अफ्रीका महाद्वीप - भारतीय भूगोल UPSC Notes | EduRev

भूगोल (Geography) for UPSC Prelims in Hindi

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UPSC : अफ्रीका महाद्वीप - भारतीय भूगोल UPSC Notes | EduRev

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अफ्रीका महाद्वीप
स्थति तथा विस्तार
• क्षेत्रपफल की दृष्टि से महाद्वीपों में अफ्रीका का द्वितीय स्थान है। इसका क्षेत्रपफल 30,262,000 किलोमीटर है।
• यह उत्तरी तथा दक्षिणी गोलार्ध के कटिबंधों में लगभग समान दूरी तक विस्तृत है। 37°21' उत्तरी अक्षांश से 34°51' दक्षिणी अक्षांश तक तथा 17°20' पश्चिमी देशांतर से 51°12' पूर्व देशांतर तक यह विस्तृत है।
• विषुवत रेखा इस महाद्वीप के मध्य से जाती है। दक्षिण की अपेक्षा यह उत्तर में अधिक चौड़ा है।
• इसके क्षेत्रपफल का लगभग दो तिहाई भाग उत्तरी गोलार्ध तथा एक तिहाई भाग दक्षिणी गोलार्ध के अंतर्गत आता है।

प्राकृतिक बनावट
• इस महाद्वीप की भूसंचना तथा प्राकृतिक संरचना अन्य महाद्वीपों की अपेक्षा अधिक स्पष्ट एवं सरल है। इसका अधिकांश क्षेत्र पठारी है, जिस पर भौमिक गतियों का प्रभाव बहुत कम पड़ा है।
• इसकी महाद्वीपीय छज्जा (शेल्फ) एवं महाद्वीपीय ढ़ाल (स्लोप) के किनारे प्रायः इसके समुद्रतट के समांतर हैं, जिससे ज्ञात होता है कि इसका निर्माण पृथ्वी की बाहरी परत के टूटने से हुआ है।
• इसके धरातल की लगभग एक -तिहाई भूमि पर कैब्रियन पूर्व की चट्टानें स्थित हैं।
• इस महाद्वीप के पश्चिमोत्तर प्रदेश तथा दक्षिण के अंतरीपीय भाग को छोड़कर प्रायः सर्वत्रा मुड़ने से बने पर्वतों की श्रेणियों का अभाव है।
• ज्ञातव्य है कि पश्मिोत्तर भाग में एटलस पर्वत यूरोप के आल्प्स पर्वत का ही बढ़ा हुआ भाग है।
• दक्षिण में अनेकों लघु श्रेणियां हैं, उदाहरणार्थ राॅगवुर्डबर्ग निउवेत, बर्ग, स्निउबर्ग, ड्राकेंसबर्ग स्वार्तबर्ग, लाॅन्जबर्ग आदि।
• अफ्रीका के पश्चिमी तट पर स्थित बेंगला को यदि लाल सागर के तट पर स्थित स्वाकिन के एक कल्पित रेखा द्वारा मिलाया जाए तो यह रेखा इस महाद्वीप को प्राकृतिक बनावट की दृष्टि से दो असमान भागों में बांट देगी।
• उत्तरी भाग की औसत उफंचाई 3000, पफुट से बहुत कम तथा दक्षिणी भाग औसत उफंचाई 3,000 पुफट से बहुत अधिक है।
• उत्तरी भाग में अनेक पठार हैं जो कैब्रियन पूर्व या आग्नेय चट्टानों से निर्मित हैं। इनमें अहगर, तसिली, तिबेस्ती एवं दारपफर पठार मुख्य हैं।
• कैमरून की चोटी एक प्रमुख ज्वालामुखी शिखर है। गिनी की खाड़ी में पफर्नदो पो. प्रिसिप, सोओथोम आदि अनेक द्वीप ज्वालामुखी द्वारा निर्मित हैं।
• पूर्वी अफ्रीका में एक बहुत लंबी निभंग उपत्यका (रिफ्रट वैली) स्थित है जो महान निभंग उपत्यका (दि ग्रेट रिफ्रट वैली) के नाम से विश्वविख्यात है।
• इसका उत्तरी भाग एशिया में स्थित है तथा बीच के भाग में अकाबा की खाड़ी एवं लाल सागर स्थित हैं।
• अफ्रीका में पूर्वी एबीसीनियां की खड़ी ढ़ाल, तथा सुमालीलैण्ड के बीच स्थित निम्न भूमि, रूडाॅल्पफ झील, केन्या देश की नैवास्का झील तथा अन्य छोटी झीलों की शृंखला, न्यासा झील और शादेर नदी की घाटी इसी महान निभंग उपत्यका के छित्रावशेष हैं।
• इस निभंग उपत्यका की एक शाखा न्यासा झील के उत्तरी छोर के पास से निकलती है, जिसे पश्चिमी निभंग उपत्यका कहते हैं। इसमें टैगैन्यिका, किबू, एडवर्ड, अल्बर्ट आदि झील स्थित हैं।

सीमा
• अफ्रीका के पूर्व में हिन्द महासागर तथा पश्चिम में अटलांटिक महासागर स्थित है। उत्तर में भूमध्यसागर स्थित है, जिसकी लंबाई जिब्राल्टर के मुहाने से सीरिया के तट तक लगभग 2,300 मील है।
• जिब्राल्टर का मुहाना 15 से 24 मील चौड़ा है।

समुद्रतट
• अफ्रीका का समुद्र तट अधिक कटा छंटा नहीं है। पश्चिमी तट पर गिनी की खाड़ी के रूप में एक बहुत बड़ा घुमाव है, जिसके अंतर्गत बेनिन की खाड़ी स्थित है अंगोला राज्य में लोबिटो की खाड़ी है।
• दक्षिणी तट पर आल्गोजा तथा डेलागोआ की खाड़ियाँ हैं।
• दक्षिण-पूर्व में मोजांबिक का मुहाना मेडागास्कर द्वीप को अफ्रीका से पृथक् करता है। पूर्वी तट एक चौड़ा नतोदर घुमाव है।
• इस घुमाव के उत्तर-पूर्व सुमालीलैंड का प्रायद्वीप है जिसे ‘अफ्रीका की सींग’, भी कहते हैं।

जयवायु
• अफ्रीका की जलवायु पर समीपस्य महासागरों तथा महाद्वीपों का पर्याप्त प्रभाव पड़ता है। एशिया महाद्वीप का प्रभाव इस पर अपेक्षाकृत अधिक पड़ता है।
• पश्चिमी तट पर उत्तर में कैनरी तथा दक्षिण में बेंगुएला नामक ठंडी जलधाराएं बहती हैं। इन दोनों धाराओं के मध्य गिनी तट के निकट गिनी नामक उष्ण धारा बहती है।
• अफ्रीका में मुख्यतः पांच प्रकार की जलवायु पाई जाती है-विषुवतीय जलवायु, सूडान सदृश उष्ण जलवायु, उष्ण मरुस्थलीय जलवायु, भूमध्यसागरीय जलवायु और चीन सदृश ।

प्राकृतिक वनस्पति
• प्राकृतिक वनस्पति की संख्या में अफ्रीका संसार में अद्वीतीय है। विषुवतीय प्रदेश, अधिक ताप तथा वर्षा के कारण, सदाहरित घने जंगलों से आच्छादित है।
• इसका विस्तार अव्यवस्थित रूप में गौबिया के मुहाने से लेकर कांगो क्षेत्र से मिलता है। गिनी तट के मध्य भाग तथा कांगो की घाटी के निचले भाग में इन वनों का अभाव उल्लेखनीय है।
• पूर्वी अफ्रीका के अयनवृत्तीयं भाग तथा मेडागास्कर द्वीप के पूर्वी उपकूलीय भाग में भी ऐसे वन पाए जाते हैं। इन वनों के वृक्ष अधिक उचें और घने होते हैं। इनके नीचे छोटे-छोटे पौधे भूमि को पूर्णतः ढक लेते हैं।
• विषुवतीय वनस्थली के उत्तर तथा दक्षिण में प्रसिद्ध घास क्षेत्र सवाना विस्तृत है।
• दक्षिण पूर्व अफ्रीका में घास का वेल्ड नामक समशीतोष्ण मैदान पाया जाता है।
• अबिसीनिया, मेडगास्कर तथा पूर्वी अफ्रीका के उफचें पठारों पर भी घास में मैदान पाए जाते हैं।
• भूमध्य सागरीय जलवायु वाले प्रदेशों में जैतून और रसीले फलो के वृक्ष एवं कुछ छाड़ियां मिलती है।
• मरुस्थली भाग वनस्पति से प्रायः शून्य हैं। मरुद्यानों में कुछ कांटेदार झाड़ियां और खजूर के वृक्ष दिखाई पड़ते हैं।

मिट्टियाँ
• अफ्रीका के अयनवृत्तीय भाग में प्रायः लाल दोमट मिट्टी पाई जाती है।
• उष्ण मरुस्थलीय भाग की मिट्टी में जीवांश कम पाया जाता है और मिट्टी का रंग पफीका होता है कहीं-कहीं क्षारमिश्रित उफसर भी मिलता है।
• ट्रांसवाल की निम्न भूमि तथा दक्षिणी रोडेशिया में चनोजेम नामक काली मिट्टी पाई जाती है। इसमें जीवांश की मात्रा अधिक होती है।
• इस मिट्टी की एक मेखला उत्तरी अफ्रीका के सूडान राज्य के मध्य में भी मिलती है।

कृषि
• अफ्रीका के अधिकांश भाग में कृषि प्राचीन ढंग से की जाती है। यहां आदिवासी अपनी आवश्यकतानुसार अन्न उपजाते हैं मक्का, ज्वार तथा बाजरा इसके मुख्य खाद्यान्न हैं।
• यहाँ पैदा होने वाले कुछ पौधे तो वहां अनादि काल से पाए जाते हैं। उदाहरणार्थ नील, कहवाऋ किन्तु कुछ पौधे विदेशियों द्वारा बाहर से लाकर भी लगाए गए हैं।
• केला, कटहल, नरियल, खजूर, जैतून, एवं ज्वार, बाजरा, गन्ना, तथा धान संभवतः यहां एशिया महाद्वीप से लाए गए और मक्का, कसावा, मूंगपफली, शकरकंद, अरुई, सेम, पपीता तथा अमरूद व्यापारियों द्वारा अमेरिका से लाकर पश्चिमी अफ्रीका में लगाए गए हैं।
• इसके अतिरिक्त कहीं कहीं मूंगपफली और रुई भी उपजाई जाती है। वेल्ड वाले भाग में मक्का, तम्बाकू गेंहू जौ तथा जई की खेती होती है।

नदियाँ
• अफ्रीका की पांच मुख्य नदियां है - नील, नाइजर, कांगो, जाबेंजी तथा आॅरेंज। नील नदी में छह प्राकृतिक जलप्रपात हैं।
• सबसे निचला प्रपात असवान के समीप है। इस नदी पर कई बांध बनाए गए हैं, जिसमें असवान बांध सर्वोच्च और विश्व प्रसिद्ध है।
• सोवत, नीली नील एवं अतबरा नदियां नील नदी की मुख्य सहायक नदियां हैं। नीली नील नदी पर निर्मित सेनार बांध उल्लेखनीय है।
• कांगो नदी नील नदी से लगभग 1,000 मील छोटी हैं, किंतु इसमें अपेक्षाकृत जलराशि का वहन अत्यधिक होता है।
• अपनी सहायक नदियों के साथ कांगो नदी अफ्रीका के मध्य में यातायात का उत्तम साधन है।
• पश्चिमी भाग की छोटी नदियों में सेनेगल तथा गैंबिया उल्लेखनीय है।

झीलें
• अफ्रीका की सबसे बड़ी झील विक्टोरिया न्यांजा है जो नील नदी के उद्गम स्थान के समीप है।
• इस झील का क्षेत्रपफल 26,000 वर्ग मील, अधिकतम लंबाई 250 मील, चैड़ाई 200 मील तथा गहराई 270 पुफट है।
• इसके समीप की अल्बर्ट न्यांजा नामक झील है। टैगैन्यिका 450 मील लंबी और 40 मील चैड़ी झील है।
• इसकी अधिकतम गहराई 4,908 पुफट है। दूसरी लंबी और संकरी झील न्यांसा है।
• किबू झील 55 मील लंबी तथा 30मील चैड़ी है। यह झील पुरातन ज्वालामुखी प्रदेश में स्थित है।
• अबिसीनिया पठार के उत्तरी भाग में ताना झील आर्थिक एवं राजनीतिक दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण है। रूडोल्पफ झील पूर्वोत्तर अफ्रीका में स्थित है।

निवासी
• अफ्रीका के निवासियों में प्रमुख स्थान यहां के आदिवासियों का है। इनमें हब्शी, हमाइट, शामी, बौने बुश्मैन हाॅटेंटाॅन तथा मसानी मुख्य जातियां है।
• मुखाकृति एवं शारीरिक बनावट की दृष्टि से हाब्शियों की कई उपजातियां मानी जाती है, किंतु पश्चिमी अफ्रीका का हब्शी पूरे समुदाय का प्रतिरूप माना जाता है। इसका शरीर भारी-भरकम, कद साधारण या उफंचा, सिर लंबा, नाक चैड़ी, होंठ मोटे, निचला जबड़ा कुछ आगे निकला हुआ, रंग काला और बाल काले तथा घुंघराले होते हैं।
• हमाइट जाति के लोगों का शरीर दुर्बल, रंग हल्का बाल सीधे या घुंघराले, नाक पतली तथा होंठ पतले होते हैं। इस जाति के लोग सहारा तथा पूर्वोत्तर अफ्रीका में पाए जाते हैं जहां इनका संबंध हब्शियों के साथ हो गया है वहां हब्शी जाति के कुछ लक्षण इनमें भी स्पष्ट दिखाई पड़ते हैं।
• अफ्रीका के उत्तरी तथा पूर्वी भाग में रहने वाले लोग शामी जाति के हैं इनका रंग हल्का भूरा होता है तथा हमाइटों की तरह की नाक और होंठ पतले होते हैं। सांवले रंग के अतिरिक्त इनके अन्य सभी लक्षण काकेशस की गोरी जाति के समान ही हैं।
• बेल्जियम कांगो क्षेत्र के पूर्वोत्तर प्रदेश में बौने निवास करते हैं। इनका शरीर सुगठित होता है और ये अच्छे शिकारी होते हैं। इनका शरीर बड़ा, गर्दन छोटी, धड़ लंबा, पैर छोटे तथा हाथ-पांव पतले होेते हैं। इनका रंग हब्शियों की तरह काला नहीं होेता, बल्कि पीलापन लिए हुए कुछ भूरा होता है।

• बुशमैन दक्षिणी अफ्रीका में कालाहाड़ी क्षेत्रा में रहते हैं। इनका कद छोटा और शरीर की बनावट हब्शियों से भिन्न होती है। इनका सिर लंबा, हाथ-पैर धड़ की अपेक्षा छोटे तथा बाल घुंघराले होते हैं हाॅटेंटाॅट के शरीर की बनावट भी बुशमैन की तरह होती है।

अफ्रीका महाद्वीप: महत्वपूर्ण तथ्य

♦ अफ्रीका विश्व का द्वितीय सबसे बड़ा महाद्वीप है। इस महाद्वीप में 54 देश हैं।

♦ अफ्रीका के पर्वतों में एटलस एंव ड्रैकन्सबर्ग प्रमुख हैं यहां का ज्वालामुखी पर्वत किलीमन्जारों हैं।

♦ अफ्रीका मे एबीसीनिया एवं दक्षिणी अफ्रीका के पठार स्थित हैं।

♦ अफ्रीका की प्रमुख नदियों में नील, कांगो, नाइजर जांबेजी आदि सम्मिलित हैं।

♦ अफ्रीका में विश्व का सबसे गर्म स्थल अल अजीजीयाह लीबिया में स्थित है, यहां 3 सितम्बर, 1922 को 58° से तापमान अंकित किया गया था।

♦ अफ्रीका की प्रमुख झीलों में विक्टोरिया, एल्वर्ड, एडवर्ड, किवु, टांगानीका, न्यासा (मलावी), रूडोल्पफ, वोल्टा, चाड़ आदि सम्मिलित हैं।

♦ अफ्रीका का आइवरी कोस्ट विश्व में सर्वाधिक कोका (8,09,000 मी. टन 1994) उत्पादक देश है।

♦ अफ्रीका में सर्वाधिक ज्चार उत्पादित करने वाले देश नाइजीरिया है। इसका विश्व में तीसरा स्थान है।

♦ अफ्रीका में सर्वाधिक कसावा उत्पादित करने वाला देश कांगो है।

♦ अफ्रीका में सर्वाधिक चाय उत्पादित करने वाला देश कीनिया है। इसका विश्व में प्रथम स्थान है।

♦ अफ्रीका में सर्वाधिक काॅपफी उत्पादित करने वाला देश आइवरी कोस्ट है। इसका विश्व में चतुर्थ स्थान है।

♦ अफ्रीका में किम्बरले खान (दक्षिण अफ्रीका) विश्व की सबसे बड़ी हीरे की खान है।

♦ अफ्रीका का दक्षिण अफ्रीका गणतंत्र विश्व में सर्वाधिक स्वर्ण उत्पादक देश हैं।

♦ अफ्रीका का जायरे (लोकतांत्रिक गणतंत्र कांगो) विश्व का सर्वाधिक हीरा उत्पादक देश है। द्वितीय स्थान बोत्सवाना का है।

♦ अफ्रीका में सर्वाधिक बाॅक्साइट उत्खनित करने वाला देश गिनी है इसका विश्व में द्वितीय स्थान है।

♦ अफ्रीका में सर्वाधिक मैगनीज उत्खनित करने वाला देश गैबोन है। इसका विश्व में पंचम स्थान है।

♦ अफ्रीका में सर्वाधिक फॉस्फेट राॅक खनिज उत्पादित करने वाला देश मोरक्को है। इसका विश्व में तृतीय स्थान है।



अफ़्रीकी भाषाएं
• अफ्रीका महाद्वीप में बुशमैन, बांटू, सूडान तथा सामी-हामी परिवार की भाषाएं बोली जाती हैं। अफ्रीका के समस्त उत्तरी भाग में सामी भाषाओं का अधिपत्य प्रायः दो हजार वर्षों से रहा है।

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