक्षा दिलाई जाए। ऊँची शिक्षा प्राप्त करके मनुष्य अपने काम-धंधे में कम परिश्रम से अधिक सफल हो सकता है, जिनके काम-धंधे का पूर्ण प्रतिबिम्ब बचपन में नहीं दिखता, वे अपवाद ही हैं। प्रत्येक मनुष्य में एक विशेष कार्य को अच्छी प्रकार करने की शक्ति होती है। वह बड़ी दृढ़ और उत्कृष्ट होती है। वह देर तक नहीं छिपती उसी के अनुकूल व्यवसाय चुनने से ही सफलता मिलती है। जीवन में यदि आपने सही कार्यक्षेत्र चुन लिया तो समझ लीजिए कि बहुत बड़ा काम कर लिया।
(क) लार्ड वेस्टरफील्ड का क्या सिद्धांत था ?
(ख) इसे उसने सर्वप्रथम किस पर आजमाया ? और क्या परिणाम रहा ?
(ग) बालक आगे चलकर कैसा मनुष्य बनेगा, इसका अनुमान कैसे लगाया जा सकता है ?
(घ) सही कार्यक्षेत्र चुनने के क्या लाभ हैं ?
(ङ) उपर्युक्त गद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक दीजिए।

उत्तर: (क) लार्ड वेस्टरफील्ड स्वाभाविक प्रवृतियों को अनावश्यक मानते थे और केवल परिश्रम को ही सफलता का आधार मानते थे। यहीं उनका सिद्धांत था।
(ख) इस सिद्धांत को सर्वप्रथम उन्होंने अपने पुत्र पर आजमाया। वर्षों परिश्रम करने के बाद भी वे अपने सुस्त पुत्र को योग्य न बना सके।
(ग) बचपन के कार्यों को देखकर इसका अनुमान लगाया जा सकता है कि बच्चा आगे चलकर कैसा मनुष्य बनेगा।
(घ) अपनी रूचि के अनुकूल सही कार्यक्षेत्र चुनने से जीवन में सफलता मिलती है।
(ङ) बचपनः भविष्य का प्रतिबिम्ब

प्रश्न 2: निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए - 
कार्य-थल को वे कभी नहीं पूछते - 'वह है कहाँ', 
कर दिखाते हैं असंभव को वही संभव यहाँ। 
उलझने आकर उन्हें पडती हैं जितनी ही जहाँ, 
वे दिखाते हैं नया उत्साह उतना ही वहाँ। 
जो रुकावट डालकर होवे कोई पर्वत खड़ा, 
तो उसे देते हैं अपनी युक्तियों से वे उड़ा। 
वन खंगालेंगे, करेंगे व्योम में बाजीगरी, 
कुछ अजब धुन काम के करने की उनमें है भरी। 
सब तरह से आज जितने देश हैं फूले-फले, 
बुद्धि, विद्या, धन, वैभव के हैं जहाँ डेरे डले। 
वे बनाने से उन्हीं के बन गए इतने भले, 
वे सभी हैं हाथ से ऐसे सपूतों के पले। 
लोग जब ऐसे समय पाकर जनम लेंगे कभी 
देश की और जाति की होगी भलाई भी तभी। 
(क) कर्मवीरों की दो विशेषताएँ बताइए। 
(ख) कैसे कह सकते हैं कि कर्मवीर मनुष्य में काम करने की अजब धुन होती है? 
(ग) किसी देश के नागरिक कर्मवीर हों तो देश को क्या लाभ होता है ?
अथवा
हम जब होंगे बड़े, घृणा का नाम मिटाकर लेंगे दम। 
हिंसा के विषमय प्रवाह में, कब तक और बहेगा देश! 
जब हम होंगे बड़े, देखना नहीं रहेगा यह परिवेश!
भ्रष्टाचार जमाखोरी की, आदत बहुत पुरानी है, 
ये कुरीतियाँ मिटा हमें तो, नई चेतना लानी है।
एक घरौंदा जैसा आखिर, कितना और ढहेगा देश, 
जब हम होंगे बड़े देखना, ऐसा नहीं रहेगा देश!
इसकी बागडोर हाथों में, ज़रा हमारे आने दो, 
थोड़ा-सा बस पाँव हमारा, जीवन में टिक जाने दो।
हम खाते हैं शपथ, दुर्दशा कोई नहीं सहेगा देश, 
घोर अभावों की ज्वाला में, कल से नहीं ढहेगा देश।
(क) कविता में बच्चा अपने बड़े होने पर क्या-क्या पिरवर्तन करने का इच्छुक है ? दो का उल्लेख दीजिए। 
(ख) हमारे समाज और परिवेश में क्या-क्या बुराइयाँ आ गई हैं ? उनके क्या दुष्परिणाम हो रहे हैं? 
(ग) कवि क्या शपथ खाता है और क्यों?
उत्तर: (क) कर्मवीरों की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं -
(i) कर्मवीर किसी भी कार्य को समझदारी से हल कर देते हैं।
(ii) कर्मवीर किसी भी कार्य को पूरी मेहनत से करते हैं।
(ख) कर्मवीर मनुष्य मुश्किल कार्य को करने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा देते हैं।
(ग) देश में यदि कर्मवीर नागरिक हो तो देश धन, विद्या, बुद्धि और वैभव के क्षेत्र में फलता-फूलता है।
अथवा 
(क) कविता में बच्चा बड़े होने पर देश में व्याप्त घृणा, हिंसा, भ्रष्टाचार जैसी कुरीतियों को समाप्त कर देश के परिवेश में बदलाव लाने का इच्छुक है।
(ख) हमारे समाज और परिवेश में भ्रष्टाचार और जमाखोरी जैसी बुड़ाइयाँ आ गई हैं। इन सभी के कारण हमारे देश की दुर्दशा हो रही है। देश का विकास नहीं हो पा रहा है। हमारा देश अभावग्रस्त हो चुका है।
(ग) कवि अपने देश की दुर्दशा को समाप्त कर देश को अभावमुक्त करने की शपथ खाता है ताकि देश की उन्नति हो सके।

प्रश्न 3: शब्द कब तक शब्द ही रहता है, पद नहीं कहलाता ? शब्द तथा पद के एक-एक उदाहरण दीजिए। 
अथवा 
व्याकरणिक नियमों के अनुसार शब्द व पद में क्या अंतर है?
उत्तर: जब तक शब्द का प्रयोग वाक्य में नहीं करते हैं तब तक शब्द शब्द ही रहता है, पद नहीं कहलाता है। उदाहरण - कमल – शब्द
यह कमल का पुष्प बहुत सुंदर है।
यहाँ 'कमल' वाक्य में प्रयुक्त होने के कारण पद है।
अथवा

शब्द

पद

वर्णों के सार्थक समूह को शब्द कहते हैं।

वाक्यों में प्रयुक्त होने वाले शब्दों को पद कहते हैं।

शब्द स्वतंत्र होते हैं।

पद स्वतंत्र नहीं होते हैं।

शब्द व्याकरणिक नियमों से मुक्त होते हैं।

पद व्याकरणिक नियमों से बंधे हुए होते हैं।


प्रश्न 4: नीचे लिखे वाक्यों में से किन्हीं तीन वाक्यों का रूपांतरण कीजिए - 
(क) वे हरदम किताबे खोलकर अध्ययन करते रहते थे। (संयुक्त वाक्य) 
(ख) मैं सफल हुआ और कक्षा में प्रथम स्थान पर आया (सरल वाक्य) 
(ग) एक बार बिल्ली ने उचककर दो में से एक अंडा तोड़ दिया। (मिश्र वाक्य) 
(घ) वह छह मंजिली इमारत की छत थी जिस पर एक पर्णकुटी बनी थी। (सरल वाक्य)
उत्तर: (क) वे हरदम किताबें खोलकर रखते थे और अध्ययन करते रहते थे।
(ख) मैं सफल होने के साथ-साथ कक्षा में प्रथम स्थान पर भी आया।
(ग) जैसे ही बिल्ली उचकी वैसे ही दो में से एक अंडा टूट गया।
(घ) छह मंजिली इमारत की छत पर एक पर्णकुटी बनी थी।

प्रश्न 5: (क) निम्नलिखित में से किन्हीं दो पदों का विग्रह करते हुए समास का नाम लिखिए - 
यथार्थ, शांतिप्रिय, भीमार्जुन 
(ख) निम्नलिखित में से किन्हीं दो को समस्त पद में परिवर्तित करके समास का नाम लिखिए - 
(i) विद्या रूपी धन 
(ii) चंद्र है शिखर पर जिसके अर्थात शिव 
(iii) युद्ध में वीर
उत्तर: (क) यथार्थ – सही अर्थ (अव्ययीभाव समास)
शांतिप्रिय – शांति को प्रिय मानने वाला (कर्मधारय समास)
भीमार्जुन – भीम और अर्जुन (द्वंद समास)
(ख) (i) विद्या रूपी धन – विद्याधन (कर्मधारय समास)
(ii) चंद्र है शिखर पर जिसके अर्थात शिव – चंद्रशेखर (बहुवृहि समास)
(iii) युद्ध में वीर – युद्धवीर (अधिकरण तत्पुरुष समास)

प्रश्न 6: निम्नलिखित में से किन्हीं चार वाक्यों को शुद्ध कीजिए -
(क) स्वाति, चित्रा और मधु आएगी।
(ख) गणतंत्र दिवस परेड को लाखों बालक, वृद्ध और नर-नारी देख रही थी।
(ग) प्रधानाचार्य आपको बुला रहे हैं। सर !
(घ) उत्तम चरित्र निर्माण हमारे लक्ष्य होने चाहिए।
(ङ) आपके बैल हमारे भटकते हुए खेत में आ पहुँचे।

उत्तर: (क) स्वाति, चित्रा और मधु आएँगे।
(ख) गणतंत्र दिवस की परेड को लाखों बालक, वृद्ध और नर-नारी देख रहे थे।
(ग) सर ! आपको प्रधानाचार्य बुला रहे हैं।
(घ) उत्तम चरित्र निर्माण हमारा लक्ष्य होना चाहिए।
(ङ) आपके बैल भटकते हुए हमारे खेत में आ पहुँचे।

प्रश्न 7: रिक्त स्थान की पूर्ति किन्हीं दो उपयुक्त मुहावरों के द्वारा कीजिए - 
(क) विशेषज्ञ विद्वान को समझाना ऐसा ही है जैसे …………………………………………...। 
(ख) गणित का गृहकार्य करना मुझे ………………………………………. प्रतीत होता है। 
(ग) मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों में हमेशा …………………………………… चाहिए।
उत्तर: (क) सूरज को दिया दिखाना
(ख) टेढ़ी खीर
(ग) कमर कस कर रहना

प्रश्न 8: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए - 
(क) बड़े भाई साहब को अपनी मन की इच्छाएँ क्यों दबानी पड़ती थीं ? 
(ख) बढ़ती हुई आबादी का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा है ? 'अब कहाँ दूसरों के दुख से दुखी होने वाले' पाठ के आधार पर लिखिए। 
(ग) 'गिन्नी का सोना' पाठ में शुद्ध आदर्श की तुलना शुद्ध सोने से क्यों की गई है ? 
अथवा 
जापान में चाय पीना एक 'सेरेमनी क्यों है ?
उत्तर: (क) बड़े भाई की उम्र छोटे भाई से पाँच वर्ष अधिक थी। वे होस्टल में छोटे भाई के अभिभावक के रूप में थे। वे अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखते थे। उन्हें भी खेलने पंतग उड़ाने तमाशे देखने का शौक था परन्तु अगर वे ठीक रास्ते पर न चलते तो भाई के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी कैसे निभाते। अपने नैतिक कर्त्तव्य का बोध करके वे अनुशासित रहते और अपनी इच्छाएँ दबा लेते।
(ख) पर्यावरण असंतुलित होने का सबसे बड़ा कारण आबादी का बढ़ना है जिससे आवासीय स्थलों को बढ़ाने के लिए वन, जंगल यहाँ तक कि समुद्रस्थलों को भी छोटा किया जा रहा है। पशुपक्षियों के लिए स्थान नहीं है। इन सब कारणों से प्राकृतिक का सतुंलन बिगड़ गया है और प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ती जा रही हैं। कहीं भूकंप, कहीं बाढ़, कहीं तूफान, कभी गर्मी, कभी तेज़ वर्षा इन के कारण कई बिमारियाँ हो रही हैं। इस तरह पर्यावरण के असंतुलन का जन जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है।
(ग) शुद्ध सोने में किसी प्रकार की मिलावट नहीं की जा सकती। ताँबा मिलाने से सोना मजबूत हो जाता है परन्तु शुद्धता समाप्त हो जाती है। इसी प्रकार व्यवहारिकता में शुद्ध आदर्श समाप्त हो जाते हैं। सही भाग में व्यवहारिकता को मिलाया जाता है तो ठीक रहता है।
अथवा 
जापान में चाय पीने की विधि चा-नो-यू को आनंदित होकर उपभोग करने के कारण इसे 'सेरेमनी' कहते हैं।

प्रश्न 9: 26 जनवरी, 1931 में कोलकाता में हुए घटनाक्रम की उन बातों का वर्णन कीजिए जिनके कारण लेखक ने डायरी में लिखा, "आज जो बात थी वह निराली थी।"
अथवा
चा-नो-यू की पूरी प्रक्रिया का वर्णन अपने शब्दों में करते हुए लिखिए कि उसे झेन परंपरा की अनोखी देन क्यों कहा गया है?

उत्तर: देश का स्वतंत्रता दिवस एक वर्ष पहले इसी दिन मनाया गया था। इससे पहले स्वतंत्रता आंदोलन में बंगाल वासियों की भूमिका नहीं थी। अब वे प्रत्यक्ष तौर पर जुड़ गए। कोलकाता के बड़ा बाज़ार में शाम को सभा होने वाली थी। इसलिए इस बात को निराला कहा गया है।
अथवा 
जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, वहाँ की सजावट पारम्परिक होती है। वहाँ अत्यन्त शांति और गरीमा के साथ चाय पिलाई जाती है। शांति उस स्थान की मुख्य विशेषता है। चाय पीलाने की इस परंपरा को चा-नो-यू कहते हैं।

प्रश्न 10: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
(क) मीराबाई ने श्री कृष्ण से अपनी पीड़ा हरने की प्रार्थना किस प्रकार की है ? अपने शब्दों में लिखिए।
(ख) पर्वतीय प्रदेश में वर्षा के सौंदर्य का वर्णन 'पर्वत प्रदेश में पावस' के आधार पर अपने शब्दों में कीजिए।
(ग) छाया भी कब छाया ढूँढ़ने लगती है? बिहारी के दोहे के आधार पर उत्तर दीजिए।
अथवा
'तोप' को कब-कब चमकाया जाता है? 'तोप' कविता के आधार पर लिखिए।

उत्तर: (क) मीरा ने हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती की है प्रभु जिस प्रकार आपने द्रोपदी का वस्त्र बढ़ाकर भरी सभा में उसकी लाज रखी, नरसिंह का रुप धारण करके हिरण्यकश्यप को मार कर प्रह्लाद को बचाया, मगरमच्छ ने जब हाथी को अपने मुँह में ले लिया तो उसे बचाया और पीड़ा भी हरी। हे प्रभु इसी तरह मुझे भी हर संकट से बचाकर पीड़ा मुक्त करो।
(ख) वर्षा ऋतु में मौसम बदलता रहता है। तेज़ वर्षा होती है। जल पहाड़ों के नीचे इकट्ठा होता है तो दर्पण जैसा लगता है। पर्वत मालाओं पर अनगिनत फूल खिल जाते हैं। ऐसा लगता है कि अनेकों नेत्र खोलकर पर्वत देख रहा है। पर्वतों पर बहते झरने मानो उनका गौरव गान गा रहे हैं। लंबे-लंबे वृक्ष आसमान को निहारते चिंतामग्न दिखाई दे रहे हैं। अचानक काले-काले बादल घिर आते हैं। ऐसा लगता है मानो बादल रुपी पंख लगाकर पर्वत उड़ना चाहते हैं। कोहरा धुएँ जैसा लगता है। इंद्र देवता बादलों के यान पर बैठकर नए-नए जादू दिखाना चाहते हैं।
(ग) जेठ मास की दोपहर में छाया भी किसी छाया की कामना करने लगती है। वह भी गर्मी की मार से बचना चाहती है।
अथवा 
तोप साल में दो बार 15 अगस्त और 26 जनवरी के अवसर पर चमकाई जाती है।

प्रश्न 11: 'कर चले हम फ़िदा…' कविता का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए। 
अथवा 
कविता की पृष्ठभूमि में 'तोप' की अतीत में भूमिका और उसकी वर्तमान स्थिति का वर्णन कीजिए। कवि को क्यों कहना पड़ा - 
"कितनी ही कड़ी हो तोप 
एक दिन तो होना ही है उसका मुँह बंद।"
उत्तर: अपने देश के सम्मान और रक्षा के लिए सैनिक हर चुनौतियों को स्वीकार करके अपने जीवन का बलिदान करने के लिए तैयार रहते हैं। अपनी अंतिम साँस तक देश के मान की रक्षा कर उसे शत्रुओं से बचाते हैं। कवि इसमें देशभक्ति को विकसित करके देश को जागरुक करना चाहता है।
अथवा 
अपने अतीत में तोप अत्यंत शक्तिशाली हुआ करती थी। बड़े-बड़े सूरमाओं को तोप ने धूल में मिला दिया था। परंतु आज वर्तमान समय में तोप का अहंकार समाप्त हो चुका है। आज तोप केवल पर्यटकों को दिखाने, बच्चों के खेलने और चिड़ियों के गप-शप करने का साधन मात्र रह गया है। अर्थात एक दिन अहंकार तथा ताकत का अंत अवश्य होता है। अतः अपनी शक्ति पर कभी अहंकार नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 12: कल्पना कीजिए कि एक पत्रकार के रूप में आप हरिहर काका के बारे में अपने समाचार पत्र को क्या-क्या बताना चाहेंगे और समाज को उसके उत्तरदायित्व का बोध कैसे करांगे ? 
अथवा 
टोपी और इफ़्फ़न अलग-अलग धर्म और जाति से संबंध रखते थे पर दोनों एक अटूट रिश्ते से बंधे थे। इस कथन के आलोक में 'टोपी शुक्ला' कहानी पर विचार कीजिए।
उत्तर: हरिहर काका के साथ उनके भाईयों और महंत द्वारा किया गया व्यवहार अनुचित था। यदि मैं स्वयं को एक पत्रकार के रूप में देखूँगा तो समाज के लोगों को महंत और काका के भाइयों के विषय में बताकर इस प्रकार का दुर्व्यवहार कहीं किसी और के साथ न हो इससे आगाह करने का प्रयत्न करुंगा। हरिहर काका के साथ महंत तथा उनके भाइयों ने जो दुर्व्यवहार किया वह अनुचित है। हमें अपने परिवार के बड़ों का उचित सम्मान करना चाहिए। इस घटना का उल्लेख पत्र-पत्रिकाओं तथा समाचार पत्र में छाप कर हम इस प्रकार की घटना की रोकथाम के लिए लोगों को सचेत कर सकते हैं। सरकार को इस घटना की रोकथाम के लिए कानून व्यवस्था में सुधार की आवश्यक्ता है।
अथवा 
टोपी हिन्दू जाति का था और इफ़्फ़न मुस्लिम। परन्तु जब भी टोपी इफ़्फ़न के घर जाता उसे अपनेपन का एहसास होता था। वहाँ उसे वह प्रेम मिलता था जो प्रेम उसे कभी अपने परिवार से नहीं मिला था। वह केवल इफ़्फ़न से बेझिझक मन की सभी बातें बोल पाता था। संसार में केवल इफ़्फ़न ही था जो उसके मनोभावों को समझता था। इसलिए उनका रिश्ता अटूट था।

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