अभ्यर्थियों के लिए सुझावः जरूर पढ़ें - (भाग - 1), इतिहास, UPSC UPSC Notes | EduRev

इतिहास (History) for UPSC (Civil Services) Prelims in Hindi

UPSC : अभ्यर्थियों के लिए सुझावः जरूर पढ़ें - (भाग - 1), इतिहास, UPSC UPSC Notes | EduRev

The document अभ्यर्थियों के लिए सुझावः जरूर पढ़ें - (भाग - 1), इतिहास, UPSC UPSC Notes | EduRev is a part of the UPSC Course इतिहास (History) for UPSC (Civil Services) Prelims in Hindi.
All you need of UPSC at this link: UPSC

किसी भी प्रतियोगिता परीक्षा के लिए सामान्य ज्ञान के अदंर भारतीय इतिहास एक अति आवश्यक भाग होता है। इसलिए, इस विषय का अध्ययन करना अनिवार्य हो जाता है।। सबसे पहले हम विगत 37 पूछे गए प्रश्नों का तथा विभिन्न वर्षों के पैटर्न का अध्ययन करेंगे और फिर तार्किक परीक्षण के बाद आगे की रणनीति तैयार करेंगे।

प्राचीन

सिन्धु घाटी की सभ्यता

अभ्यर्थियों के लिए सुझावः जरूर पढ़ें - (भाग - 1), इतिहास, UPSC UPSC Notes | EduRev

  • इस अध्याय को निम्नलिखित शीर्षकों में बांटा जा सकता है
    (i) उत्पत्ति,
    (ii) विस्तार,
    (iii) प्रमुख नगर और उनकी विशेषताएं
    (iv) आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक तथा कला व स्थापत्य के क्षेत्र में  विकास
    (v) पतन और अंत
    (iv) उत्तरजीविता व निर्भरता।

सामान्यतः

  • इन्हीं शीर्षकों से प्रश्न पूछे जाते है। अब हम पिछले 32 वर्षों के दौरान सिविल सर्विसेज प्रारम्भिक परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों का विश्लेषण करेंगे 1985 से पूर्व प्रश्नों का पैटर्न बहुत सरल था। लेकिन क्रमशः इसमें परिवर्तन आया। आगे चलकर सुमेलित करने वाले प्रश्न, कथन - कारण पर आधारित प्रश्न आदि पुछे जाने लगे ऐसे प्रश्नों की भी बहुतायत होने लगी जिसमें चार विकल्पों में से दो या तीन या चारों सही विकल्पों का चयन करना पडे़। 1985 और 1986 में चावल की भूसी, घोड़े का कंकाल आदि विशिष्ट वस्तुओं की प्राप्ति से सम्बंधित प्रश्न पूछे गए। 1987 में हड़प्पा की लिपि तथा नक्शे पर हड़प्पा सभ्यता के केन्द्रों की पहचान करनी थी।
  • साथ ही, मृदभांड के रंग से संबंधित प्रश्न भी पूछा गया था। 1988 में सिन्धु सभ्यता की मुहरों किस चीज से बना है तथा सूती कपड़े और हल के निशान कहां पाया गया है? से संबंधित प्रश्न थे। 1989 और 1990 में सभ्यता के पतन के कारण, बाट व माप-तौल तथा भिन्न-भिन्न स्थानों पर पाई गई भिन्न-भिन्न वस्तुओं से संबंधित प्रश्न थे। 1991 - 1995 तक पूछे गए प्रश्नों का पैटर्न कमावे एक समान है। इन वर्षों में प्रश्न मुख्यत: व्यापार और वाणिज्य, पतन के कारण, कला, मुहरों  पर पाए गए जानवर, गेहूं, जौ व चावल की खेती, सिन्धु सभ्यता की मुहरों का विदेशों में पाया जाना, विभिन्न वस्तुओं के आयात-नियार्त आदि पर आधारित थे वर्ष 1996 में पूछे गये प्रश्न थे - हड़प्पा संस्कृति की सदरी पश्चिमी बस्ती कौन थी? हड़प्पीय दिलों का सर्वाधिक प्रचलित प्रकार कैसा है? पकी मिट्टी का बना हल का एक प्रतिरूप कहां से प्राप्त हुआ है? वर्ष 1997 में पूछे गए प्रश्न थे - हड़प्पीय नगर का सर्वाधिक महत्वपूर्ण लक्षण क्या है? किन धातुओं का प्रयोग हड़प्पावासियों ने नहीं किया? 1998 से 2010 तक प्रश्नों के पैटर्न में ख़ास परिवर्तन नहीं आया। ऊपर दिए गए 6 भागो  में से ही प्रश्न पूछे गए। सन् 2011 से विश्लेषणात्मक प्रश्नों के वस्तुनिष्ठ बनाकर पूछा जाने लगा। 
  • सन् 2011 में एक ही प्रश्न पूछा गया वह था-  इनमें से  से क्या सही है यह मुख्यत: एक धर्मनिरपेक्ष सभ्यता थी, यद्यपि धार्मिक तत्व थे पर वे ज्यादा वर्चस्व नहीं रखते थे तथा इस काल में सूती वस्त्रों के लिए कपास का प्रयोग किया जाता था। सन 2012 सन 2012 में कोई प्रश्न नहीं था। सन 2013 में एक प्रश्न था- सिन्धु घाटी के लोगों की विशेषता क्या थी? उनके पास बड़े महल एवं मंदिर थे, वे स्त्री एवं पुरुष दोनों तरह के प्रतिमा की पूजा करते थे। तथा वे युद्ध में घोड़े द्वारा खींचे गए रथ का उपयोग करते थे। सन 2014-16 तक इस अध्याय से कोई भी प्रश्न नहीं पूछा गया। सन 2017 में जो प्रश्न पूछे गए वह सिन्धु घाटती सभ्यता एवं वैदिक काल का तुलनात्मक अध्ययन था। जहाँ तक प्राचीन एवं मध्यकालीन इतिहास का सवाल है आप समाजिक एवं सांस्कृतिक इतिहास के साथ-साथ कला, दर्शन, कलाकृति एवं साहित्य पर भी विशेष ध्यान दें। तुलनात्मक अध्ययन अनिवार्य है।
  • इस अध्याय के अंतर्गत हम तथ्यपरक जानकारियां, वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का संकलन तथा खास-खास सूचनाओं को बाॅक्स के अंदर प्रस्तुत कर रहे है जिसमें उन शीर्षकों पर विशेष बल दिया गया है जिनकी चर्चा ऊपर की गई है।

वैदिक काल

अभ्यर्थियों के लिए सुझावः जरूर पढ़ें - (भाग - 1), इतिहास, UPSC UPSC Notes | EduRev

वैदिक सभ्यता

  • सिविल सर्विसेज प्रारंभिक परीक्षा में इस अध्याय से सामान्यतः एक या दो पूछे जाते है। 1989 तक इस अध्याय से पूछे गए प्रश्न सरल व सीधे होते थे, जैसे - विष्टि क्या था, बली क्या था, गोत्र का क्या अर्थ होता था? यव क्या था?। उस समय तक अधिकांश प्रश्न आर्थिक और सामाजिक तंत्र पर आधारित होते थे। लेकिन 1990 और उसके बाद प्रश्नों के पैटर्न में परिवर्तन नजर आता है।  ऋग्वेदिक आर्यों की भौगोलिक पृष्ठभूमि, कबीलाई युद्ध धर्म, साहित्यिक कृतियां आदि क्षेत्रों से प्रश्न पूछे गए है। उदाहरण के तौर पर 1990 में यह प्रश्न पूछा गया किस बात से साबित होता है कि आर्यों को समुद्र की जानकारी थी?, इस काल के साहित्य में किस नदी का उल्लेख सबसे ज्यादा बार हुआ है? एक और प्रश्न था कि ‘होता’ क्या था।
  • 1995 तक करीब-करीब ऐसे ही पैटर्न का अनुसरण किया गया। वर्ष 1996 में पूछे गये प्रश्न थे- ऋग्वेदिक देवता इन्द्र के विषय में क्या सही है?, दाशराज्ञ युद्ध का विजेता सुदास किस जन से सम्ब था?, वेदांग में किनका समावेश है?, वर्ष 1997 में पूछे गये प्रश्न थे - ऋग्वेदिक में  संपत्ति का प्रमुख रूप क्या था?, चार वर्णों का उल्लेख सर्वप्रथम कहां मिलता है?, नचिकेता और यम के बीच संवाद का उल्लेख किसमें किया गया है?, कौन सी भाषा में लेखन बाएँ से दाएँ की ओर होता था?, सन् 1998 से सन् 2010 तक प्रश्नों के पैटर्न में कोई विशेष परिवर्तन नहीं देखा गया। सन् 2011 से वर्णनात्मक एवं तार्किक प्रश्नों को वस्तुनिष्ठ बनाया जाने लगा। अब सिर्फ रटने से काम नहीं चलेगा। सन् 2011 में इस काल से धर्म एवं रीत के बारे में वर्णन किया गया एवं पूछा गया कि वैदिक आर्यों का धर्म किस पर आधारित था?, सन् 2013 में इस भाग से कोई भी प्रश्न नहीं पूछा गया। 
  • सन् 2014 में यह पूछा गया कि ‘सत्यमेव जयते’ कहाँ से लिया गया? सन् 2015 एवं 2016 में इस अध्याय से कोई भी प्रश्न नहीं पूछा गया। सन् 2017  में एक प्रश्न वैदिक काल एवं सिन्धु घाटी सभ्यता के तुलनात्मक विश्लेषण पर पूछा गया। प्रश्नों के पैटर्न को देखते हुए हमने तथ्यों की तह में जाने का प्रयास किया है। चूंकि इस अध्याय से प्रत्ययात्मक प्रश्नों की संभावना बहुत कम है, अतः यह आवश्यक है कि सारे तथ्य आपको याद हों। इस अध्याय में हमारा मुख्य जोर आर्थिक, सामाजिक, भौगोलिक, धार्मिक तथा साहित्यिक क्षेत्रों पर होगा।

संगम युग

अभ्यर्थियों के लिए सुझावः जरूर पढ़ें - (भाग - 1), इतिहास, UPSC UPSC Notes | EduRev

  • इस अध्याय से कभी-कभी प्रश्न पूछे जाते हैं। 1989 से प्रश्नों के पैटर्न में परिवर्तन देखा जा सकता है। इससे पूर्व मुख्यतः साहित्य और अर्थव्यवस्था से संबंधित प्रश्न ही पूछे जाते थे। साहित्य के क्षेत्र में विभिन्न रचनाकारों की कृतियों और विशिष्ट कृतियों की विषय वस्तु पर आधारित प्रश्न होते थे। अर्थव्यवस्था के प्रश्न में व्यापार और वाणिज्य का बोलबाला था, खासकर धातु और कपड़ों का व्यापार। कभी-कभी राजाओं, नगरों, बंदरगाहों से संबंधित प्रश्न भी पूछे जाते थे, जैसे - शेनगुवन किस वंश का राजा था, पूर्वी तट का मुख्य बंदरगाह कौन-सा था, आदि। उन दिनों इस अध्याय की तैयारी हेतु गजेटियर आफ़ इंडिया नामक पुस्तक पर्याप्त हुआ करती थी।
  • 1989 से जो परिवर्तन हुआ है, लगता है उसका मुख्य उद्देश्य प्रश्न पत्र को ज्यादा कठिन बनाना है ताकि परीक्षार्थियों की छंटनी ज्यादा आसानी से हो सके। अब पूछे जाने वाले प्रश्न राजनीतिक स्थिति, अर्थव्यवस्था, भूगोल, धर्म और यहां तक कि प्रमुख साहित्यिक कृतियों ;जैसे मणिमेकलईद्ध के पात्रों से भी संबंधित होते है। संगम युग में प्रयुक्त तमिल शब्दों के अर्थ भी पूछे जाते है। वर्ष 1996 में पूछे गए प्रश्न थे- संगम साहित्य में उल्लिखित शब्द नडुकल क्या है?, वर्ष 1997 में पूछे गए प्रश्न थे -संगम काल में तमिल में महाभारत किसने लिखी?, उस काल में प्रयोग किए गए विभिन्न तमिल शब्दों को रटना होगा। 
  • उदाहरण के लिए सन् 2016 में यह पूछा गया कि इरीपत्ती, तेनियु एवं घटिका क्या थे? वैसे 2011 से इस अध्याय पर कम जोर दिया जा रहा है ऐसा प्रतीत होता है। अतः इस अध्याय के लिए सभी उपलब्ध सामग्रियों का अध्ययन आवश्यक है। हिन्दी भाषी परीक्षार्थियों को तो इस अध्याय के लिए अधिकांश तथ्यों को बार-बार रटना होगा। यहां प्रस्तुत अध्ययन सामग्री आपके इस प्रयास में सहायक सिद्ध होगा।

बौद्ध एवं जैन धर्म

अभ्यर्थियों के लिए सुझावः जरूर पढ़ें - (भाग - 1), इतिहास, UPSC UPSC Notes | EduRevजैन धर्म तथा बौद्ध धर्म

  • सिन्धु घाटी की सभ्यता और वैदिक सभ्यता की भांति यह अध्याय भी सिविल सर्विसेज प्रारम्भिक परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस अध्याय से सामान्यतः दो या तीन प्रश्न पूछे जाते रहे है। इस अध्याय के प्रश्नों के पैटर्न में भी क्रमिक परिवर्तन स्पष्ट दिखाई पड़ता है। 1986 में पूछे गए कुछेक बेतुका प्रश्नों को छोड़कर 1985 से 1989 तक के प्रश्नों का पैटर्न करीब-करीब एक जैसा है। 1990 से पहले पूछे जाने वाले कुछ प्रश्न है - जैन धर्म के त्रिरत्न क्या हैं? बौद्ध मठ-विषयक नियमावली किसमें संग्रहीत है?, धर्मचक्र प्रवर्तन किसका सूचक है?, निर्गंथ किससे संबंधित थे?, जैन धर्मग्रंथों का संकलन कहां हुआ?, अब तो इस तरह के सरल प्रश्न अब कम ही पूछे जाते है। 
  • अब पूछे जाने वाले प्रश्न सामान्यतः तत्कालीन अर्थव्यवस्था, साहित्य, कला व स्थापत्य और दर्शन पर आधारित होते है। कुछ उदाहरण इस प्रकार है - स्यादवाद किसका दर्शन है?, बुद्ध, पाश्र्व, महावीर और भद्रबाहु को कालक्रमानुसार सजाएँ?, सुत्त पिटक, विनय पिटक और अभिधम्म पिटक में क्या है?, साथ ही, किसी खास दर्शन से संबंधित उदाहरण देकर यह पूछा जाता है कि वह किस दर्शन से उद्धत है। 1996 में पूछे गए प्रश्न थे - महासंघिकों के अनुसार जीव किससे निर्मित है?, परम्परानुसार थेरवाद सम्प्रदाय के प्रवर्तक महाकच्चायन कहां के थे?, 1997 में पूछे गए प्रश्न थे- बौद्ध शब्दावली में ‘धर्मचक्रप्रवर्तन’ से क्या निर्देशित होता है?, किस विचार का प्रचलन महावीर ने किया?, महायान बुद्ध के अनुसार बौधिसत्व अवलोकितेश्वर को किस रूप में जाना जाता था?
  • सन 2011 में इस अध्याय से एक प्रश्न पूछा गया- वह प्रश्न जैन दर्शन पर आधारित था। सन् 2012 में इस अध्याय से दो प्रश्न थे- बुद्ध के भमिप्रास मुद्रा और बुद्ध एवं जैन दर्शन में क्या समानताऐं हैं के बारे में। सन् 2013 में बुद्ध के अनुसार निर्वाण क्या है, चैत्य और बिहार में क्या अंतर है एवं जैन के सिद्धन्त पर प्रश्न पुछे गए। सन् 2014 में पूछे गए प्रश्न थे-बुद्ध के महापरिनिर्वाण के ऊपर चित्रकला, बुद्ध के इतिहास, परम्परा एवं संस्कृति जैसे- टेबो मोनेस्ट्री, लोहोटसाथा लखांग मंदिर एवं अलची मंदिर तथा बुद्ध से जुड़े राज्यों के बारे में पूछा गया। अंतिम प्रश्न 2015 में भी पूछा गया। सन् 2016 में बोधिसत्व पर प्रश्न पूछा गया। सन् 2017 में स्वतंत्रिक, समित्सय एवं सरवस्तीवादीन तथा बोधिसत्व पद्मपानी चित्राकला पर प्रश्न पूछे गए। ध्यान रहे यह अध्याय लोकसेवा परीक्षाओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

संभवत

  • प्रश्नों के पैटर्न में इस तरह का परिवर्तन पंथनिरपेक्ष इतिहास की अवधारणा से प्रेरित है। अतः इतिहास का अध्ययन कालक्रमानुसार और तुलनात्मक ढंग से करें। अगर आप ऐसा करते है, तो हमारा विश्वास है कि साठ प्रतिशत प्रश्नों को आप बिना किसी परेशानी के हल कर सकते है। शेष तथ्यपरक प्रश्नों को हल करने के लिए तो तथ्यों को याद करना ही पड़ेगा। इस अध्याय की प्रस्तुति में उपर्युक्त बातों का ध्यान रखा गया है।

भागवत और ब्राह्मण धर्म

  • पहले सिविल सर्विसेज प्रारम्भिक परीक्षा के लिए यह अध्याय उतना महत्वपूर्ण नहीं था। कभी-कभी तो इस अध्याय से कोई प्रश्न रहता ही नहीं था। लेकिन 1989 के बाद से इस अध्याय का महत्व बढ़ रहा है। वर्ष 1996 में पूछे गए प्रश्न थे - प्रारंभिक भागवत धर्म के कौन से प्रमुख लक्षण हैं?, किस ऐतिहासिक स्थल से पंचवृष्णि वीरों का उल्लेख करने वाला एक प्राचीन अभिलेख मिला है?, वर्ष 1997 में पूछ्रे गए प्रश्न थे- मेगास्थनीज द्वारा डायोनीसस एवं हेरेक्लीज के रूप में वर्णित दो भारतीय देवताओं की क्रमशः पहचान किससे की गयी है?, बेसनगर स्तंभ अभिलेख में किसे भागवत कहा गया है ? अधिकांश प्रश्न शैव और वैष्णव धर्म पर आधारित होते है। 
  • विभिन्न देवताओं के नाम, भिन्न-भिन्न पंथ, अलग-अलग काल में उनकी महत्ता, साहित्यिक कृतियों में देवताओं व पंथों की चर्चा, ईश्वर के विभिन्न अवतार, पंथों के संस्थापक, धर्मग्रंथों के उपदेश और पंथों के दर्शन से संबंधित प्रश्न पूछे जाते है। उपर्युक्त विभाजन को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारी करें।

मौर्य साम्राज्य

अभ्यर्थियों के लिए सुझावः जरूर पढ़ें - (भाग - 1), इतिहास, UPSC UPSC Notes | EduRev

मौर्य राजवंश

  • यह अध्याय सिविल सर्विसेज प्रारम्भिक परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। सामान्यतः इस अध्याय से प्रश्न पूछे जाते हैं पर विगत वर्षों में इस अध्याय से प्रश्न न के बराबर पूछे गये। पर आप इस अध्याय को छोड़ नहीं सकते। पिछले 37 वर्षों में पूछे गए प्रश्नों का आकलन करने पर हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि इस अध्याय से पूछे गए प्रश्नों का पैटर्न कमोवेश एक-जैसा है। हल्के-फुल्के परिवर्तनों, यथा - सुमेलित करने वाले प्रश्न, प्रमुख उद्धरण, तत्कालीन साहित्यों में परिलक्षित राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अतिरिक्त पैटर्न में एकरूपता दृष्टिगोचर होती है। हम पाते हैं कि अधिकतर प्रश्न अशोक के व्यक्तित्व और उपलब्धियों के इर्द-गिर्द केन्द्रित है। द्वितीय महत्वपूर्ण भाग है मेगास्थनीज का इंडिका और कौटिल्य का अर्थशास्त्र, अन्य महत्व के क्षेत्र है - अशोक के अभिलेख व शिलालेख, बौद्ध व जैन धर्मग्रंथ, पुराण, वास्तुशिल्पीय स्मारक और राजवंशीय इतिहास।
  • इस अध्याय से पूछे गए कुछ प्रश्न थेः सेल्युकस ने मेगास्थनिस को किसके राज दरबार में भेजा था? अशोक का अपना नाम किस अभिलेख में मिलता है?, आदि। इन चंद पन्नों में सारे तथ्यों को तो समाहित करना संभव नहीं है, लेकिन यथासंभव हमने अति महत्वपूर्ण एवं विशिष्ट तथ्यों को समाहित करने का प्रयास किया है। हालांकि इसे संकलित करने में इस अध्याय के लिए आवश्यक सभी प्रमुख पुस्तकों का सहारा लिया गया है, पर फिर  भी ऐसा नहीं कहा जा सकता कि यह अपने आप में परिपूर्ण है। आशा है, आपने प्राचीन भारतीय इतिहास की प्रामाणिक पुस्तकों का अध्ययन किया होगा। उसमें यहां दिए गए सूचनाओं का समावेश आपकी तैयारी को सफलता के स्तर पर लाएगा।

गुप्त-पूर्व एवं गुप्त काल में व्यापार और वाणिज्य

  • यह अध्याय बहुत छोटा है अगर निर्दिष्ट काल के सिर्फ व्यापार और वाणिज्य पर ध्यान केंद्रित करें। 1989 तक इस अध्याय से मात्रा एक-दो प्रश्न ही पूछे जाते थे। लेकिन 1990 से इस अध्याय के प्रश्नों की संख्या बढ़कर तीन-चार हो गई है। जब हम इस अध्याय का अध्ययन करते है, तो हिन्द-यवन, पार्थव, शक, कुषाण, सातवाहन, शुंग, कण्व, गुप्त आदि वंशों के सम्पूर्ण राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक स्थितियों का अध्ययन करते है। अध्ययन की सुविधा और निरंतरता के लिए भी यह आवश्यक है। इसके लिए गुप्त-पूर्व एवं गुप्त काल के सभी पहलुओं का दो बार सामान्य पठन पर्याप्त है। 
  • एक बार जब पूरे अध्याय का खांका तैयार हो जाए, तब पाठ्यक्रम में दिए गए प्रसंग पर ध्यान केन्द्रित करें। इस अध्याय से पूछे जाने वाले प्रश्न सिक्कों ;सोना, चांदी, सीसा आदिद्ध, वस्त्रा-निर्माण, सिल्क उद्योग, ऐशो-आराम के सामान, गिल्ड, रोमन-व्यापार, व्यापार मार्ग, आयात-निर्यात की वस्तुओं, भू-दान आदि पर आधारित होते है। अतः अपना ध्यान इन्हीं शीर्षकों पर केन्द्रित करें। विगत 5 वर्षों से इस काल के कला, कलाकृति, चित्राकला एवं व्यापार पर ज्यादा पूछे जा रहे हैं। सन् 2012 में नागर, दविड़ एवं बेसर कला के बारे में पूछा गया।

गुप्तोत्तर काल

अभ्यर्थियों के लिए सुझावः जरूर पढ़ें - (भाग - 1), इतिहास, UPSC UPSC Notes | EduRevगुप्तोत्तर काल का पतन

  • सिविल सर्विसेज प्रारम्भिक परीक्षा के लिए यह अध्याय बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही काल भारतीय इतिहास में सामन्तवाद के युग के रूप में जाना जाता है। इस अध्याय से प्रश्न पूछे जा सकते है जिन्हें हल करना बहुत मुश्किल होता है। कारण यह है कि इस अध्याय की तैयारी हम अलग से नहीं करते है। हर्षवर्धन  युग के राजनीतिक, आर्थिक और धार्मिक इतिहास की चर्चा पाठ्यक्रम में नहीं है, पर अक्सर इस पर आधारित प्रश्न पूछे जाते है। अतः बुधिमानी इसी में है कि हम हर्षवर्धन  की उपलब्धियों का भी अध्ययन करें। भारत में सामन्तवाद का उद्भव भारतीय समाज के गर्भ से ही हुआ, हुआ, अतः इसकी उत्पत्ति भी कालान्तर में भारतीय जनता के क्रमिक विकास से जुड़ी हुई है। 
  • इसका राजनीतिक तत्व जहां भूमि पर आधारित तत्कालीन प्रशासनिक व्यवस्था में निहित है, वहीं आर्थिक संरचना समाज में व्याप्त कृषि दासता की प्रथा में। भारत में सामन्तवाद का अभिप्राय दस्तकारों व शिल्पियों का देहातीकरण और परम्परागत भारतीय ग्रामीण समुदाय का आविर्भाव है। 

अतः तैयारी के दौरान हमें अपना ध्यान निम्नलिखित बातों पर केन्द्रित करना चाहिए

  • भूमि अनुदान, जैसे-
    (i) युवराज और शाही परिवार के सदस्यों को,
    (ii) सैनिक और असैनिक अधिकारियों को उनके सेवा के पुरस्कारस्वरूप,
    (iii) पुजारियों तथा मंदिरों को,
    (iv) जागीरदारों को सेना आपूर्ति की शर्त पर,
    (v) साम्राज्य के मातहत राज्यों को, आदि
  • कृषकों का स्थानांतरण
  • बेगार का विस्तार
  • मुद्राओं की अल्पता
  • राजकोषीय व अपराधिक प्रबन्ध का परित्याग और सामन्तों के दायित्वों में वृद्धि और अंततः
  • कृषि उत्पाद और करारोपण।
    इस अध्याय के प्रस्तुतीकरण में उपर्युक्त बातों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

प्राचीन भारत की सामाजिक संरचना में परिवर्तन

  • समाज को जिस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और जैसी जरूरतों को पूरा करना होता है, उसी के अनुरूप इसमें परिवर्तन होता रहता है। प्राचीन भारतीय सामाजिक संरचना में हुए ढेर सारे परिवर्तन भी इन्हीं परिस्थितियों के परिणाम थे। ये परिवर्तन मुख्यतः जाति प्रथा, विवाह और नारियों की स्थिति से संबंधित थे। प्राचीन भारत की सामाजिक संरचना में हुए परिवर्तनों की निश्चित रूपरेखा और इससे संबंधित युगांतकारी घटनाओं को रेखांकित करना आसान नहीं है क्योंकि सामाजिक परिवर्तन राजनीतिक परिवर्तनों की तरह कालक्रमानुसार सम्बंद्ध  नहीं थे। 
  • तथापि प्राचीन भारत की सामाजिक संरचना में हुए परिवर्तनों की कुछ सुस्पष्ट अवस्थाएँ इस प्रकार है - ऋग्वेदिक से उत्तर-वैदिक और धर्मसूत्र काल से बौद्ध, मौर्य, मौर्योत्तर, कुषाण और गुप्त काल। प्राचीन भारत का कोई प्रामाणिक सामाजिक इतिवृत्त उपलब्ध नहीं है, अतः इसके लिए सूचनाओं का मुख्यस्रोत तत्कालीन धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष साहित्य ही है।
  • इस अध्याय से आप हर वर्ष प्रश्नों की अपेक्षा कर सकते है। चूंकि इस अध्याय से आप हर वर्ष प्रश्नों की अपेक्षा कर सकते है। चूंकि प्रश्न सामान्यतः विभिन्न अवस्थाओं में जाति प्रथा, विवाह और नारी की स्थिति से संबंधित होते है, अतः हम इन्हीं प्रसंगों पर अपना ध्यान केन्द्रित करेंगे। इसके अतिरिक्त आवश्यकता अनुरूप अन्य प्रसंगों, यथा सामाजिक संस्थाएं, श्रमिकों की स्थिति, आश्रम व्यवस्था आदि की भी चर्चा की गई है।
Offer running on EduRev: Apply code STAYHOME200 to get INR 200 off on our premium plan EduRev Infinity!

Related Searches

UPSC UPSC Notes | EduRev

,

अभ्यर्थियों के लिए सुझावः जरूर पढ़ें - (भाग - 1)

,

अभ्यर्थियों के लिए सुझावः जरूर पढ़ें - (भाग - 1)

,

study material

,

Summary

,

video lectures

,

Extra Questions

,

Previous Year Questions with Solutions

,

Sample Paper

,

इतिहास

,

Important questions

,

mock tests for examination

,

इतिहास

,

practice quizzes

,

past year papers

,

Exam

,

MCQs

,

Viva Questions

,

shortcuts and tricks

,

Free

,

Objective type Questions

,

pdf

,

UPSC UPSC Notes | EduRev

,

ppt

,

अभ्यर्थियों के लिए सुझावः जरूर पढ़ें - (भाग - 1)

,

Semester Notes

,

UPSC UPSC Notes | EduRev

,

इतिहास

;