प्रश्न 1: छोटे भाई ने अपनी पढ़ाई का टाइम-टेबिल बनाते समय क्या-क्या सोचा था और फिर उसका पालन क्यों नहीं कर पाया?
उत्तर: छोटे भाई ने अपनी पढ़ाई का टाइम-टेबल बनाते समय सोचा कि वह अब मन लगाकर पढ़ाई करेगा और बड़े भाई को कभी शिकायत का मौका नहीं देगा। रात गयारह बजे तक हर विषय को पढ़ने का कार्यक्रम बनाया गया परन्तु पढ़ाई करते समय खेल के मैदान उसकी हरियाली, हवा के हल्के-हल्के झोंके, फुटबॉल की उछल-कूद, कबड्डी, बालीबॉल की तेजी सब चीजें उसे अपनी ओर खींचती थीं। इसलिए वह टाइम-टेबिल का पालन नहीं कर पाया। साथ ही प्रिय शौक खेल को टाइम टेबिल में स्थान देना भी रुकावट था।
प्रश्न 2: एक दिन जब गुल्ली-डंडा खेलने के बाद छोटा भाई बड़े भाई साहब के सामने पहुँचा तो उनकी क्या प्रतिक्रिया हुई?
उत्तर: एक दिन जब गुल्ली-डंडा खेलने के बाद छोटे भाई बड़े भाई साहब के सामने पहुँचे तो उनकी प्रतिक्रिया बहुत भयानक थी। वह बहुत क्रोधित थे। उन्होंने छोटे भाई को बहुत डाँटा। उन्होंने उसे पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा। गुल्ली-डंडा खेल की उन्होंने बहुत बुराई की। उनके अनुसार यह खेल भविष्य के लिए लाभकारी नहीं है। अतः इसे खेलकर उन्हें कुछ हासिल नहीं होने वाला है। उन्होंने यह भी कहा कि अव्वल आने पर उसे घंमड हो गया है। उनके अनुसार घमंड तो रावण तक का भी नहीं रहा। अभिमान का एक-न-एक दिन अंत होता है। अतः छोटे भाई को चाहिए कि घमंड छोड़कर पढ़ाई की ओर ध्यान दे।
प्रश्न 3: बड़े भाई की डाँट-फटकार अगर न मिलती, तो क्या छोटा भाई कक्षा में अव्वल आता? अपने विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर: बड़े भाई की डाँट-फटकार अगर न मिलती तो हमारे विचार से छोटा भाई कक्षा में अव्वल नहीं आता, क्योंकि किसी कार्य की सफलता के लिए चाणक्य द्वारा बताई साम-दाम, दण्ड-भेद की नीति, प्रेरक शक्ति के रूप में प्रताड़ना प्रेरणा का कार्य करती है। जब बड़े भाई साहब की डाँट छोटे भाई को पड़ती थी, तब वह उनकी डाँट को गलत सिद्ध करने के लिए अध्ययन के प्रति सचेत हो जाता था। जिसका परिणाम यह होता था कि छोटा भाई कक्षा में अव्वल स्थान प्राप्त कर उत्तीर्ण हो जाता था। भाई की डाँट उसके अध्ययन की सफलता का सिद्धि मंत्र थी, जो उसे आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करती थी। अतः छोटे भाई को अगर बड़े भाई की डाँट-फटकार नहीं मिलती तो वह कक्षा में अव्वल नहीं आता।
प्रश्न 4: बडे़ भाई साहब अपने छोटे भाई पर रौब जमाने के लिए लंबे-लंबे भाषण देते हैं। उनकी आत्यधिक बोलने की आदत उनकी कमजोरी है अथवा खूबी? तर्क सम्मत उत्तर लिखिए।
उत्तर: बड़े भाई साहब की आत्यधिक बोलने की आदत एक समय पर खूबी और दूसरे समय पर कमजोरी हो सकती है, जो स्थिति और मकसद के अनुसार बदलती रहती है।
इसका तर्कसंगत उत्तर निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से स्पष्ट किया जा सकता है:
खूबी के रूप में:
कमजोरी के रूप में:
निष्कर्ष: बड़े भाई साहब की बोलने की आदत खूबी तब होती है जब उनके भाषण छोटे भाई के लिए उपयोगी और प्रेरणादायक होते हैं। लेकिन जब ये भाषण अत्यधिक और एकतरफा होते हैं, तो वे छोटे भाई को ऊबाते हैं और उसकी रुचि को नष्ट करते हैं, जिससे यह एक कमजोरी बन जाती है। अतः, बड़े भाई साहब को अपने भाषणों को संक्षिप्त और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
प्रश्न 5: बड़े भाई साहब ने स्वयं फेल हो जाने पर भी अपने छोटे भाई को डाँटकर भी उसका प्यार किस प्रकार जीता? अगर आपके बड़े भाई ऐसा करते तो आपकी क्या प्रतिक्रिया होती? लिखिए।
उत्तर: बड़े भाई साहब ने, यद्यपि स्वयं की पढ़ाई में असफलता का सामना किया, फिर भी छोटे भाई को डाँटने और सही राह दिखाने के माध्यम से उसका प्यार जीता। वे छोटे भाई को अपने अनुभवों से सीखने का मौका देते हैं और उसे सही दिशा में लाने का प्रयास करते हैं। बड़े भाई का यह रवैया इसलिए महत्वपूर्ण है कि वे छोटे भाई के भविष्य के प्रति जिम्मेदार महसूस करते हैं। उनकी डाँट और सख्ती के पीछे छिपा प्यार और चिंता ही वजह बनती है कि छोटा भाई उनकी बातों को गंभीरता से लेता है और अंततः उनके प्रति सम्मान और प्यार विकसित करता है।
अगर मेरे बड़े भाई ऐसा करते, तो मेरी प्रतिक्रिया इस पर निर्भर करती कि उनकी डाँट में कितना सच्चा प्यार और उद्देश्य था। यदि मुझे लगता कि वे मेरे भले के लिए कह रहे हैं, तो मैं उनकी बात को समझने और सुधार करने की कोशिश करता। लेकिन अगर उनकी डाँट में केवल आलोचना होती और उसमें कोई सकारात्मक संदेश नहीं होता, तो मैं थोड़ा निराश महसूस करता और शायद उनसे दूरी बनाने की कोशिश करता। फिर भी, मैं उनके साथ संवाद करने की कोशिश करता और अपनी भावनाओं को साफ़ करने का प्रयास करता, ताकि हम दोनों के बीच समझौता हो सके।
इस तरह, बड़े भाई की डाँट का प्रभाव उसके तरीके और उद्देश्य पर निर्भर करता है। अगर वह सच्चे दिल से छोटे भाई के भले के लिए कहता है, तो वह उसका प्यार और सम्मान जीत सकता है।
प्रश्न 6: छोटे भाई के मन में बड़े भाई साहब के प्रति श्रद्धा क्यों उत्पन्न हुई?
उत्तर: छोटे भाई को खेलना बहुत पसंद था। वह हर समय खेलता रहता था। बड़े भाई साहब इस बात पर उसे बहुत डांटते रहते थे। उनके डर के कारण वह थोड़ा बहुत पढ़ लेता था। परन्तु जब बहुत खेलने के बाद भी उसने अपनी कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया, तो उसे स्वयं पर अभिमान हो गया। अब उसके मन से बड़े भाई का डर भी जाता रहा। वह बेखौफ होकर खेलने लगा। एक दिन पतंग उड़ाते समय बड़े भाई साहब ने उसे पकड़ लिया। उन्होंने उसे समझाया और अगली कक्षा की पढ़ाई की कठिनाइयों का अहसास भी दिलाया। उन्होंने बताया कि वह कैसे उसके भविष्य के कारण अपने बचपन का गला घोंट रहे हैं। उनकी बातें सुनकर छोटे भाई की आँखें खुल गई। उसे समझ में आ गया कि उसके अव्वल आने के पीछे बड़े भाई की ही प्रेरणा रही है। इससे उसके मन में बड़े भाई के प्रति श्रद्धा उत्पन्न हो गई।
प्रश्न 7: बड़े भाई साहब छोटे भाई को क्या सलाह देते थे और क्यों?
उत्तर: बड़े भाई साहब छोटे भाई को पढ़ाई पर ध्यान देने और समय का सदुपयोग करने की सलाह देते थे। वे उसे बताते थे कि पढ़ाई में लगन और मेहनत के बिना सफलता नहीं मिल सकती, और समय को अकेले खेलने या बेकार गुजारने के लिए बर्बाद नहीं करना चाहिए। वे छोटे भाई को यह समझाने की कोशिश करते थे कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए नियमित रूप से कठिन परिश्रम करना आवश्यक है।
कारण:
इस प्रकार, बड़े भाई साहब की सलाह का मुख्य उद्देश्य छोटे भाई को जीवन में सफल बनाना और उसे सही मार्गदर्शन प्रदान करना था।
प्रश्न 8: ‘बड़े भाई साहब’ पाठ में लेखक ने समूची शिक्षा के किन तौर-तरीकों पर व्यंग्य किया है, क्या आप उनके विचार से सहमत हैं?
उत्तर: 'बड़े भाई साहब' पाठ में लेखक ने शिक्षा की परंपरागत और रटने-आधारित प्रणाली पर व्यंग्य किया है। उन्होंने इन तरीकों की आलोचना की है:
क्या मैं लेखक के विचार से सहमत हूँ?
हाँ, मैं लेखक के विचार से सहमत हूँ। शिक्षा का मुख्य उद्देश्य बच्चों को रटने की बजाय सोचने, समझने और व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना होना चाहिए। परीक्षा-केंद्रित शिक्षा बच्चों को दबाव में डालती है और उनकी रचनात्मकता और जिज्ञासा को दबा देती है। खेल और अन्य गतिविधियाँ बच्चों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, और इन्हें नज़रअंदाज करना गलत है।
इसलिए, शिक्षा को जीवन का एक अभिन्न अंग बनाने के लिए, यह आवश्यक है कि इसमें व्यावहारिक ज्ञान, सृजनात्मकता और बच्चों के समग्र विकास पर बल दिया जाए।
प्रश्न 9: आपके माता-पिता द्वारा दी जा रही हिदायतों और पढ़ाई के लिए डाँट-फटकार के प्रति आपकी क्या प्रतिक्रिया होती है? अपने अनुभव बड़े भाई साहब पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर: बड़े भाई साहब पाठ के आधार पर, मेरी प्रतिक्रिया अपने माता-पिता द्वारा दी जाने वाली हिदायतों और पढ़ाई के लिए डाँट-फटकार के प्रति मिश्रित हो सकती है। यह पाठ बताता है कि छोटे भाई को बड़े भाई की डाँट और उनके उपदेशों के प्रति अलग-अलग समय पर अलग-अलग भावनाएँ महसूस होती हैं। इसी तरह, मेरे अनुभव भी इन परिस्थितियों के आधार पर बदल सकते हैं।
1. प्रारंभिक प्रतिक्रिया: असंतोष और दबाव
जब माता-पिता या बड़े भाई-बहन हमें पढ़ाई के लिए डाँटते हैं, तो प्रारंभ में हमें यह बात अच्छी नहीं लगती। बड़े भाई साहब की तरह, मेरे माता-पिता की भी अपेक्षाएँ कभी-कभी बहुत ऊँची होती हैं, जिससे मुझे दबाव महसूस होता है। ऐसे में मैं भी कभी-कभी निराश हो जाता हूँ और सोचता हूँ कि "मुझे अपनी गलती का एहसास है, फिर भी मुझे इतनी डाँट क्यों सुननी पड़ती है?"
2. गहरी समझ: प्यार और चिंता का एहसास
लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, मुझे अपने माता-पिता की डाँट के पीछे छुपा प्यार और चिंता समझ में आने लगता है। बड़े भाई साहब भी अपने छोटे भाई को डाँटते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य केवल उसका भला करना है। इसी तरह, मेरे माता-पिता की हर डाँट में एक संदेश छिपा होता है कि वे मेरे भविष्य के लिए चिंतित हैं। जब मैं इसे समझता हूँ, तो मेरे मन में उनके प्रति आदर और प्यार की भावना बढ़ जाती है।
3. प्रेरणा और सुधार की भावना
बड़े भाई साहब की तरह, मेरे माता-पिता की डाँट भी कभी-कभी मुझे प्रेरित करती है। जब मैं उनकी बातों को गंभीरता से लेता हूँ, तो मैं अपने आप में सुधार लाने की कोशिश करता हूँ।
4. आत्म-विश्लेषण और विकास
अंततः, बड़े भाई साहब के पाठ से मुझे यह सीख मिलती है कि डाँट-फटकार को नकारात्मक तरीके से नहीं, बल्कि एक सीख के रूप में लेना चाहिए। जब मैं अपने माता-पिता की बातों को समझता हूँ और उनकी उम्मीदों को पूरा करने की कोशिश करता हूँ, तो मैं अपने आप में विकास का अनुभव करता हूँ। इससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ता है और मैं अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए तैयार हो जाता हूँ।
निष्कर्ष: मेरी प्रतिक्रिया अपने माता-पिता की हिदायतों और डाँट-फटकार के प्रति शुरुआत में असंतोषपूर्ण हो सकती है, लेकिन समय के साथ मैं उनके पीछे छुपे प्यार, चिंता और उद्देश्य को समझता हूँ। यह समझ मेरे अंदर सुधार और विकास की भावना जगाती है, जो मेरे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है।
प्रश्न 10: निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए:
(क) इम्तिहान पास कर लेना कोई चीज नहीं असल चीज है बुद्धि का विकास।
(ख) फिर भी जैसे मौत और विपत्ति के बीच भी आदमी मायामोह के बंधन में जकड़ा रहता है, मैं फटकार और घुड़कियाँ खाकर खेलकूद का तिरस्कार न कर सकता था।
(ग) बुनियाद ही पुख्ता न हो, तो मकान कैसे पायेदार बने ?
(घ) आँखें आसमान की ओर थीं और मन उस आकाशगामी पथिक की ओर, जो मंद गति से झूमता पतन की ओर चला आ रहा था, मानो कोई आत्मा स्वर्ग से निकलकर विरक्त मन से नए संस्कार ग्रहण करने जा रही हो।
उत्तर: (क) आशय स्पष्टीकरण: इस कथन का अर्थ है कि केवल परीक्षाओं में उत्तीर्ण होना या अंक प्राप्त करना जीवन का उद्देश्य नहीं होना चाहिए। वास्तविक उपलब्धि तब होती है जब व्यक्ति की बुद्धि, सोच और समझ में विकास होता है। इसके अंतर्गत ज्ञान का वास्तविक अर्थ, जीवन की समझ और समस्याओं को सुलझाने की क्षमता आती है। यह कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व और बौद्धिक क्षमता का विकास करना है।
(ख) आशय स्पष्टीकरण: इस कथन में यह कहा गया है कि चाहे जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ या खतरे क्यों न हों, व्यक्ति अपनी इच्छाओं और पसंदों से जुड़ा रहता है। यहाँ लेखक कहता है कि बड़े भाई की डाँट-फटकार के बावजूद भी वह खेलकूद को छोड़ नहीं सकता था। खेलने की उसकी इच्छा और रुचि इतनी मजबूत थी कि वह उसे तिरस्कार नहीं कर सकता था। यह उसके लिए माया का बंधन था, जिससे वह बाहर नहीं निकल पा रहा था।
(ग) आशय स्पष्टीकरण: इस कथन का अर्थ है कि यदि किसी कार्य या उपलब्धि की आधारशिला (बुनियाद) मजबूत नहीं है, तो उसका परिणाम भी स्थिर या सफल नहीं हो सकता। यहाँ "मकान" का उल्लेख जीवन की उपलब्धियों या सफलता के लिए किया गया है, जबकि "बुनियाद" उसकी शिक्षा, मेहनत और तैयारी को दर्शाता है। यह कहना है कि यदि शिक्षा या किसी कार्य की शुरुआत मजबूत नहीं है, तो अंतिम परिणाम भी सफल नहीं होगा।
(घ) आशय स्पष्टीकरण: इस कथन में लेखक ने एक गहरा और भावपूर्ण दृश्य चित्रित किया है। यहाँ "आँखें आसमान की ओर" देखने का अर्थ है कि व्यक्ति का ध्यान ऊँचे लक्ष्यों या आदर्शों की ओर है। वह "आकाशगामी पथिक" को देख रहा है, जो धीरे-धीरे गिरते हुए प्रतीत होता है। यह पथिक एक आत्मा की तरह है, जो स्वर्ग से नीचे आ रही है और नए संस्कारों को स्वीकार करने के लिए तैयार है। इसका अर्थ है कि व्यक्ति अपने ऊँचे सपनों और आदर्शों को छोड़कर वास्तविकता की ओर आ रहा है। यह एक ऐसी स्थिति है, जहाँ आदर्श और वास्तविकता के बीच संघर्ष का भाव छाया हुआ है।
16 videos|198 docs|41 tests
|
1. बड़े भाई साहब कहानी का मुख्य विषय क्या है? | ![]() |
2. इस कहानी में बड़े भाई का चरित्र कैसे चित्रित किया गया है? | ![]() |
3. छोटे भाई के चरित्र का विकास कैसे होता है? | ![]() |
4. "बड़े भाई साहब" कहानी से हमें क्या सीखने को मिलता है? | ![]() |
5. इस कहानी का सामाजिक संदर्भ क्या है? | ![]() |