कृषि - भारतीय भूगोल UPSC Notes | EduRev

भूगोल (Geography) for UPSC Prelims in Hindi

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UPSC : कृषि - भारतीय भूगोल UPSC Notes | EduRev

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कृषि

  •  चूंकि भारत उष्ण एवं समशीतोष्ण दोनों कटिबंधों में स्थित है, अतः यहां एक ओर तो चावल, गन्ना, तम्बाकू जैसी उष्ण जलवायु वाली फसलों की कृषि की जाती है और दूसरी ओर कपास, गेहूं जैसी समशीतोष्ण जलवायु की फसलें पैदा की जाती है । 
  •  भौतिक संरचना, जलवायविक एवं मृदा संबंधी विभिन्नाताएं ऐसे कारक है जो अनेक प्रकार की फसलों की कृषि को प्रोत्साहित करते है ।
  • 1950.51 में कृषि क्षेत्र राष्ट्रीय आय में 57% योगदान करता था जो निश्चित रूप से देश की अर्थव्यवस्था की कृषि पर निर्भरता को स्पष्ट करता है।
  • जैसे-जैसे आर्थिक विकाहोता जाता है, वैसे-वैसे राष्ट्रीय आय में कृषि की भागीदारी अन्य कार्यों की तुलना में घटती जाती है, जैसे - राष्ट्रीय आय में कृषि का योगदान सं. रा. अमेरिका में 3% ब्रिटेन में 2ःए कनाडा में 4% आस्ट्रेलिया में 5% ही है।
  • विश्व की लगभग 50ः जनसंख्या कृषि में संलग्न है लेकिन जनसंख्या का कृषि में प्रतिशत प्रत्येक देश के अनुसार पृथक-पृथक है। न्यासालै.ड की 92% सूडान की 87% टर्की की 70%, चीन की 70% भारत की 70%जापान की 36% फ्रांकी 20% पश्चिमी जर्मनी की 19%, संयुक्त राज्य अमेरिका की 9% और ग्रेट ब्रिटेन की 6% जनसंख्या कृषि कार्य में लगी है। 
  • कृषि जनसंख्या का अधिकांश भाग विकासशील और अविकसित देशों में ही पाया जाता है।
  • 60% कृषि क्षेत्र वर्षा पर निर्भर है।
  • भारत में सर्वाधिक गन्ना उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है इसलिए इप्रदेश को देश का गन्ना गोदाम भी कहते हैं।
  • भारत में प्रति हेक्टेयर उर्वरकों (न. फाॅ. पो. तत्वों) का प्रयोग 84 किग्रा तक प्रति हेक्टेयर पहुंच गया है। जबकि उर्वरकों के प्रयोग में अधिकतम (180 किग्रा न. फाॅ. पो. किग्रा/हेक्टेयर) उपयेाग प्रति हेक्टेयर पंजाब का है।
  • उर्वरकों के प्रयोग से भी भारत में कृषि उत्पादन बढ़ा और अब भारत विश्व में चीन और अमेरिका के बाद तीसरा राष्ट्र है, जो उर्वरकों का अधिक प्रयोग करता है।
  • हमारे देश में पंजाब, हरियाणा, उ.प्र. ही कुल उर्वरकों का एक तिहाई भाग उपयोग करते हैं।
  • भारत में नहरों के निर्माण से भी कृषि विकामें एक चमत्कारी मोड़ आया है। सिंचित कृषि (33%) से शुष्क क्षेत्र की अपेक्षा 55 प्रतिशत अधिक उत्पादन होता है।
  • कृषि के अन्तर्गत कुल उत्पादन में उद्यान फसलों का एक बड़ा भाग है और इसके निर्यात पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है
  • भारत से सेब, अंगूर, आम, केला आदि का निर्यात किया जा रहा है। कुल उद्यान क्षेत्रफल में आधे से अधिक पर आम की खेती की जाती है और भारत ने सब्जी के क्षेत्र में अधिक उपज देने वाली किस्मों का विकास कर लिया है तथा पुष्प विज्ञान भी विदेशी मुद्रा प्राप्त करने का एक अच्छा स्रोत है।
  • कट फ्लावर्स की बढ़ती मांग को आज पूरा करना असम्भव है। भारत से निर्यात किए जाने वाले फूलों में गुलाब का प्रथम स्थान है और विश्व में फूलों के उत्पादन में नीदरलैण्ड का प्रथम स्थान है।
  • भारत में आज कृषि खाद्यान्न उत्पादन में आशातीत वृद्धि, दुग्ध उत्पादन में प्रथम स्थान, सब्जी के उत्पादन में भी प्रथम स्थान, फल उत्पादन में द्वितीय स्थान, मत्स्य उत्पादन में सातवां स्थान, तिलहन में प्रथम स्थान, चाय में प्रथम स्थान, विश्व में भारत का प्रथम स्थान है। राई - सरसों के उत्पादन एवं उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
बीजोपचार में प्रयोग होने वाली दवाइयाँ
 पफसल                            दवा का नाम

 1. गेहूँ                             आर्गेनो मरक्यूरियल (1%)        
                                      वीटावेक्स या वाविस्टिन
 2. धान                            सेरेसान (25%)              
                                       आर्गेनोमरक्यूरियल (1%) 
 3. बाजरा                         थीरेम या कैप्टान (75%) 
                                       धूल नमक का घोल (5%) 
 4. कपास                          कैप्टान, थीरेम
 5. आलू                            बाविस्टिन
 6. गन्ना                           एगैलाल, एरेटान

 


फसलों का प्रतिरूप 

  • देश के कुल कृषि क्षेत्र के लगभग तीन चैथाई भाग पर खाद्य फसलें उपजाई जाती है । इन खाद्य फसलों में चावल, गेहूँ, मक्का, मोटे अनाज, दाल, सब्जी, फल आदि शामिल है ।
  • खाद्य फसलों में भी अनाजों के अधीन क्षेत्रफल की अधिकता है। खाद्यान्नों के अधीन भूमि के लगभग 80ः भाग पर अनाज उपजाये जाते है ।

हरित क्रांति

  • तृतीय पंचवर्षीय योजना तक भारतीय अर्थव्यवस्था को जिन गम्भीर आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ा, उन्हीं के समाधान हेतु साठ के दशक के उत्तरार्ध में भारत में हरित क्रांति लाने का जोर शोर से प्रयाकिया गया। फलस्वरूप 1960 और 1970 के दशक के दौरान भारत में एक कृषि क्रान्ति हुई।
  • मेक्सिको में राॅकफेलर फाउ.डेशन के विशेषज्ञों ने, जिनमें नार्मन बारलाॅग सर्वप्रसिद्ध थे, गेहूँ की उपज बढ़ाने हेतु अनेक उन्नत किस्मों का विकाकिया। उन्होंने कृषि उपज में वृद्धि हेतु अधिक उपज देने वाले बीजों (High Yielding Seeds)  तथा उर्वरकों को सर्वप्रमुख स्थान दिया।
  • द्वितीय पंचवर्षीय योजना के उत्तरार्द्ध में भारत सरकार ने फोर्ड फाउंडेशन के विशेषज्ञों के एक दल को भारत में कृषि उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि के उपाय ढूँढ़ने हेतु आमंत्रित किया। इविशेषज्ञ दल में ”भारत की खाद्य समस्या और इसके समाधान के उपाय“ (Indias Food Crisis and Steps to Meet It)  जव डममज प्जद्ध के नाम से अपनी रिपोर्ट अप्रैल, 1959 में प्रस्तुत की।
  • इसमिति की संस्तुति के आधार पर भारत सरकार ने देश के सात जिलों में 1960 में गहन क्षेत्र विकाकार्यक्रम चलाया। ये सात जिले थे - पश्चिमी गोदावरी (आंध्र प्रदेश), शाहाबाद (बिहार), रायपुर (मध्य प्रदेश), तंजावुर (तमिलनाडु), लुधियाना (पंजाब), अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) तथा पाली (राजस्थान)। इनमें से प्रथम चार चावल, अगले दो गेहूँ तथा अंतिम ज्वार-बाजरा के लिए था।
  • इकार्यक्रम की सफलता से उत्साहित होकर सरकार ने अक्टूबर, 1965 में इसे और विस्तृत करके 114 जिलों में चलाया और इसे गहन कृषि क्षेत्र कार्यक्रम (Intensive Area Development Programme—IADP) नाम दिया गया।
  • वास्तव में उन्नत किस्म वाले बीजों का कार्यक्रम सिर्फ पाँच फसलों-गेहूँ, चावल, ज्वार, बाजरा तथा मक्का पर ही लागू किया गया था अर्थात् अखाद्यान्न फसलों (Nonfood grains) के उत्पादन में वृद्धि पर अधिक ध्यान नहीं दिया गया था। खाद्यान्नों में गेहूँ के मामले में सर्वाधिक उत्साहजनक परिणाम सामने आये है ।
  • चावल के उत्पादन में यद्यपि उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, परन्तु गेहूँ की तुलना में इसे उत्साहजनक नहीं माना जा सकता। चावल पर हरित क्रान्ति का प्रभाव प्रारम्भ में बहुत ज्यादा नहीं पड़ सका था, परन्तु 1973-74 के पश्चात् इसमें तीव्र वृद्धि हुई।
  • मोटे अनाजों के मामले में विशेष सफलता नहीं हासिल हो सकी है। एक तो इनके अधीन क्षेत्रफल में भी कमी आई है, वहीं इनकी प्रति हेक्टेयर उपज में भी बहुत अधिक वृद्धि नहीं हो सकी है।
  • हरित क्रांति का सबसे कमजोर पक्ष दाल तथा अन्य वाणिज्यिक फसलें थीं। दालों के कुल उत्पादन में नग.य वृद्धि हुई है।
  • तिलहनों के क्षेत्र में हरित क्रान्ति कोई प्रभाव नहीं दर्शाती। भारत में तिलहनों के अन्तर्गत नौ फसलों को उगाया जाता है - मूँगफली, तोरियां व सरसों, सूरजमुखी, तिल, सोयाबीन, अर.डी, नाइजर, अलसी और कुसुम्ब।

 

खाद

  • नाइट्रोजन उर्वरक: अमोनियम सल्फेट (2- 6%), अमोनिया द्रव्य (20.25%), अमोनिया गैस (%), कैल्सियम नाइट्रेट (11-15%), सोडियम नाइट्रेट (16%), अमोनिया नाइट्रेट (33.34%), कैल्सियम अमोनियम नाइट्रेट (25%), यूरिया (46%)।
  • फास्फोरस युक्त उर्वरक: फ्यूज कैल्सियम मेटा फाॅस्फोट (16%), सुपर फाॅस्फेट सिंगल (16%), डबल सुपर फाॅस्फेट (32- 35ः), ट्रिपल सुपर फाॅस्फेट (46.48%), डाई कैल्सियम फाॅस्फेट (34 - 39%), हाइपर फाॅस्फेट (36%), राॅक फास्फेट (20 - 36%)।
  • पोटाश युक्त उर्वरक: म्यूरेट आॅफ पोटाश या पोटेशियम क्लोराइट (60.62%), के 50 (12-16%), काइनाइट (44%), के-50 (12-16%), काइनाइट (44%), पोटेशियम नाइट्रेट (12 -16%), पोटेशियम सल्फेट (48.52%)।
  • मिश्रित उर्वरक: मोनो अमोनियम फाॅस्फेट (N - 11), नाइट्रोफाॅस्फेट  (N - 11, P 15) कम्पाउन्ड ग्रेनेड फर्टिलाइजर (18,10,18), अमोनिया फाॅस्फेट सल्फेट . X (16.20), अमोनिया फाॅस्ंफेट (20.20), सुफला (20.20), इफको एन. पी. के. ग्रेड (10,26,26), ग्रेड 2 (12,32,16) ग्रेड 3 (14,36,12)। 
भारत में भूमि उपयोग
           मद                                क्षेत्रफल (करोड़ हेक्टेयर)                                प्रतिशत
 1 .   कृषि योग्य भूमि                         17 . 51                                               44 . 8
 2 .     शुद्ध बोयी गयी भूमि                  14 . 29   
 3 .     वन-भूमि                                 6 . 74                                                 20 . 3
 4 .     कृषि के लिए अनुपलब्ध भूमि      3 . 93                                                14 . 8
 5 .     कृषि के लिए अनुपयुक्त भूमि      3 . 30                                                12 . 00
 6 .     बंजर भूमि                                2 . 20                                                  7 . 40
 7 .     एक बार से अधिक बार               3 . 22                                                     -
     बोया गया क्षेत्र

 

भूमि संशोधक उर्वरक

  • कैल्सियम नाइट्रेट (Ca - 19.5%,  Mg - 15), अमोनियम सल्फेट (S - 23.7), सिंगल सुपर फाॅस्फेट (S - 11- 14%,  ( Ca -19.5, Mg - 0.3), ट्रिपल सुपरफाॅस्फेट (Ca -14.3), डाई कैल्सियम फाॅस्फेट (Ca -  22.9), बेसिक स्लेग (Ca -  33.9, Mg - 0.6), जिप्सम (Ca - 18.6.23.5, ( Ca - 29. 2), डोलोमाइट (Ca - 32.2, Mg - 4.4)।

सूक्ष्म तत्त्व प्रदायक यौगिक

  • फेरस सल्फेट (लोहा 30%), मैंगनीज सल्फेट (मैंगनीज %), जिंक सल्फेट (जस्ता 21.35%), काॅपर सल्फेट (तांबा 25.35%), सोडियम बोरेट (बोरोन 10.6%), सोडियम मोलिब्डेट (मोलिब्डेनम 37%), अमोनियम मोलिब्डेट (मोलिब्डेनम 54%)

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