गुर्जर प्रतिहार, राजनीतिक एवं सामाजिक स्थिति (800 - 1200 ई.), इतिहास, यूपीएससी, आईएएस UPSC Notes | EduRev

इतिहास (History) for UPSC (Civil Services) Prelims in Hindi

UPSC : गुर्जर प्रतिहार, राजनीतिक एवं सामाजिक स्थिति (800 - 1200 ई.), इतिहास, यूपीएससी, आईएएस UPSC Notes | EduRev

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गुर्जर प्रतिहार
 

  • प्रतिहार दक्षिण राजस्थान के कुछ भागों और अवंती पर शासन करते थे। वे पहले स्थानीय अधिकारियों के परिवार थे पर अब स्वतंत्र राजवंश बन गए थे। 
  • नागभट्ट प्रथम (730-756 ई.) ने प्रतिहार राज्य का विस्तार किया। 
  • ग्वालियर अभिलेख के अनुसार नागभट्ट अरबों को सिंध से आगे बढ़ने से रोकने में सफल रहा। 
  • नागभट्ट के उत्तराधिकारी कक्कुक तथा देशराज के बाद वत्सराज शासक हुआ। 
  • उसने कन्नौज पर अधिकार के प्रयास में पाल वंश के धर्मपाल को हराया व राष्ट्रकूट राजा धु्रव से हार गया। 
  • उसके पुत्र नागभट्ट द्वितीय ने प्रतिहार वंश की शक्ति तथा प्रतिष्ठा को बढ़ाया।
  • प्रतिहार वंश का सर्वश्रेष्ठ राजा भोज था। राजा भोज के शासनकाल (836-885 ई.) में प्रतिहारों ने अपनी खोई हुई शक्ति को फिर से प्राप्त कर लिया। उसने फिर से कन्नौज पर प्रतिहारों का आधिपत्य स्थापित किया। 
  • अरब यात्री सुलेमान ने जिस जुज्र के राजा का उल्लेख किया है, वह संभवतः राजा भोज ही था। 
  • भोज अपनी साहित्यिक अभिरुचि और वैष्णव धर्म के संरक्षण के लिए भी याद किया जाता है। 
  • इसके कुछ सिक्कों में विष्णु के अवतार वाराह के चित्र मिलते हैं और उसने आदिवाराह की पदवी भी धारण की थी। 
  • कहा जाता है कि एक लंबे समय तक शासन के बाद उसने अपने राज्य का परित्याग कर दिया।
  • भोज के बाद उसका पुत्र महेन्द्रपाल प्रथम (885-909 ई.) उत्तराधिकारी बना। उसने मगध तथा उत्तरी बंगाल तक अपने साम्राज्य का विस्तार किया। 
  • महेन्द्रपाल के पुत्र भोज द्वितीय को गद्दी से हटाकर महिपाल (912-918 ई.) स्वयं सिंहासनारूढ़ हुआ। 
  • महिपाल के समय से ही गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य का विघटन प्रारम्भ हो गया। 
  • 963 ई. में राष्ट्रकूट राजा कृष्ण तृतीय ने उत्तरी भारत पर आक्रमण कर प्रतिहार राजा को पराजित किया। इसके पश्चात् शीघ्र ही प्रतिहार साम्राज्य का विघटन हो गया।


त्रिपक्षीय संघर्ष
 

  • इस त्रिपक्षीय संघर्ष का आरम्भ प्रतिहार नरेश वत्सराज ने किया। उसने कन्नौज के आयुध शासक इन्द्रायुध को पराजित करके उत्तर भारत में अपनी सत्ता का विस्तार प्रारम्भ किया। 
  • प्रतिहार गंगा-यमुना के संगम तक पहुंच गए थे और पाल वंश का प्रभाव प्रयाग तक बढ़ गया था। 
  • प्रतिहार नरेश वत्सराज और पाल नरेश धर्मपाल के मध्य उत्तर भारत पर शक्ति विस्तार के लिए संघर्ष प्रारम्भ हो गया। 
  • राष्ट्रकूट नरेश ध्रुव ने इस संघर्ष में हस्तक्षेप किया और वत्सराज को पराजित किया। 
  • त्रिपक्षीय संघर्ष में भाग लेकर राष्ट्रकूट उत्तर भारत की राजनीति में हस्तक्षेप करने वाली और दक्षिण से उत्तर पर आक्रमण करने वाली दक्षिण की प्रथम शक्ति थी। 
  • धु्रव ने पाल शासक धर्मपाल को भी पराजित किया। इन विजयों के बाद धु्रव पुनः लौट गया। तभी धर्मपाल ने कन्नौज पर आक्रमण कर वहां की गद्दी पर अपने संरक्षित शासक चक्रायुध को बैठाया। 
  • वत्सराज का पुत्र नागभट्ट द्वितीय ने चक्रायुध को पराजित कर कन्नौज पर अधिकार कर लिया। उसने मुंगेर के निकट एक युद्ध में धर्मपाल को भी पराजित किया। 
  • राष्ट्रकूट नरेश गोविन्द तृतीय ने नागभट्ट द्वितीय को बुरी तरह पराजित किया। 
  • नागभट्ट ने पुनः कन्नौज पर अधिकार कर लिया और इसे प्रतिहार साम्राज्य की राजधानी बनाया।
  • नागभट्ट द्वितीय के बाद रामभद्र एक अत्यंत कमजोर शासक था तथा राष्ट्रकूट नरेश अमोघवर्ष की अहस्तक्षेप की नीति का धर्मपाल के पुत्र देवपाल ने लाभ उठाया। 
  • वह उत्तर भारत का काफी शक्तिशाली राजा बन गया। 
  • देवपाल के उत्तराधिकारी विग्रहपाल के बाद से पाल वंश की शक्ति का ह्रास होना शुरू हो गया। 
  • अमोघवर्ष के उत्तराधिकारी कृष्ण द्वितीय के विरुद्ध अनेक विद्रोह हो रहे थे। इस समय प्रतिहार नरेश भोज उत्तर भारत का सबसे शक्तिशाली राजा बन गया। कन्नौज पुनः प्रतिहारों के अधीन आ गया। 
  • राष्ट्रकूट शासक इन्द्र तृतीय ने गुर्जर साम्राज्य पर आक्रमण किया। इससे गुर्जर साम्राज्य की शक्ति को काफी नुकसान पहुंचा। 
  • धीरे-धीरे सामंतों और प्रांतीय शासकों ने अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित की। दसवीं सदी के मध्य तक आते-आते गुर्जर-प्रतिहार साम्राज्य का विघटन हो गया।
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