Short Questions Answers(Part - 1) - उत्साह और अट नहीं रही Class 10 Notes | EduRev

Class 10 Hindi ( कृतिका और क्षितिज )

Class 10 : Short Questions Answers(Part - 1) - उत्साह और अट नहीं रही Class 10 Notes | EduRev

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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
निम्नांकित काव्याशों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

1. बादल, गरजो!
घेर घर घोर गगन, धाराधर ओ!
ललित ललित, काले घुँघराले,
बाल कल्पना के-से पाले,
विद्युत-छवि उर में, कवि, नवजीवन वाले!
वज्र छिपा, नूतन कविता
फिर भर दो-
बादल, गरजो।

प्रश्न (क)-प्रस्तुत गीत में किसे सम्बोधित किया गया है ?
उत्तर:
बादलों को।

प्रश्न (ख)-प्रस्तुत गीत में बादलों की तुलना बाल कल्पना से क्यों की गई है ?
उत्तर:
बच्चों की कल्पनाएँ मधुर होती हैं तथा बदलती रहती हैं। बादल भी बार-बार अपना रूप बदलते रहते हैं।

प्रश्न (ग)-बादलों के सौन्दर्य का वर्णन कीजिए। 
उत्तर: बादल सुन्दर, काले-घुँघराले बालों वाले हैं। वे अपने हृदय में बिजली छिपाए हुए तथा नया जीवन प्रदान करने वाले हैं।

2. बादल, गरजो!
विकल विकल, उन्मन थे उन्मन
विश्व के निदाघ के सकल जन,
आए अज्ञात दिशा से अनंत के घन!
तप्त धरा, जल से फिर
शीतल कर दो-
बादल, गरजो!

प्रश्न (क)-विश्व के सभी लोग विकल और उन्मन क्यों थे ?
उत्तर:
विश्व के सभी लोग ग्रीष्म ऋतु की गर्मी की अधिकता के कारण बहुत विकल और उन्मन थे।

प्रश्न (ख)-कवि ने यह क्यों कहा कि ‘आए अज्ञात दिशा से अनंत के घन’ ?
उत्तर: 
कवि ने यह इसलिए कहा कि गर्मी से तपती धरती को राहत प्रदान करने के लिए बादल अनजानी दिशा से आकर आकाश में छा गए थे।

प्रश्न (ग)-कवि ने बादलों का आह्नान किसलिए किया है ? 
उत्तर: कवि ने बादलों का आह्नान मानवता को और धरती को गर्मी के प्रभाव से बचाने के लिए किया है।

अथवा

प्रश्न (क)-‘तप्त धरा’ का संकेतार्थ स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर: तप्त धरा का अर्थ है दुःख से पीड़ित धरती।

प्रश्न (ख)-कवि बादल से क्या प्रार्थना करता है ?
उत्तर:
बादल गर्मी से तपती धरती पर खूब बरसें और उसे शीतल कर दें।

प्रश्न (ग)-कौन विकल और उन्मन थे और क्यों ? 
उत्तर: विश्व के सभी लोग व्याकुल और उन्मन थे। वे भीषण गर्मी की तपन के कारण दुःखी थे।

3. अट नहीं रही है आभा फागुन की तन
सट नहीं रही है। कहीं साँस लेते हो,
घर-घर भर देते हो, उड़ने को नभ में तुम
पर-पर कर देते हो, आँख हटाता हूँ तो
हट नहीं रही है। पत्तों से लदी डाल
कहीं हरी, कहीं लाल, कहीं पड़ी है उर में
मंद-गंध-पुष्प-माल, पाट-पाट शोभा-श्री
पट नहीं रही है।

प्रश्न (क)-कवि ने किस महीने की सुन्दरता का वर्णन किया है ? 
उत्तर: फागुन के।

प्रश्न (ख)-‘पाट-पाट शोभा-श्री पट नहीं रही है’ पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर: फागुन में प्राकृतिक  सौन्दर्य व मस्ती सँभाले नहीं सँभल रही है।

प्रश्न (ग)-साँस लेना किस स्थिति का परिचायक है ?
उत्तर:
सुगंधित हवाओं का चलना।

4. कहीं साँस लेते हो,
घर-घर भर देते हो,
उड़ने को नभ में तुम
पर-पर कर देते हो,
आँख हटाता हूँ तो
हट नहीं रही है।
पत्तों से लदी डाल
कहीं हरी, कहीं लाल,
कहीं पड़ी है उर में
मंद-गंध-पुष्प-माल
पाट-पाट शोभा-श्री
पट नहीं रही है।

प्रश्न (क)-”पाट-पाट शोभा-श्री पट नहीं रही है“ में निहित काव्यगत विशेषता बताइए।
उत्तर:
काव्यांश में अनुप्रास, अनुकरणनात्मकता तथा नाद-सौन्दर्य व्यंजित है।

प्रश्न (ख)-काव्यांश में किस ऋतु का वर्णन है तथा उसकी क्या-क्या विशेषताएँ कविता में अंकित हुई हैं?
उत्तर:
बसंत का; चारों ओर हरियाली, फूलों-पत्तों से डालियों का लद जाना। चारों ओर सुगंधित वातवरण, हरे-भरे खेत आदि का प्राकृतिक  सौन्दर्य।
व्याख्यात्मक हल:
काव्यांश में बसंत ऋतु का वर्णन है। इस ऋतु में चारों ओर हरियाली फैली हुई है। पेड़ों की डालियाँ फूल-पत्तों से लदी हुई हैं, जिससे चारों ओर का वातावरण सुगंधित हो रहा है।

प्रश्न (ग)-कवि की आँख हटाने पर भी क्यों नहीं हट रही है? उन्हें कौन-कौन-सी चीजें आकर्षित  कर रही हैं? 
उत्तर: प्रकृति की शोभा-श्री जिससे आनंदानुभूति हो रही है। हरे व लाल पत्तों से लदी डालें, फूलों से लदी डालियाँ, सुगंधित वातावरण।
व्याख्यात्मक हल:
प्रकृति की शोभा को देखकर कवि को अत्यधिक आनंद की अनुभूति हो रही है, जिसके कारण कवि की आँख उस प्राकृतिक शोभा से हटाने से भी नहीं हट रही है। उन्हें हरे व लाल पत्तों से लदी डालें, फूलों से लदी डालियाँ, सुगंधित वातावरण आकर्षित कर रहा है।
अथवा

प्रश्न (क)-‘कहीं साँस लेते हो’ का अर्थ स्पष्ट करते हुए बताइए कि श्वास लेने पर क्या होता है ?
उत्तर:
सुहावना वातावरण, हवाओं का चलना फागुन मास का साँस लेना है। श्वास लेने पर मन चारों ओर फैली सुगंध से भर जाता है।

प्रश्न (ख)-फागुन मास का पेड़-पौधों पर क्या प्रभाव पड़ता है ? 
उत्तर: चारों ओर प्रकृति का सौन्दर्य चरम पर होता है। वृक्ष हरे-भरे पत्तों से युक्त रंग-बिरंगे फूलों की सुगंध से ऐसा लगता है मानो स्वयं वृक्षों ने मंद-सुगंध वाले फूलों की माला गले में धारण की हो।

प्रश्न (ग)-‘उड़ने को नभ में तुम पर-पर कर देते हो’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
चारों ओर फैला सौन्दर्य नई-नई अनुभूतियाँ जगाकर प्रसन्नता का अनुभव करता है तथा कल्पना के पंख लगाकर उड़ने लगता है।

5. पत्तों से लदी डाल
कहीं हरी, कहीं लाल,
कहीं पड़ी है उर में

मंद-गंध-पुष्प-माल,
पाट-पाट-शोभा-श्री
पट नहीं रही है। 

प्रश्न (क)-बसंत ऋतु में वृक्षों और पौधों में क्या परिवर्तन हो जाता है ? 
उत्तर: बसंत ऋतु में वृक्षों और पौधों की डालियाँ पत्तों से भर जाती हैं। उन पर नए-नए पत्ते आते हैं। उनमें कहीं हरी और कहीं लाल कोपलें फूटी हैं।

प्रश्न (ख)-विविध रंग के पुष्प कैसे प्रतीत होते हैं ?
उत्तर:
प्रकृति में विविध रंग के खिले पुष्प ऐसे प्रतीत होते हैं मानो प्रकृति के हृदय पर फूलों की माला शोभायमान हो रही है।

प्रश्न (ग)-‘पाट-पाट शोभा-श्री, पट नहीं रही है’-कथन से कवि का क्या आशय है ?
उत्तर:
बसंत ऋतु में प्राकृतिक सौन्दर्य हर स्थान पर व्याप्त है और वह सौन्दर्य इतना अधिक है कि किसी भी सीमा में नहीं समा पाता।

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