Short Questions Answers(Part - 1) - संगतकार Class 10 Notes | EduRev

Class 10 Hindi ( कृतिका और क्षितिज )

Class 10 : Short Questions Answers(Part - 1) - संगतकार Class 10 Notes | EduRev

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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
निम्नांकित काव्यांशों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
1. निम्नलिखित काव्यांश के आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
वह अपनी गूँज मिलाता आया है प्राचीनकाल से
गायक जब अंतरे की जटिल तानों के जंगल में
खो चुका होता है
या अपनी ही सरगम को लाँघकर
चला जाता है भटकता हुआ एक अनहद में
तब संगतकार ही स्थायी को सँभाले रहता है

जैसे समेटता हो मुख्य गायक का पीछे छूटा हुआ सामान
जैसे उसे याद दिलाता हो उसका बचपन
जब वह नौसिखिया था

प्रश्न (क)- ‘वह अपनी गूँज मिलाता आया है प्राचीनकाल से’ का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
पुराने समय से ही संगतकार मुख्य गायक के स्वर में अपनी गूँज मिलाता रहा है।
प्रश्न (ख)- मुख्य गायक के अंतरे की जटिल-तान में खो जाने पर संगतकार क्या करता है
उत्तर: 
मुख्य गायक के अंतरा की जटिल तान जब खो जाती हो तब संगतकार ही अपने स्वर से उसे साधता (संचालता) है।

प्रश्न (ग)- संगतकार, मुख्य गायक को क्या याद दिलाता है?
उत्तर:
संगतकार मुख्य गायक को जैसे याद दिलाता है उसका बचपन जब वह नौसिखिया था।

2. निम्नलिखित काव्यांश के आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
तार सप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला
प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ
आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरता हुआ
तभी मुख्य गायक को ढाँढस बँधाता
कहीं से चला आता है संगतकार का स्वर
कभी-कभी वह यों ही दे देता है उसका साथ

प्रश्न (क)- ‘बैठने लगता है उसका गला’ का क्या आशय है? 

उत्तर: जब मुख्य गायक का गला कमजोर पड़ने लगता है।

प्रश्न (ख)- मुख्य गायक को ढाँढस कौन बँधाता है और क्यों?
उत्तर: 
मुख्य गायक को संगतकार का सुर ही ढाँढस बँधाता है।

प्रश्न (ग)- तार सप्तक क्या है? 

उत्तर: तार सप्तक संगीत में सात सुरों को कहते है।

3. मुख्य गायक के चट्टान जैसे भारी स्वर का साथ देती
वह आवाज सुंदर कमजोर काँपती हुई थी
वह मुख्य गायक का छोटा भाई है
या उसका शिष्य
या पैदल चलकर सीखने आने वाला दूर का कोई रिश्तेदार
मुख्य गायक की गरज में
वह अपनी गूँज मिलाता आया है प्राचीनकाल से
गायक जब अंतरे की जटिल तानों के जंगल में
खो चुका होता है
या अपने ही सरगम को लाँघकर
चला जाता है भटकता हुआ एक अनहद में
तब संगतकार ही स्थायी को सँभाले रहता है।

प्रश्न (क)- ‘मुख्य गायक की गरज में वह अपनी गूँज मिलाता आया है’: आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मुख्य गायक का स्वर चट्टान जैसा भारी था।

प्रश्न (ख)- संगतकार मुख्य गायक को उसका बचपन किस प्रकार याद दिलाता है ?
उत्तर:
संगतकार गायक को अपने सुर से भटकने नहीं देता और भटकाव की स्थिति होने पर मुख्य गायक को सही सुर पर लाकर उसे उसके बचपन की याद दिला देता है जब वह गीत गाते-गाते प्रायः सुर से भटक जाया करता था।

प्रश्न (ग)- ‘जटिल तानों के जंगल’ से कवि का क्या आशय है ? 

उत्तर: ‘जटिल तानों के जंगल’ से कवि का आशय है कि मुख्य गायक कभी-कभी किसी गीत के चरण को गाते हुए उसके अलापों और कठिन तानों में खो जाता है, सुर से भटक जाता है।

अथवा

प्रश्न (क)- ‘अनुप्रास अलंकार’ का उदाहरण छाँटकर लिखें।
उत्तर: 
‘कमज़ोर काँपती’ में अनुप्रास अलंकार। 

प्रश्न (खद्ध)- संगतकार और मुख्य गायक का क्या सम्बन्ध हो सकता है? 

उत्तर: वह उसका छोटा भाई, शिष्य हो सकता है। 

प्रश्न (ग)- संगतकार और मुख्य गायक की आवाज़ में क्या अन्तर है ? 

उत्तर: संगतकार की आवाज सुंदर कमज़ोर, काँपती हुई तथा स्वर से ऊँचा न उठाने वाली है जबकि मुख्य गायक की आवाज चट्टान जैसी भारी और दृढ़ तथा आत्मविश्वास से भरी हुई। 

अथवा

प्रश्न (क)- मुख्य गायक का साथ देने वाला कौन हो सकता है? 

उत्तर: मुख्य गायक का साथ देने वाला संगतकार उसका छोटा भाई है। शिष्य हो सकता है।

प्रश्न (ख)- किसी भी क्षेत्र में मुख्य व्यक्ति की भूमिका कब सार्थक होती है और क्यों?
उत्तर: 
जब गायक की आवाज़ संतोषी तानों के अतंर में खो जाता है तब संगतकार की भूमिका प्रारम्भ होती है।

प्रश्न (ग)- उपर्युक्त पंक्तियों में किस प्राचीन परंपरा की ओर संकेत किया गया है? वर्तमान में यह परंपरा किस रूप में मिलती है?
उत्तर:
संगतकार अपनी आवाज़ की गूँज को मुख्य गायक के साथ मिलाकर उसकी आवाज़ को बल प्रदान करते हैं और ‘स्थायी’ (मूलपंक्ति) को खोने नहीं देते। जब मुख्य गायक का गला बैठने लगता है और आवाज टूटने लगती है तब वे अपनी आवाज़ मिलाकर मुख्य गायक को सहयोग देते हैं।

अथवा

प्रश्न (क)- संगतकार की भूमिका कब शुरू होती है?
उत्तर:
जब संगतकार उसके साथ कदम से कदम मिलाए। क्योंकि अकेला व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता। मुख्य गायक की धूमिल पड़ती आवाज को संगतकार का सहारा ही उबारता है। 

प्रश्न (ख)- संगतकार किसे कहते हैं ?
उत्तर:
मुख्य गायक का छोटा भाई कोई शिष्य, संबंधी या संगीत सीखने का इच्छुक व्यक्ति आदि।

प्रश्न (ग)- संगतकार की भूमिका किन रूपों में बताई गई है ?
उत्तर: 
मुख्य गायक के स्वर में संगतकार द्वारा अपना स्वर मिलाने की प्राचीन परंपरा की ओर संकेत किया गया है। वर्तमान में नाटक, फिल्म, खेल, साहित्य, राजनीति एवं अन्य कार्य क्षेत्रों में भी यह परंपरा दिखाई देती है। इसके बिना कार्य की सफलता संभव नहीं है। 

अथवा

प्रश्न (क)- कविता की भाषा की विशेषता बताइए।
उत्तर:
कविता की भाषा व्यावहारिक खड़ी बोली है।

प्रश्न (ख)- संगतकार का क्या काम है ?
उत्तर: 
संगतकार का काम है- मुख्य गायक की गरजदार आवाज में अपनी गूँज मिलाना। वह भारी-भरकम आवाज़ को कोमलता प्रदान करती है।

प्रश्न (ग)- मुख्य गायक तथा संगतकार की आवाजों के लिए किन-किन शब्दों का प्रयोग हुआ है तथा क्यों ?
उत्तर:
मुख्य गायक की आवाज़ के लिए ‘गरज’ तथा संगतकार की आवाज़ के लिए ‘गूँज’ शब्दों का प्रयोग किया गया है। क्योंकि मुख्य गायक का स्वर भारी तथा संगतकार का स्वर कोमल होता है। साथ ही संगतकार कभी अपने सुर को मुख्य गायक के सुर से ऊँचा नहीं जाने देता।

4. गायक जब अंतरे की जटिल तानों के जंगल में
खो चुका होता है
या अपने ही सरगम को लाँघकर
चला जाता है भटकता हुआ एक अनहद में
तब संगतकार ही स्थायी को सँभाले रहता है।
जैसे समेटता हो मुख्य गायक का पीछे छूटा हुआ सामान
जैसे उसे याद दिलाता हो उसका बचपन
जब वह नौसिखिया था।

प्रश्न (क)- संगतकार की भूमिका का महत्व कब सामने आता है ?
उत्तर:
मुख्य गायक की कमज़ोर पड़ती आवाज़ को संगतकार बिना जताए सहारा देता है।

प्रश्न (ख)- यहाँ नौसिखिया किसे कहा गया है और किस संदर्भ में ? 

उत्तर:

  • मुख्य गायक को
  • जब मुख्य गायक सुरों से दूर चला जाता है। 

प्रश्न (ग)- भटके स्वर को संगतकार कब सँभालता है और मुख्य गायक पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है ? 

उत्तर:

  • जब मुख्य गायक जटिल तानों में खो कर सुर से भटक जाता है, तब संगतकार स्थायी को सँभाले रहता है।
  • मुख्य गायक की आवाज़ को सहारा मिलता है और उसे अकेलेपन का अहसास नहीं होता।

5. तार सप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला
प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ
आवाज में राख जैसा कुछ गिरता हुआ
तभी मुख्य गायक को ढाँढस बँधाता

कहीं  से चला आता है संगतकार का स्वर

कभी-कभी वह यों ही देता है उसका साथ

यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं  है

और यह कि फिर से गाया जा सकता है

गाया जा चुका राग।

प्रश्न (क)- ‘तार सप्तक’ से कवि का क्या अभिप्राय है ? 
उत्तर: ‘तार सप्तक’ का अर्थ है सरगम के ऊँचे स्वर ;किसी गीत को ऊँची आवाज में गाया जानाद्ध।

प्रश्न (ख)- कवि संगतकार के किस व्यवहार को उसकी मनुष्यता मानता है और क्यों ? 
उत्तर: संगतकार में भी मुख्य गायक की तरह गायन-कौशल होता है, वह भी मुख्य गायक की तरह गा सकता है, परंतु गायक का साथ देने पर वह इस बात का विशेष ध्यान रखता है कि उसका सुर मुख्य गायक के सुर से नीचा ही रहे। ऊँचा गाने की प्रतिभा होने पर भी वह मुख्य गायक के स्वर से अपना स्वर नीचा रखकर उसका सम्मान करता है, इसे संगतकार की कमजोरी नहीं कहा जा सकता।

यह तो उसकी मनुष्यता है कि वह मुख्य गायक का सम्मान करता है तथा उसके सुर से ऊँचा नहीं गाता।

प्रश्न (ग)- संगतकार मुख्य गायक की सहायता कैसे करता है ? 

उत्तर: संगतकार मुख्य गायक की बहुत सहायता करता है। सुर से भटकने पर उसे पुनः मूल सुर पर ले आता है। उसका गला बैठने पर जब मुख्य गायक की आवाज़ जवाब दे जाती है तथा वह निराश हो जाता है, तो संगतकार उसे निराशा से उबार लेता है, उसके सुर में अपना सुर मिलाकर उसे पुनः गाने की प्रेरणा देता है।

अथवा

प्रश्न (क)- ‘उसका गला’ में ‘उसका’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है ? 
उत्तर: मुख्य गायक के लिए प्रयुक्त हुआ है।

प्रश्न (ख)- ‘तार सप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ’:का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जब मुख्य गायक अपने स्वर को ऊँचा उठाता है तो उसका गला बैठने लगता है और ऐसा लगता है कि उसकी प्रेरणा उसका साथ छोड़ रही है, उसका उत्साह मंद पड़ जाता है। 

प्रश्न (ग)- ‘राख जैसा’ किसे कहा गया है और क्यों ? 

उत्तर: मुख्य गायक के बुझे हुए मद्धिम स्वर को ‘राख जैसा’ कहा गया है, क्योंकि स्वर को ऊँचा उठाते हुए जब उसका गला बैठने लगता है, तो उसका स्वर उत्साहहीन होकर ऐसा प्रतीत होता है, जैसे आग बुझी होने के बाद राख होती है।

6.कभी-कभी वह यों ही दे देता है उसका साथ
यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है
और यह कि फिर से गाया जा सकता है
गाया जा चुका राग
और उसकी आवाज में जो हिचक साफ सुनाई देती है
या अपने स्वर को ऊंचा न उठाने की जो कोशिश है
उसे विफलता नहीं
उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।

प्रश्न (क)- ‘यों ही’ में निहित अर्थ को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
‘यों ही’ का अर्थ है:बिना किसी प्रयोजन के।

प्रश्न (ख)- संसार में इस प्रकार की ‘मनुष्यता’ की क्या उपयोगिता है ?
उत्तर: 
संसार में तमाम लोग ऐसे हैं जो अवसर का लाभ उठाते हैं पर संगतकार ऐसा नहीं करता, यह उसकी मनुष्यता है। संसार में ऐसी मनुष्यता दूसरों को प्रेरणा देती है।

प्रश्न (ग)- आवाज़ की हिचक को विफलता क्यों नहीं कहा जा सकता ?
उत्तर:
संगतकार की आवाज़ में जो हिचक है वह इसलिए कि वह स्वयं को महत्त्व न देकर मुख्य गायक को ही महत्त्व दिलाना चाहता है अतः यह उसकी विफलता नहीं अपितु मनुष्यता है।

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