अभ्यर्थियों के लिए सुझावः जरूर पढ़ें - (भाग - 3), इतिहास, UPSC UPSC Notes | EduRev

इतिहास (History) for UPSC (Civil Services) Prelims in Hindi

UPSC : अभ्यर्थियों के लिए सुझावः जरूर पढ़ें - (भाग - 3), इतिहास, UPSC UPSC Notes | EduRev

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आधुनिक

मुगल साम्राज्य का पतन एवं स्वतंत्रा राज्यों का उदय

  • मुगल साम्राज्य का पतन न तो आकस्मिक था और नहीं आश्चर्यजनक। मुगल साम्राज्य के संगठन में ही अंतर्निहित ढेर सारे दुर्गुणों के कारण इसका पतन और विघटन हुआ जो शासक और शासितों दोनों के घोर व्यथा का कारण बना। 1707 ई में औरंगजेब की मृत्यु के कुछ ही समय के अंदर मुगल साम्राज्य रूपी आलीशान इमारत चूर-चूर हो गया तथा केन्द्रीय सत्ता और प्रदेशों के बीच विद्यमान जीवंत बंधन विलुप्त हो गया। जब एकता का प्रतीक केन्द्रीय सत्ता ही मृतप्राय हो गई तो उसके अवयवों का छिन्न-भिन्न होना स्वाभाविक ही था। 
  • जो प्रांत जितनी दूर थे, वे उतनी जल्दी या तो अपनी स्वतंत्रा सत्ता स्थापित कर लिए या विदेशी अपनी स्वतंत्रा सत्ता स्थापित कर लिए या विदेशी शक्तियों द्वारा जीत लिए गए। विघटन के इसी दौर में अंग्रेजों ने अधिकांश महत्वपूर्ण जागीर हासिल की।
  • इस शीर्षक का पहला भाग, यानि ‘मुगल साम्राज्य का पतन’, दूसरे भाग, यानि ‘स्वतंत्रा राज्यों का उदय’ से कम महत्वपूर्ण है। पहले भाग की अपेक्षा दूसरे भाग से ज्यादा प्रश्न पूछे जाते है। कभी-कभी इस अध्याय से कोई भी प्रश्न नहीं पूछा जाता है। पहले भाग से सामान्यतः सैयद बंधुओं, उत्तर-मुगलों के कालक्रम, मुगलों और अंग्रेजों के संबंध, फर्रुखसियार का शासनकाल, शक्तिशाली सरदारों, नादिर शाह आदि के बारे में प्रश्न पूछे जाते है। द्वितीय भाग में पंजाब और अवध से प्रश्न पूछे जाते है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण रणजीत सिंह, उनका प्रशासन और अंग्रेजों के साथ उनका संबंध है। 
  • दूसरा स्थान सादत जंग और सफदरजंग का है। तीसरे स्थान पर टीपू सुल्तान है। किसी भी महान व्यक्तित्व से संबंधित कोई भी विशिष्टता प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण है। ध्यान रहे कि कोई भी व्यक्ति जिसके कार्यों से आम जनता को लाभ पहुंचा , वह परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उससे संबंधित आवश्यक जानकारी जरूर याद रखें।

ईस्ट इंडिया कंपनी व बंगाल के नवाब

  • कई कारणों से यह अध्याय बहुत महत्वपूर्ण है। भारत में ब्रिटिश राजनीतिक प्रभाव की शुरुआत तो 1757 के पलासी के युद्ध  के समय से ही देखी जा सकती है जब अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी के सैनिकों ने बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला को पराजित किया था। दो दशक से भी कम में बंगाल की वास्तविक सत्ता बंगाल के नवाबों के हाथों से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के पास चली गई और भारत का यह समृद्ध(तम और औद्योगिक रूप से सर्वाधिक विकसित प्रांत भयानक गरीबी और बदहाली की दशा में तब्दील हो गया। अकाल और महामारी ने इस दशा को और बदतर कर दिया। बंगाल पर आधिपत्य ने भारत में ब्रिटिश उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद के सारे दरवाजे खोल दिए। नतीजतन देश की समृद्ध अर्थव्यवस्था औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था में तब्दील हो गई।
  • सामान्यतः इस अध्याय से प्रायः प्रश्न पूछे जाते है। वर्ष 1987 से  अब तक पूछे गए प्रश्न हैं - बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी की मांग किसने की?, बंगाल में द्वैध शासन का काल क्या था?, 1757 से पूर्व बंगाल के नवाब की राजधानी  कहां थी?, किस अधिनियम के द्वारा अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी के आर्थिक एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया?, बंगाल के गवर्नर जनरल का चुनाव कौन करता था?, बंगाल के को समाप्त कर दिया गया?, बंगाल के गवर्नर जनरल का चुनाव कौन करता था?, बंगाल के किस नवाब ने बरगी छापामारों का सामना किया?, अपने साम्राज्य विस्तार के प्रारंभिक चरणों में अंग्रेजों द्वारा शुरू की गई दस्तक प्रथा किससे संबंधित थी?, अधिकारियो द्वारा उपहार ग्रहण करने के विषय में इतिहासकारों में कटु निंदा की प्रवृत्ति रही है। 
  • इस बात से बिल्कुल इंकार नहीं किया जा सकता कि अधिकारियों को अपने कर्मचारियों के अलावा अन्य किसी से उपहार ग्रहण नहीं करना चाहिए, यह कथन किसका है?, 1770 में बंगाल में आए अकाल के लिए क्या जिम्मेदार था?, सिराजउद्दौला द्वारा 1756 में अपने अधिकार में करने के बाद किस नगर का नाम बदलकर अलीनगर कर दिया गया?, बंगाल में ईस्ट इंडिया कम्पनी के अधिकारियों द्वारा दस्तकों के दुरुपयोग करने से किससे उसके संबंध बिगड़ गए?, ईस्ट इंडिया कंपनी सरकार ने भारत से रकम भेजने की समस्या आरंभ में कैसे सुलझाई? क्लाइव इस अध्याय का केन्द्र-बिन्दु है। अतः क्लाइव से संबंधित जानकारी का संकलन और अध्ययन आवश्यक है।

अर्थव्यवस्था पर ब्रिटिश शासन का प्रभाव

  • यूरोपियों के आगमन से पूर्व भारत विश्व के औद्योगिक कार्यालय के रूप उभर चुका था। प्रधानतः कृषि अर्थव्यवस्था के बावजूद भारत में कई अन्य उद्योगों का भी विकास हुआ। विख्यात उपन्यास ‘राॅबिन्सन क्रुसो’ के लेखक डिपफो ने उलाहना भरे लहजे में लिखा है कि भारतीय वस्त्रा हमारे घरों, शयनकक्षों, अतिथिगृहों में छा गए है और परदे, बिछावन, हमारे वस्त्र आदि भारतीय मलमल व अन्य भारतीय कपड़ों के ही बने हुए है। भारत पर विदेशी आधिपत्य के साथ ही भारत की समृद्ध अर्थव्यवस्था औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था में परिणत होने लगी। 
  • इंग्लैंड में भारतीय वस्तुओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए वहां के उत्पादनकत्र्ता सरकार पर दबाव डालने लगे। 1720 तक आते-आते भारतीय सूती वस्त्रा के उपयोग पर रोक लगाने हेतु कई कानून बनाए गए। अठारहवीं शताब्दी के अंत तक भारत के बहुत बड़े भाग पर अंग्रेजों का शासन कायम हो चुका था। ब्रिटेन ने भारत को अपना उपनिवेश बना लिया और तब इसका विकास साम्राज्यिक हित में ही होना था। भारत का इस्तेमाल ब्रिटिश उत्पादन के बाजार और ब्रिटेन के उद्योग तथा जनता के लिए कच्चे माल व खाद्य सामग्री के निर्यातक के रूप में होने लगा। 
  • इसका परिणाम यह हुआ कि निर्माता के रूप में होने लगा। इसका परिणाम यह हुआ कि आर्थिक विकास अवरुद्ध हो गया और अर्थव्यवस्था में निष्क्रियता आ गई। क्रूर व निरंकुश शासकों के काल में भी फलने-फूलने वाला यह देश विनाश की ओर बढ़ने लगा। देश की एक तिहाई पूंजी अंग्रेज ले जाने लगे। धन का यह बहिर्गमन ही सभी बुराइयों की जड़ तथा निर्धनता का मुख्य कारण था।

1857 का विद्रोह एवं अन्य आंदोलन

  • 1857 का विद्रोह भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के लिए सर्वाधिक विकट चुनौती था। यह महज अनुमान का विषय है कि अगर यह विद्रोह सपफल हो जाता तो इतिहास का स्वरूप क्या होता। सिपाहियों की सीमाओं और कमजोरियों के बावजूद देश को विदेशी दासता से मुक्त कराने का उनका प्रयास देशभक्तिपूर्ण और प्रगतिशील कदम था। असपफल होने पर भी इसने महान उद्देश्यों की पूर्ति की - इसने राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन के प्रेरणा स्रोत का काम किया जिससे उस उद्देश्य की प्राप्ति हो सकी जिसको पाने में 1857 का विद्रोह असपफल हो गया।
  • अतः यह अध्याय अपने आप में अनोखा है। हम देखते है कि 1990 से पूर्व इस अध्याय से कम प्रश्न ही पूछे जाते थे। लेकिन 1990 से इस अध्याय के प्रश्नों की संख्या में वृद्धि हो गई है। 1990 से अब तक पूछे गए प्रश्न हैंः सर्वप्रथम किसने 1857 के विद्रोह को भारत का प्रथम स्वतंत्राता संग्राम कहा?, 1857 के विद्रोह का केन्द्र था?, 1855-56 का संथाल विद्रोह किससे विरुद्ध हुआ था?, कुछ स्थानों पर 1857 का विद्रोह शुरू हुआ था
    (i) लखनऊ,
    (ii) कानपुर,
    (iii) बैरकपुर,
    (iv) दिल्ली
  • इन स्थानों को विद्रोह के भड़कने के कालक्रम में सजाएं। निम्नलिखित में से कौन 1857 के विद्रोह का परिणाम नहीं था?, अंग्रेजों के विरुद्ध कुका आंदोलन का नेता कौन था?, निम्नलिखित को कालक्रमानुसार सजाएं: बिरसा मुंडा, सिधु, अजीमुल्ला खान, जीतु मीर। निम्नलिखित घटनाओ का क्रम क्या है?,
    (i) अवध का विलय,
    (ii) पेशवा के पेंशन का अंत,
    (iii) झांसी की रानी को पेंशन।
  • निम्नलिखित विद्रोहों को कालक्रमानुसार सजाएं - काचा नागा, मुंडा, थादोर। बहादुर शाह II के कौन पुत्रा और पौत्रा थे जो 1857 के विद्रोह में प्रमुख भूमिका निभाकर बंदी हुए और गोली से मार दिए गए? उलगुलन के रूप में ज्ञात ब्रिटिश के प्रति जनजातीय विद्रोह किसने संगठित किया था?
  • आजकल पूछे जाने वाले प्रश्नों में निम्नलिखित प्रकार के प्रश्नों की अधिकता रहती है - सुमेलित करने वाले प्रश्न, कालक्रम में सजाने वाले  प्रश्न, कथनों के सही या गलत होने पर आधारित प्रश्न आदि। इन प्रश्नों को हल करने के लिए विद्रोह के कारणों, घटनाक्रमों; कालक्रमानुसारद्ध, संबंधित महान व्यक्तियों व उनके कार्यों तथा प्रमुख चिंतकों के बारे में सूक्ष्मतम जानकारी आवश्यक है। यह अध्याय अपने आप में पूर्ण नहीं है। इसका अध्ययन शुरू करने से पूर्व एन. सी. ई. आर. टी. की पुस्तक और विपिन चन्द्र लिखित ‘स्वतंत्राता संग्राम’ को जरूर पढ़ें।

सामाजिक एवं सांस्कृतिक जागरण

  • राजा राम मोहन राय और उनके द्वारा 1828 में संस्थापित ब्रह्म समाज के प्रयास से शुरू हुए सुधार की लहर पूरे भारतवर्ष में पफैल गई। सामाजिक-धार्मिक आंदोलन द्वारा निरूपित सांस्कृतिक-वैचारिक संघर्ष उभरती राष्ट्रीय चेतना का अभिन्न अंग था। ऐसा इसलिए क्योंकि यह आरंभिक बौद्धिक और सांस्कृतिक जागरण में सहायक हुआ जिसके फलस्वरूप भविष्य के प्रति नया दृष्टिकोण लाना संभव हो सका। दूसरे, यह औपनिवेशिक, सांस्कृतिक और वैचारिक आधिपत्य के विरुद्ध संघर्ष का हिस्सा था। इसी दोहरे संघर्ष के परिणामस्वरूप आधुनिक सांस्कृतिक स्थिति का विकास हुआ।
  • सन 2011 में एक प्रश्न आदिवासी आन्दोलन पर था, 2012 में एक प्रश्न ब्रह्म समाज पर था, 2013 में ते-भागा कृषक आन्दोलन पर था, और 2016 में केशव चन्द्र सेन और उनसे जुड़े कमिटी के बारे में पूछा गया। सन् 2017 में इस अध्याय से कोई भी प्रश्न नहीं पूछा गया।
  • इस शीर्षक से सामान्यतः एक-दो प्रश्न पूछे जाते है। प्रश्न सरल और सीधे होते है। 1980 से अब तक प्रश्नों के पैटर्न में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं हुआ है। लेकिन एक परिवर्तन सुस्पष्ट है और वह है इस शीर्षक का दूसरा भाग। सामाजिक-सांस्कृतिक आंदोलन की अपेक्षा निम्न जाति, श्रमिक संघ और किसान आंदोलन की महत्ता बढ़ी है। 
  • यहां तक कि उदयपुर महाराणा के खिलाफ किसान आंदोलन जैसा अल्प महत्व का आंदोलन भी प्रश्न-पत्र में देखा जा सकता है। अतः सामान्य जन से संबंधित इतिहास भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस शीर्षक के प्रथम भाग की अपेक्षा द्वितीय भाग की तैयारी ज्यादा ध्यान से करें। विपिन चन्द्र की पुस्तक ‘स्वतंत्राता संग्राम’ में द्वितीय भाग की चर्चा विस्तार से की गई है। अपनी जरूरत के अनुसार उस पुस्तक का उपयोग कर सकते है।

स्‍वतंत्रता संग्राम

  • भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन दरअसल में उपनिवेशवाद और भारतीय जनता के हितों के विरोधाभास का परिणाम था। यह आंदोलन की वैज्ञानिक उपनिवेश विरोधी विचारधारा ही थी जो इसके साम्राज्यवादी विरोधी संघर्ष में मुख्य प्रवर्तक बनी। कुछ अन्य वैचारिक तत्वों ने भी मिलकर भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के बृहत् सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक दर्शन का विकास किया - ये थे बुर्जुआ या पूंजीवाद से भिन्न आर्थिक विकास और धर्मनिरपेक्ष, गणतांत्रिक, प्रजातांत्रिक, असैनिक राजनीतिक व्यवस्था, जिसमें आर्थिक और राजनीतिक दोनों व्यवस्थाएं सामाजिक समानता के सिंद्धांत  पर आधारित होती। प्रजातंत्रा के लिए लड़ना और इसको जनमानस में बैठाना राष्ट्रीय आंदोलन का शेष कार्य था।
  • सिविल सर्विसेज के लिए यह अध्याय सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। सामान्यतया इससे 6-7 प्रश्न पूछे जाते है। लेकिन सीधे प्रश्न 1-2 ही पूछे जाते है। प्रश्नों को जटिल बनाने के लिए सही विकल्पों के साथ सही प्रतीत होने वाला गलत विकल्प भी दिया रहता है। आपको इस गलत विकल्प को चुनना होगा। कुछ बहु-विकल्प ऐसे होते है जिनमें से दो या तीन सही होते है। सही विकल्प चुनने में बहुत सावधानी बरतनी होगी।

विगत वर्षों के कुछ प्रश्न थे

  • भारत में सिविल सर्विसेज की शुरूआत किसने की?, बक्सर के युद्ध का कमान्डर कौन था?, यूनाइटेड इण्डिया पेट्रिओडिक एसोसिशियेसन का अध्यक्ष कौन था? 1920 में आल इण्डिया ट्रेड यूनियन का अध्यक्ष कौन था, एम.एन.राय का कम्युनिस्ट पत्रिका कौन-सा है?, 1946 में बनी सरकार के लियाकत अली खान से कौनसा विभाग दिया गया?
  • सन् 2011 से प्रश्नों का पैटर्न में परिवर्तन आया है। 2011 में पूछे गए प्रश्न थेः ‘अन्टु दिस लास्ट’ पुस्तक ने महात्मा गांधी के जीवन को पूर्णतया परिवर्तित कर दिया। इस पुस्तक से उन्हें क्या शिक्षा मिला? ,ऊषा मेहता प्रसिद्ध थी किस कारण से नेहरू रिपोर्ट में कौनसी बिन्दु पर चर्चा हुआ एक प्रश्न भारत छोड़ो आन्दोलन पर और एक प्रश्न खेड़ा सत्यागह पर था। 
  • 2012 में प्रश्न थे, रॉलेट एक्ट का उद्देश्य क्या था? कांग्रेस के 1929 लाहोर अधिवेशन पर एक प्रश्न था, कांग्रेस मंत्रियों ने 1939 में सात प्रदेशों में क्यों इस्तीपफा दे दिया?, गर्वनमेन्ट एक्ट 1919 की मुख्य बातें क्या थी?, बी.आर. अम्बेडकर में कौन सी पार्टियाँ बनायी थी?, और एक प्रश्न गांधीजी के 1932 के पफास्ट आन टू डेथ पर था। 2013 में पूछे गए प्रश्न थेः साइमन कमीशन का विरोध क्यों हुआ?, भारत छोड़ों आन्दोलन का पफैसला क्यों लिया गया?, एक प्रश्न ऐनी बेसेंट एवं उनकी गतिविधियों पर था।
  • सन 2014 में प्रश्न थेः कर्जन द्वारा किया गया बंगाल विभाजन कब समाप्त हुआ?, 1929 का एक कांग्रेस अधिवेशन क्यों महत्वपूर्ण कमीशन का विरोध क्यों हुआ?, भारत छोड़ों आन्दोलन का फैसला क्यों लिया गया?, एक प्रश्न ऐनी बेसेंट एवं उनकी गतिविधियों पर था। सन 2014 में प्रश्न थेः कर्जन द्वारा किया गया बंगाल विभाजन कब समाप्त हुआ?, 1929 का एक कांग्रेस अधिवेशन क्यों महत्वपूर्ण थी?, गदर क्या था?, आदि। सन् 2015 में पूछे गए प्रश्न थेः सन् 1919 का एक्ट क्या प्रतिपादित करता है?, प्रथम महिला एवं प्रथम मुसलमान कांग्रेस अध्यक्ष कौन थे? 1907 के कांग्रेस का विभाजन क्यों हुआ?, एक प्रश्न राॅलेट एक्ट पर भी था।
  • सन् 2016 में पूछे गए प्रश्न थेः पहली बार ‘स्वदेशी’ और ‘वायकाॅट’ को आन्दोलन के रूप में अपनाया गया?, मान्टेग-चेम्पसपफोर्ड रिपफार्म सम्बन्धित थे, क्रिप्स मिशन क्या चाहता था आदि। सन् 2017 में पूछे गए प्रश्न थेः बटलर कमीशन 1927 का क्या उद्देश्य था?, एक प्रश्न राधा-कान्त देव, जी.एल.चैटरी, एस.एन.बनर्जी एवं उनके संगठन पर आधारित था, द्वेध-शासन क्या था?, एक प्रश्न राॅयल इण्डियन नेवी का विद्रोह, भारत छोड़ों आन्दोलन और द्वितीय गोलमेज सम्मेलन के कालक्रम पर आधारित था।
  • इस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए अध्याय के सिपर्फ वस्तुनिष्ठ तथ्यों की जानकारी पर्याप्त नहीं है। आजकल कालक्रम पर आधारित और सुमेलित करने वाले प्रश्नों की संख्या भी बहुत रहती है। अतः तैयारी के दौरान कुछ भी नहीं छोड़ना चाहिए, या यूं कहिए कि चयनात्मक ढंग की तैयारी प्रारंभिक परीक्षा हेतु उपयुक्त नहीं होगी। इस अध्याय की विस्तृत तैयारी आवश्यक है और उसके लिए स्तरीय पुस्तकों का अध्ययन जरूरी है।

 अंत में आपको निम्न तथ्य भी अलग से पढ़ना है क्योंकि इनसे भी प्रश्न हर साल पूछे जाते हैं। इस पर सामग्री पुस्तक के अंत में दी गई है।

  • संवैधानिक विकास
  • प्रमुख संस्थाओं एवं संस्थापक
  • गवर्नर जनरल एवं वायसराय
  • आधुनिक भारत के प्रमुख युद्ध
  • महत्वपूर्ण संधियाँ
  • कांग्रेस अधिवेशन
  • आधुनिक भारत में शिक्षा का विकास
  • प्रशासनिक विकास
  • आदिवासी, गैर-आदिवासी एवं कृषक आन्दोलन
  • सार्वजनिक कार्य
  • स्वतंत्रता आन्दोलन से सम्बन्धित प्रमुख व्यक्ति, उसे सम्बन्धित प्रमुख घटनाएं तथा नारे
  • ब्रिटिशकालीन समितियाँ एवं आयोग
  • आधुनिक भारत के प्रसिद्ध व्यक्ति
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