Short Questions Answers(Part - 2) - संगतकार Class 10 Notes | EduRev

Class 10 Hindi ( कृतिका और क्षितिज )

Class 10 : Short Questions Answers(Part - 2) - संगतकार Class 10 Notes | EduRev

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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. संगतकार कौन होता है और क्या करता है?
उत्तर:
संगतकार मुख्य गायक का सहायक कलाकार होता है। प्राचीनकाल से उसका यही काम है कि वह अपनी आवाज़ की गूँज को मुख्य गायक की गरजदार आवाज़ में मिलाकर उसकी आवाज़ को बल प्रदान करें। उसकी आवाज की गूँज मुख्य गायक के स्वर को कोमलता प्रदान करती है।

प्रश्न 2. जब मुख्य गायक की ताने जटिल हो जाती है और वह उनमें खोने लगता है। तब संगतकार उसे किससे भटकने नहीं देता?
उत्तर:
जब मुख्य गायक-स्थायी से गीत आरंभ करता है, तो अंतरा के शुरू होते ही ताने जटिल हो जाती हैं, आपस में उलझ जाती हैं तब तानों की जटिलता में मुख्य गायक खोने लगता है, तो संगतकार उसे सुर से भटकने नहीं देता उसे सहारा देता है।

प्रश्न 3. संगतकार मुख्य गायक को किसकी याद दिलाता हैं की टेक गाते हुए कैसे प्रतीत होते है?
उत्तर:
संगतकार, मुख्य गायक को उसका बचपन याद दिलाता है, जब वह नौसिखिया था अर्थात् जब उसने संगीत सीखना आरम्भ किया था। संगतकार गीत की टेक को गाते हुए ऐसे प्रतीत होते हैं जैसे मुख्य गायक के द्वारा रास्ते में छोड़े हुए सामान को समेटते हुए वह आगे बढ़ रहा हो या मुख्य गायक को संगतकार उसके बचपन की याद दिलाता हैं।

प्रश्न 4. मुख्य गायक के साथ संगतकार की क्या भूमिका होती है ?
उत्तर:
संगतकार दूसरों को शीर्ष पर पहुँचाने का कार्य करते हैं। संगतकार के बिना मुख्य कलाकार असफल ही रहता है। संगतकार के माध्यम से कवि, नाटक, संगीत, फिल्म तथा नृत्य आदि कलाओं में काम करने वाले सहायक कलाकारों तथा किसी भी क्षेत्र में कार्यरत सहायक कर्मचारियों की ओर संकेत करता है। ये अपने मानवतावादी दृष्टिकोण से मुख्य व्यक्ति की भूमिका को विशिष्ट बनाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।

प्रश्न 5. ‘संगतकार’ कविता के आधार पर बताइए कि संगतकार किन-किन रूपों में मुख्य गायक-गायिकाओं की मदद करते हैं ?
अथवा
संगतकार किन-किन रूपों में मुख्य गायक-गायिकाओं की मदद करते हैं ?
उत्तर:
संगतकार कभी वादक के रूप में कभी स्वर लहरियों को सँभालने में तो कभी मुख्य गायक के थके स्वर को विश्राम देने के लिए संगतकार मदद करता है।

प्रश्न 6. मुख्य गायक के साथ संगतकार का होना क्यों आवश्यक है ?
उत्तर: 
मुख्य गायक को गायन के सुरताल के लिए वाद्य यंत्रों की आवश्यकता होती है। गायक को थकान के समय सुर की आरोह-अवरोह इत्यादि के लिए संगतकार की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 7. ‘संगतकार’ की आवाज को कमज़ोर, काँपती हुई आवाज़ क्यों कहा गया है ?
उत्तर:
मुख्य गायक गायन कला में निपुण । मुख्य गायक के समक्ष अपनी लघुता का बोध ही उसमें हीन-भावना ले आता है तभी संगतकार की आवाज कमज़ोर और काँपती। 

प्रश्न 8. ‘संगतकार’ कविता में कवि ने अंतरे को ‘जटिल तान का जंगल’ क्यों कहा है ? गायक उसमें कैसे खो जाता है ?
उत्तर:
स्थायी से गीत आरम्भ, अंतरा शुरू होते ही सुर कठिन होने लगते हैं, तानें जटिल हो जाती हैं, आपस में उलझ जाती हैं। जब जटिल तानों में मुख्य गायक खोने लगता है तब संगतकार सहारा देता है। 

प्रश्न 9. गायक सरगम को लाँघकर कहाँ चला जाता है ? वह वापस कैसे आता है ?
उत्तर:
गायक अपने सरगम को लाँघकर अनहद में चला जाता है, एक अलग लोक में पहुँच जाता है। संगतकार स्थायी टेक के साथ उसे सहारा देकर उसका साथ देता है और तब मुख्य गायक वापस लौट आता है। 

प्रश्न 10. संगतकार की आवाज़ में एक हिचक-सी क्यों प्रतीत होती है?
उत्तर:
संगतकार निस्वार्थ रूप से स्वयं को पृष्ठभूमि में रखकर मुख्य गायक की सफलता में योगदान देता है। उसे अपने योगदान का श्रेय लेने की कोई इच्छा नहीं होती। इसी कारण स्वयं को पीछे रखने की कोशिश में उसकी आवाज़ में हिचक-सी प्रतीत होती है।
व्याख्यात्मक हल:
संगतकार अपनी आवाज़ को पूरा खोलकर नहीं गाता, क्योंकि वह यह नहीं चाहता कि मुख्य गायक के सामने उसकी आवाज़ तेज हो जाये। उसे मालूम है कि यदि उसकी आवाज़ तेज होगी तो मुख्य गायक की आवाज़ का प्रभाव कम हो जायेगा। मुख्य गायक के प्रति उसके मन में श्रद्धा भी है, इसलिए उसकी आवाज़ में एक हिचक-सी प्रतीत होती है।

प्रश्न 11. संगतकार द्वारा अपने स्वर को उळँचा न उठाने की कोशिश को कवि ने मनुष्यता क्यों रहा है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
संगतकार मुख्य गायक को प्रतिष्ठित करता है और स्वयं पृष्ठभूमि में रहता है उसका यह कार्य उसकी मनुष्यता का परिचायक है क्योंकि वह अपने साथी मुख्य गायक को ही प्रकाश में लाना चाहता है, स्वयं को नहीं अन्यथा उसका कार्य धोखा, छल, कपट कहा जाना जो इंसानियत के विरूद्ध है।

प्रश्न 12. सांसारिक जीवन में संगतकार जैसे व्यक्ति की सार्थकता पर विचार कीजिए।
अथवा
संगतकार जैसे व्यक्ति की जीवन में क्या उपयोगिता होती है, स्पष्ट रूप से समझाइए।
उत्तर:
संगतकार जैसे व्यक्ति स्वयं पृष्ठभूमि में रहकर मुख्य गायक को प्रसिद्धि यश दिलवाते हैं। ऐसे व्यक्ति गायन का श्रेय (या श्रम का श्रेय) स्वयं नहीं लेते अपितु जिनका वह साथ देते हैं, उन्हें ही प्रकाश में लाना उनका ध्येय होता है अतः ऐसे समर्पित व्यक्ति जीवन में बहुत उपयोगी माने जाते हैं।

प्रश्न 13. मुख्य गायक की सफलता का श्रेय संगतकार को न दिया जाना समाज की किस प्रवृत्ति का परिचायक है ? इस प्रवृत्ति से क्या हानियाँ हैं ?
उत्तर:
मुख्य गायक की सफलता का श्रेय संगतकार को न दिया जाना समाज की स्वार्थी प्रवृत्ति का परिचायक है। संगतकार कभी आगे नहीं  बढ़ पाता। उसकी कला दूसरे के नाम से जानी जाती है। मन में हीन भावना जाग सकती है।

प्रश्न 14. ‘संगतकार’ कविता में ‘नौसिखिया’ से क्या अभिप्राय है ? उसका गला कब रुँध जाता है ?
उत्तर:
नौसिखिया से आशय है- गायन को नया-नया सीखने वाला। जब उत्साह गिरने का प्रभाव उस पर पड़ता है तो उसका गला बंद हो जाता है।
व्याख्यात्मक हल:
सहयोगी गायक गीत की टेक को गाते हुए ऐसे लगते हैं जैसे गायक के द्वारा रास्ते में छोड़े हुए सामान को समेटते हुए आगे बढ़ रहे हों। या फिर ऐसे लगता है जैसे संगतकार मुख्य गायक को बचपन की वह याद दिलाते हैं जब उसने संगीत सीखना आरम्भ किया था।

प्रश्न 15. संगतकार जैसे व्यक्ति सर्वगुण-सम्पन्न होकर भी समाज की दृष्टि में महत्त्वपूर्ण क्यों नहीं माने जाते ? 2
उत्तर:
सर्वगुण सम्पन्न होने पर भी मुख्य गायक के पीछे रहकर सहयोगी बने रहते हैं। प्रिय कलाकार की सफलता में अपनी सफलता देखते हैं। वे भी अत्यधिक प्रतिभाशाली, कर्तव्यनिष्ठ तथा परोपकारी होते हैं। 

प्रश्न 16. ‘संगतकार’ के माध्यम से कवि ने समाज के किस वर्ग के व्यक्तियों की ओर संकेत किया है ?
अथवा
संगतकार के माध्यम से कवि किस प्रकार के व्यक्तियों की ओर संकेत करना चाह रहा है ?
अथवा
संगतकार की भूमिका का महत्त्व कब सामने आता है ?
उत्तर: 
जो अन्य व्यक्ति के साथ चलते हैं और उनके सहायक होते हैं। किसी भी व्यक्ति की सफलता में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जैसे संगीत में गायक के साथ संगतकार महत्त्वपूर्ण होते हैं। उसी प्रकार जीवन में साथ चलते लोग।

प्रश्न 17. संगतकार में त्याग की उत्कट भावना भरी है:पुष्टि कीजिए।
अथवा
संगतकार में त्याग की भावना निहित है, स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर: संगतकार मुख्य कलाकार का संबल बनते हैं, उसे भटकने से बचाते हैं, स्वयं प्रतिभावान होने पर भी उससे आगे बढ़ने का प्रयास नहीं करते। 

व्याख्यात्मक हल:
संगतकार मुख्य गायक की गरजदार आवाज़ में अपनी गूँज मिलाता है। वह भारी-भरकम आवाज़ को कोमलता प्रदान करता है। सदा मुख्य गायक के कष्टों का निवारक रहा है। संगतकार उसके पीछे लगातार गाता रहता है और उसके बुझते स्वर को सँभाले रहता है। ऊँचा गाने की प्रतिमा होने पर भी वह मुख्य गायक के स्वर से अपना स्वर नीचा रखकर उसका सम्मान करता है जो संगतकार की मनुष्यता है।

प्रश्न 18. मुख्य गायक और संगतकार की आवाज़  में क्या अंतर दिखाई पड़ता है?
उत्तर:
 

  • मुख्य गायक की आवाज़ चट्टान जैसी भारी है। उसमें गरज है।
  • संगतकार की आवाज़ मुख्य गायक की अपेक्षा कमज़ोर, काँपती और हिचकती हुई, एक हलकी गूँज जैसी है।

व्याख्यात्मक हल:
संगीत कार्यक्रम में मुख्य गायक की भूमिका नायक की भाँति होती है। उसकी आवाज़ चट्टान की भाँति गम्भीर व भारी होती है, जो श्रोताओं को प्रभावित कर उन्हें सुनने के लिए उत्सुक करती है। इसके विपरीत संगतकार की आवाज़ मधुर, कंपनयुक्त व कमजोर होती है जो प्रत्येक कदम पर मुख्य गायक के स्वर में स्वर मिलाकर उसके स्वर को प्रभावपूर्ण बनाती है।

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