राजनीतिक तंत्र (Polity) - UPSC Previous Year Questions Notes | EduRev

अध्यायवार प्रश्न पत्र UPSC Topic Wise Previous Year Question

UPSC : राजनीतिक तंत्र (Polity) - UPSC Previous Year Questions Notes | EduRev

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प्रश्न.1. राज्य-व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित में से किस एक को आप स्वतंत्रता की सर्वाधिक उपयुक्त व्याख्या के रूप में स्वीकार करेंगे?    (2019)
(क) राजनीतिक शासकों की तानशाही के विरुद्ध संरक्षण
(ख) नियंत्रण का अभाव
(ग) इच्छानुसार कुछ भी करने का अवसर
(घ) स्वयं को पूर्णतः विकसित करने का अवसर
उत्तर.
(ख/घ)
उपाय: स्वतंत्रता उस दशा का बोध् कराती है, जिसमें कोई राष्ट या राज्य द्वारा अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करने पर किसी दूसरे व्यक्ति या समाज या राष्ट का किसी प्रकार का प्रतिबंध् नहीं होता।

प्रश्न.2. भारत में दूरसंचार, बीमा, विद्युत आदि जैसे क्षेत्रकों में स्वतंत्र नियामकों का पुनरीक्षण निम्नलिखित में से कौन करते/करती हैं?
(i) संसद द्वारा गठित तदर्थ समितियाँ
(ii) संसदीय विभाग संबंधी स्थायी समितियाँ
(iii) वित्त आयोग
(iv) वित्तीय क्षेत्र विधयी सुधर आयोग
(v) नीति (NITI) आयोग
निचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।    (2019)
(क) 1 और 2
(ख) 1, 3 और 4
(ग) 3, 4 और 5
(घ) 2 और 5
उत्तर.
(क)
उपाय: तदर्थ समितियाँ तथा सम्बंधित ससंदीय विभाग की स्थायी समितियाँ भारत मे बीमा, दूर संचार, विद्युत इत्यादि क्षेत्रकों मे स्वतत्रं नियामकों का पुनरीक्षण करती है।

प्रश्न.3. निम्नलिखित में से किस एक का यह सुझाव था कि राज्यपाल को उस राज्य के बाहर का एक प्रतिष्टित व्यक्ति होना चाहिए और उसे एक ऐसा तटस्थ व्यक्ति होना चाहिए जिसके गहन राजनीतिक जुड़ाव न हों या उसने हाल के पिछले वर्षों में राजनीति में भाग नहीं लिया हो?  (2019)
(क) पहला प्रशासनिक सुधार आयोग (1966)
(ख) राजमन्नार समिति (1969)
(ग) सरकारिया आयोग (1983)
(घ) संविधान के कार्यचालन की समीक्षा हेतु राष्ट्रीय आयोग (2000)
उत्तर.
(ग)
उपाय: सरकारिया आयोग, जिसका गठन 1983 में हुआ था, केन्द्र राज्य संबंध से सम्बन्ध है। इस आयोग ने राज्यपाल हेतु राज्य सरकार द्वारा बनाए पैनल से नियुक्ति को नकार दिया तथा कहा कि सक्रिय राजनीतिज्ञ काे राज्यपाल नहीं बनाया जाना चाहिए। आयोग ने सुझाव दिया कि केन्द्र और राज्य सरकार दोनाे अलग-अलग पार्टी से हो तो केन्द्र सरकार की पार्टी से सम्बन्ध व्यक्ति को राज्यपाल नहीं बनाया जाना चाहिए।

प्रश्न.4. भारत के किसी राज्य की विधान सभा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
(i) वर्ष के प्रथम सत्र के प्रारम्भ में राज्यपाल सदन के सदस्यों के लिए रूढ़िगत सम्बोधन करता है।
(ii) जब किसी विशिष्ट विषय पर राज्य विधानमंडल के पास कोई नियम नहीं होता, तो उस विषय पर वह लोक सभा के नियम का पालन करता है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?    (2019)
(क) केवल 1
(ख) केवल 2
(ग) 1 और 2 दोनों
(घ) न तो 1, न ही 2
उत्तर. 
(क)
उपाय: अनुच्छेद 176 के अन्तर्गत राज्यपाल, विधानसभा के प्रत्येक आम चुनाव के बाद प्रथम सत्र के आरम्भ में तथा प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरम्भ में, विधानसभा में (तथा जिन राज्याें में विधान  परिषद है वहां एक साथ एकत्र हुए दोनों सदनाे में) विशेष अभिभाषण करता है।

प्रश्न.5. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिएः
(i) संसद (निरर्हता निवारण) अधिनियम, 1959 कई पदों को ‘लाभ का पद’ के आधार पर निरर्हता से छूट देता है।
(ii) उपर्युक्त अधिनियम पाँच बार 
संशोधित किया गया था।
(iii) शब्द ‘लाभ का पद’ भारत के संविधान में भली-भाँति परिभाषित किया गया है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?    (2019)
(क) केवल 1 और 2
(ख) केवल 3
(ग) केवल 2 और 3
(घ) 1, 2 और 3
उत्तर.
(क)
उपाय: संसद (निरर्हता निवारण) अधिनियम, 1959 केन्द्र और राज्य सरकाराें के तहत लाभ के कुछ कार्यालयाें काे सूचीबद्ध करता है, जाे धरकाें काे सांसद होने के लिए अयोग्य घोषित नहीं करते है। राष्टीय अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष काे इस सूची के अनुसार अयोग्यता से छूट दी गई है। इस अधिनियम में पांच बार संशोधन किया जा चुका है। शब्द ‘लाभ का पद’ भारत के संविधान या जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 में परिभाषित नहीं किया गया है।

प्रश्न.6. किस प्रधानमन्त्री के कार्यकाल के दौरान भारत के संविधान में नौवीं अनुसूची को पुनः स्थापित किया गया था?    (2019)
(क) जवाहरलाल नेहरू
(ख) लाल बहादुर शास्त्री
(ग) इंदिरा गांधी
(घ) मोरारजी देसाई
उत्तर.
(क)
उपाय: प्रधानमन्त्री जवाहर लाल नेहरू के कार्यकाल के दौरान भारत के संविधान में नौवीं अनुसूची काे पुनः स्थापित किया गया था।

प्रश्न.7. यदि भारत का राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 356 के अधीन यथा उपबंधित अपनी शक्तियों का किसी विशेष राज्य के संबंध में प्रयोग करता है, तो    (2018)
(क) उस राज्य की विधान सभा स्वतः भंग हो जाती है।
(ख) उस राज्य के विधानमंडल की शक्तियाँ संसद द्वारा या उसके प्राधिकार के अधीन प्रयोज्य होंगी ।
(ग) उस राज्य में अनुच्छेद 19 निलंबित हो जाता है।
(घ) राष्ट्रपति उस राज्य से संबंधित विधियाँ बन सकता है।
उत्तर. 
(ख)
उपाय: अनुच्छेद 356 के अतंर्गत संसद राज्य के लिए नियम बनाने का अधिकार राष्टपति अथवा उसके द्वारा नियुक्त अन्य किसी प्राधिकारी काे सौप सकती है। अब तक यह पद्धति रही है कि राष्टपति संबधित राज्य से ससंद के लिए चुने गये सदस्याे की सलाह पर विधियाँ बनाता है| यह कानून ‘राष्टपति के नियम’ के रूप मे जाने जाते है|
राज्य में आपातकाल में राज्य कार्यपालिका बर्खास्त हाे जाती है तथा राज्य विधायिका या ताे निलंबित हाे जाती है अथवा विघटित हाे जाती है। राष्ट्रपति, राज्यपाल के माध्यम से राज्य का प्रशासन चलाता है तथा ससंद राज्य के लिए कानून बनाती है। संक्षेप में राज्य की कार्यकारी व विधायी शक्तियांँ केंद्र को प्राप्त हो जाती है

प्रश्न.8. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
(i) किसी राज्य के राज्यपाल के विरुद्ध उसकी पदावधि के दौरान किसी न्यायालय में कोई दांडिक कार्यवाही संस्थित नहीं की जाएगी।
(ii) किसी राज्य के राज्यपाल की परिलब्ध्यिाँ और भत्ते उसकी पदावधि के दौरान कम नहीं किए जाएँगे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?    (2018)
(क) केवल 1
(ख) केवल 2
(ग) 1 और 2 दोनो
(घ) न तो 1, न ही 2
उत्तर.
(ग)
उपाय: संविधान के छठे भाग के अनुच्छेद 153 से 161 तक राज्य के राज्यपाल के बारे में बताया गया है। राज्यपाल, राज्य का कार्यकारी प्रमुख होता है। सामान्यतः प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होता है, लेकिन सातवें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 की धारा के अनुसार एक ही व्यक्ति काे दाे या अधिक राज्याें का राज्यपाल भी नियुक्त किया जा सकता है।
राज्यपाल काे उसके कार्यकाल के दौरान उसकी आर्थिक उपलब्धियों व भत्ताे काे कम नहीं किया जा सकता। राष्टपति की तरह राज्यपाल काे भी अनके विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां प्राप्त है। अपने कार्यकाल के दौरान उसे आपराधिक कार्यवाही की सुनवाई से उन्मुक्ति प्राप्त है। उसे गिरफ्तार कर कारावास में नहीं डाला जा सकता है। यद्यपि दाे महीने के नोटिस पर व्यक्तिगत क्रियाकलापों  पर उनके विरुद्ध नागरिक कानून संबंधित कार्यवाही प्रारंभ की जा सकती है।

प्रश्न.9. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
(i) विधान सभा का/की अध्यक्ष, यदि विधान सभा का/की सदस्य नहीं रहता है/रहती है तो अपना पद रिक्त कर देगा/देगी।
(ii) जब कभी विधन सभा का विघटन किया जाता है तो अध्यक्ष अपने पद को तुरंत रिक्त कर देगा/देगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?    (2018)
(क) केवल 1
(ख) केवल 2
(ग) 1 और 2 दोनों
(घ) न तो 1, न ही 2
उत्तर.
(क)
उपाय: विधान सभा के सदस्य अपने सदस्याे के बीच से ही अध्यक्ष का निर्वाचन करते है। सामान्यतः विधान सभा के कार्यकाल तक अध्यक्ष का पद होता है। हालांकि वह निम्नलिखित तीन मामलों में अपना पद रिक्त करता है-
1. यदि उसकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हाे जाये।
2. यदि वह उपाध्यक्ष काे अपना त्यागपत्र लिखित मे दे और
3. यदि विधानसभा के तत्कालीन समस्त सदस्याें के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा अपने पद से हटाया जाये।
इस तरह का कोई प्रस्ताव केवल 14 दिन की पूर्व सूचना के बाद ही लाया जा सकता है। अध्यक्ष इस पद पर निर्वाचित किये जाने की तारीख से लेकर जिस विधान सभा में उसका निर्वाचन किया गया हो, उसके भंग होने के बाद नई विधान सभा की प्रथम बैठक के ठीक पहले तक इस पर आसीन रहता है।

प्रश्न.10. भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचन के सन्दर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
(i) प्रत्येक एम.एल.ए. के वोट का मूल्य अलग-अलग राज्य में अलग-अलग होता है।
(ii) लोक सभा के सदस्यों के वोट का मूल्य राज्य सभा के सदस्यों के वोट के मूल्य से अधिक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?    (2018)
(क) केवल 1
(ख) केवल 2
(ग) 1 और 2 दोनो
(घ) न तो 1, न ही 2
उत्तर. 
(क)
उपाय: भारतीय संविधान की धारा के अनुसार 54 राष्टपति का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधीत्व के अनुसार एकल संक्रमणीय मत से गुप्त मतदान द्वारा होता है। राष्टपति का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रूप से एक निर्वाचन मडंल द्वारा है। निर्वाचन मडंल मे राज्यसभा, लोकसभा और राज्याे की विधानसभाओें के निर्वाचित सदस्य होते है। एक विधायक के मत का मूल्य उसके प्रतिनिधत्व वाले राज्य की जनसंख्या पर निर्भर करता है। एक सांसद के मत का मूल्य निकालने के लिए सभी राज्याे के विधायकाे के वाटे को जोड़कर उसे लाकेसभा के निर्वाचित 543 और राज्यसभा के निर्वाचित 233 सदस्याें से भाग दिया जाता है अर्थात सांसद के वोट का मूल्य स्थिर रहता है।

प्रश्न.11. धन विधेयक के सबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?    (2018)
(क) किसी बिल (विधेयक) को धन विधेयक तब माना जाएगा जब इसमें केवल किसी कर के अधिरोध उन्मूलन, माफी, परिवर्तन या विनियमन संबंधित प्रावधान हों।
(ख) धन विधेयक में भारत की संचित निधि एवं भारत की आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा से संबंधित उपबंध होते हैं।
(ग) धन विधेयक भारत की आकस्मिकता निधि से धन के विनियोजन से संबंधित होता है।
(घ) धन विधेयक भारत सरकार द्वारा धन के उधार लेने या कोई प्रत्याभूति देने के विनियमन से संबंधित होता है।
उत्तर.
(ग)
उपाय: अनुच्छेद 110 के अंतर्गत धन विधेयक की परिभाषा दी गई है। इसके तहत विधेयक धन विधेयक तक समझा जाएगा यदि उसमें केवल निम्नलिखित सभी के लिए विषयाे से संबंधित प्रावधान है।
1. कर लगाना, कम करना या बढा़ना, उसकाे नियमित करना इसमें उसमें कोई परिवर्तन करना हो।
2. भारत सरकार की ओर से ऋण लेना, नियमित करना या किसी अधिभार में कोई परिवर्तन करना हो।
3. भारत की सचित निधि या आकस्मिकता निधि मे कुछ धन डालना हाे या निकालना हो।
4. भारत की सचित निधि मे से किसी व्यय सबंध्ं मे धन दिया जाना हो।
5. भारत की जमा पूंजी मे से किसी भी व्यक्ति किए जाने की घोषणा करना या ऐसे व्यय काे बढ़ाना हो।
6. भारत की सचित निधि तथा सार्वजनिक लेखो मे धन जमा करने या लेखाें की जांच पड़ताल करनी हाे तथा उपरोक्त (1) से (6) में उल्लेखित विषयाें में से संबंधित विषय।
7. धन की आय तथा व्यय के प्रति अन्य किसी प्रकार का मामला हो।

प्रश्न.12. भारत की संसद के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सी संसदीय समिति इसकी संवीक्षा करती है और सदन को सूचित करती है कि जो विनियम, नियम, उप-नियम, उप-विधि आदि बनाने की शक्तियाँ सविधान द्वारा पद्रत्त हैं या सदन द्वारा प्रत्यायोजित हैं उनका कार्यपालिका द्वारा इन प्रत्यायोजनों (डेलिगेशन) की परिधि के भीतर उचित प्रयोग हो रहा है?    (2018)
(क) सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति
(ख) अधीनस्थ विधान संबंधी समिति
(ग) नियम समिति
(घ) कार्य सलाहकार (बिजनेस एडवाइजरी) समिति
उत्तर.
(ख)
उपाय: सभापति द्वारा नाम निर्देशित 15 सदस्याें की अधीनस्थ विधान संबंधी समिति इस बात की परिनिरीक्षा करने और राज्य सभा काे यह प्रतिवेदित करने के लिए होती है कि क्या नियमाें विनियमाे उपविधियाे योजनाओ अथवा अन्य परिनियत सलेखों काे बनाने की संविधान द्वारा पद्रत्त या ससंद द्वारा प्रत्यायोजित शक्तियाे का प्रयोग, यथास्थिति उस परिदान या प्रत्यायोजन के अंतर्गत रुप से किया गया है।

प्रश्न.13. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
(i) पहली लोक सभा में विपक्ष में सबसे बड़ा राजनीतिक दल स्वतंत्र पार्टी था।
(ii) लोकसभा में ‘‘नेता-प्रतिपक्ष’’ को सर्वप्रथम 1969 में मान्यता दी गई थी।
(iii) लोकसभा में यदि किसी दल के न्यूनतम 75 सदस्य न हों तो उसके नेता को नेता-प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता नहीं मिल सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?    (2018)
(क) केवल 1 और 3
(ख) केवल 2
(ग) केवल 2 और 3
(घ) 1, 2 और 3
उत्तर. 
(ख)
उपाय: पहली लोकसभा में सीपीआई विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी थी। पहली, दूसरी और तीसरी लाकेसभा में विपक्ष के नेता के रूप में किसी काे मान्यता नहीं मिली। चौथी लोकसभा के दौरान दिसम्बर 1969 में राम सुभग सिंह काे विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता मिली। लोकसभा में विपक्ष के नेता के लिए उस पार्टी काे लोकसभा की कुल सदस्य सांख्य के 10 प्रतिशत स्थान प्राप्त होने चाहिए।

प्रश्न.14. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिएः
(i) भारत का निर्वाचन आयोग पांच सदस्यीय निकाय है।
(ii) संघ का गृह मंत्रालय, आम चुनाव और उप-चुनाव दोनों के लिए चुनाव कार्यक्रम तय करता है।
(iii) निर्वाचन आयोग मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलाे के विभाजन/विलय से संबंधित विवाद निपटाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/है?    (2017)
(क) केवल 1 और 2
(ख) केवल 2
(ग) केवल 2 और 3
(घ) केवल 3
उत्तर. 
(घ)
उपाय: वर्तमान मे यह एक तीन-सदस्यीय निकाय है जिसमें एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दाे चुनाव आयुक्त है। आम चुनावाें और उप-चुनावाें के लिए चुनाव कार्यक्रम चुनाव आयोग तय करता है| मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलाे के विभाजन या विलय से सम्बंधित विवादाें काे चुनाव आयोग हल करता है। किन्तु इसके फैसले काे न्यायालयाे में चुनौती दी जा सकती है।

प्रश्न.15. भारत मे मताधिकार और निर्वाचित होने का अधिकार    (2017)
(क) मूल अधिकार है
(ख) नैसर्गिक अधिकार है
(ग) संवैधानिक अधिकार है
(घ) विधिक अधिकार है
उत्तर.
(ग/घ)
उपाय: दिए गए विकल्पाे (c) तर्कसंगत लगता है क्योकि संविधान के अनुच्छेद 326 द्वारा वयस्काें काे मत देने का अधिकार पद्रान किया गया है। पीपुल्स प्रतिनिधित्व अधिनियम, भी मत देने का अधिकार प्रदान करता है। किन्तु, सर्वोच्च न्यायालय संविधान का अंतिम व्याख्याता है और उसी के विचार प्रबल होंगे| सर्वोच्च न्यायालय बनाम भारतीय संघ (2015) पीयूसीएल मे कहा गया कि इसमे संदेह नहीं कि मतदान का अधिकार एक वैधानिक अधिकार है, यह वैधानिक अधिकार लोकतंत्र का सार है। इसके बिना लोकतंत्र नाकाम रहेगा।

प्रश्न.16. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिएः
(i) लोक सभा अथवा राज्य की विधानसभा के निर्वाचन मे जीतने वाले उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित किए जाने के लिए, किए गए मतदान का कम से कम 50 प्रतिशत पाना अनिवार्य है।
(ii) भारत के संविधान में अधिकथित उपबंधों के अनुसार, लोक सभा में अध्यक्ष का पद बहुमत वाले दल को जाता है तथा उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?    (2017)
(क) केवल 1
(ख) केवल 2
(ग) 1 और 2 दोनों
(घ) न तो 1, न ही 2
उत्तर. 
(घ)
उपाय: भारत मे लोक सभा तथा विधान सभा (राज्य) चुनाव मे बहुलवादी व्यवस्था (फर्स्ट पास्ट द पोस्ट सिस्टम) अपनायी गयी है जिसमे सबसे अधिक मत पाने वाला उम्मीदवार विजयी घोषित किया जाता है इसमे कम-से-कम 50 वोट पाना आवश्यक नहीं है।
लोकसभा मे प्राय: अध्यक्ष बहुमत पार्टी से तथा उपाध्यक्ष विपक्षी पार्टी से चुना जाता है। यह मात्र एक परम्परा है संवैधानिक प्रावधान नहीं।

प्रश्न.17. लोक सभा के निर्वाचन के लिए नामांकन पत्रः    (2017)
(क) भारत में निवास करने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा दाखिल किया जा सकता है।
(ख) जिस निर्वाचन क्षेत्र में निर्वाचन लड़ा जाना है, वहां के किसी निवासी द्वारा दाखिल किया जा सकता है।
(ग) भारत के किसी नागरिक द्वारा, जिसका नाम किसी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता-सूची में है दाखिल किया जा सकता है।
(घ) भारत के किसी भी नागरिक द्वारा दाखिल किया जा सकता है।
उत्तर.
(ग)
उपाय: भारतीय संविधान के अनुसार भारत के किसी नागरिक द्वारा, जिसका नाम किसी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची मे है अपना नामांकन-पत्र दाखिल कर सकता है। चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति के बदले कोई दूसरा भारतीय निवासी (उस क्षेत्र का) नामांकन दाखिल नहीं कर सकता है। भारत में निवास करने वाला कोई भी व्यक्ति नामाकंन दाखिल नहीं कर सकता, उसे भारत का नागरिक होना   आवश्यक है| इसके साथ ही चुनाव लडऩे वाले की उम्र 25 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए और न ही उसे पागल या दिवालिया होना चाहिए।

प्रश्न.18. भारत की ससंद के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिएः
(i) गैर-सरकारी विधेयक ऐसा विधेयक है जो संसद के ऐसे सदस्य द्वारा प्रस्तुत किया जाता है जो निर्वाचित नहीं है किन्तु भारत के राष्ट्रपति द्वारा नामनिर्दिष्ट है।
(ii) हाल ही में, भारत की संसद के इतिहास में पहली बार एक गैर-सरकारी विधेयक पारित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है?    (2017)
(क) केवल 1
(ख) केवल 2
(ग) 1 और 2 दोनों
(घ) न तो 1, न ही 2
उत्तर.
(घ)
उपाय: गैर सरकारी विधेयक कोई भी संसद सदस्य प्रस्तुत कर सकता है जाे मंत्री न हाे इसके लिए राष्ट्रपति द्वारा नामित सदस्य होने की आवश्यकता नहीं है| मंत्री द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला विधेयक सरकारी विधयेक कहता है। भारतीय संसद के इतिहास मे स्वतत्रंता प्राप्ति के पश्चात् से अब तक 14 गैर सरकारी विधेयक प्रस्तुत किए जा चुके है।

प्रश्न.19. भारत की संसद किसके/किनके द्वारा मंत्रिपरिषद के कृतियों के उपर नियंत्रण रखती है?
(i) स्थगन प्रस्ताव
(ii) प्रश्न काल
(iii) अनुपूरक प्रश्न
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिएः    (2017)
(क) केवल 1
(ख) केवल 2 और 3
(ग) केवल 1 और 3
(घ) 1, 2 और 3

उत्तर. (घ)
उपाय: स्थगन प्रस्ताव द्वारा अति आवश्यक महत्त्व के मामलाें को सदन मे उठाया जा सकता है। संसद के सदस्य प्रश्नकाल के दारैान मूल प्रश्न के उत्तर से संबद्ध अनूपुरक प्रश्न पूछ सकते है जिसका जवाब सरकार काे देना पड़ता है। इससे मंत्रिपरिषद स्वेच्छाचारी नहीं होने पाती।

प्रश्न.20. निम्नलिखित कथनों में से उस एक को चुनिए, जो मंत्रिमण्डल स्वरूप की सरकार के अंतर्निहित सिद्धांत को अभिव्यक्त करता हैः    (2017)
(क) ऐसी सरकार के विरुद्ध आलोचना को कम-से-कम करने की व्यवस्था, जिसके उत्तरदायित्व जटिल है तथा उन्हें सभी के संतोष के लिए निष्पादित करना कठिन है।
(ख) ऐसी सरकार के कामकाज में तेजी लाने की क्रियाविधि, जिसके उत्तरदायित्व दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं।
(ग) सरकार के जनता के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व को सुनिश्चित करने के लिए संसदीय लोकतंत्र की एक क्रियाविधि।
(घ) उस शासनाध्यक्ष के हाथों को मजबूत करने का एक साधन जिसका जनता पर नियंत्रण हासोन्मुख दशा में है।
उत्तर.
(ग)
उपाय: सरकार का जनता के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व काे सुनिश्चित करने के लिए संसदीय लोकतंत्र की क्रिया-विधि के अंतर्गत मंत्रिमण्डल का गठन किया जाता है। संघ की कार्यपालिका शक्ति के संचालन मे सहयोग देने के लिए मंत्रीपरिषद का गठन किया जाता है। लोकसभा में जनप्रतिनिधि  होते हैं और मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।

प्रश्न.21. संसदीय स्वरूप के शासन का प्रमुख लाभ यह है किः    (2017)
(क) कार्यपालिका और विधानमण्डल दोनों स्वतंत्र रूप से कार्य करते है।
(ख) यह नीति की निरन्तरता प्रदान करता है और यह अधिक दक्ष है।
(ग) कार्यपालिका, विधानमण्डल के प्रति उत्तरदायी बना रहता है।
(घ) सरकार के अध्यक्ष को निर्वाचन के बिना नहीं बदला जा सकता।
उत्तर.
(ग)
उपाय: शासन के संसदीय स्वरूप का सबसे बड़ा लाभ है कि कार्यपालिका अर्थात् सरकार, हमेशा विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी होती है| कार्यपालिका की स्वच्छन्दता पर विधानमडंल रोक लगाती है| भारत मे शासन का संसदीय स्वरूप ही अपनाया गया है| कार्यपालिका और विधानमंडल कभी स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर सकते। कार्यपालिका के किसी कार्य हेतु विधानमण्डल की सहमति आवश्यकता है| पर्णाली मे सरकार के मुखिया काे अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से हटाया जा सकता है| इसी तरह राष्ट्रपति (अध्यक्ष) काे भी महाभियोग की प्रक्रिया से हटाया जा सकता है|

प्रश्न.22. स्थानीय स्वशासन की सर्वोत्तम व्याख्या यह की जा सकती है कि यह एक प्रयोग है|    (2017)
(क) संघवाद का
(ख) लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण का
(ग) प्रशासकीय प्रत्यायोजन का
(घ) प्रत्यक्ष लोकतंत्र का
उत्तर.
(ख)
उपाय: विकेन्द्रीकरण और जमीनी स्तर पर सशक्तिकरण स्थानीय स्वशासन के प्रमुख पहलू है| भारतीय संविधान के 73 वे एवं 74 वे संसोधन के अंतर्गत इसकी व्याख्या की गयी है| ग्राम पंचायत कल्याणकारी और स्वच्छता परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान कर सकती है। संघवाद स्थानीय स्वशासन का प्रतिनिधित्त्व नहीं करता और न ही प्रसाशकीय प्रत्यायोजन प्रशासनिक प्रतिनिधिमंडल है क्योंकि स्थानीय स्व.सरकारी निकाय राजनीतिक संस्थाए होती हैं जाे जनता द्वारा प्रत्यक्षरूप से चुने जाती हैं। जहाँ जनता द्वारा अप्रत्यक्ष निर्णय लिया जाता है, वहाँ प्रत्यक्ष लोकतंत्र नहीं हाे सकता।

प्रश्न.23. निम्नलिखित में से कौन-सी एक भारतीय संघराज्य पद्धति की विशेषता नहीं है?    (2017)
(क) भारत में स्वतंत्र न्यायपालिका है।
(ख) केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया गया है।
(ग) सघ्ंबद्ध होने वाली इकाइयों को राज्य सभा में असमान प्रतिनिधित्व दिया गया है।
(घ) यह संघबद्ध होने वाली इकाइयों के बीच एक सहमति का परिणाम है।
उत्तर.
(घ)
उपाय: ‘संघराज्य’ वाक्यांश दाे कारणाें से अधिमानित किया गया है एक; भारतीय फेडरेशन (संघ) अमेरिकी संधो जैसे राज्याे के बीच समझौते का नतीजा नहीं है आरै दूसरा; राज्याे काे महासंघ के अलग होने का कोई अधिकार नहीं है| भारत एक संघ है क्योकि यह अविनाशी और अभिन्न है तथा केवल प्रसाशन की सुविधा की दृिष्ट से अलग-अलग राज्याें में विभाजित है|

प्रश्न.24. किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा के निम्नलिखित में से कौन-से परिणामो का होना आवश्यक नहीं है?
(i) राज्य विधान सभा का विघटन
(ii) राज्य के मंत्रिपरिषद् का हटाया जाना
(iii) स्थानीय निकायों का विघटन
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिएः    (2017)
(क) केवल 1 और 2
(ख) केवल 1 और 3
(ग) केवल 2 और 3
(घ) 1, 2 और 3
उत्तर. 
(ख)
उपाय: जब किसी राज्य मे राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है ता राष्टपति या ताे विधान सभा काे निलंबित कर सकता है या विघटित कर सकता है। राष्ट्रपति शासन मे स्थानीय निकायाें पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। राष्ट्रपति शासन में राज्य के मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद् काे बर्खाश्त कर दिया जाता है।

प्रश्न.25. समाज में समानता के होने का एक निहितार्थ यह है कि उसमेंः    (2017)
(क) विशेषाधिकार का अभाव है
(ख) अवरोधों का अभाव है
(ग) प्रतिस्पर्धा का अभाव है
(घ) विचारधारा का अभाव है
उत्तर.
(क)
उपाय: भारतीय समाज मे समानता होने का निहितार्थ यह है कि समाज में विशेषाधिकारो का अभाव है। भारतीय सविधान का अनुच्छेद 18 इसकी पुष्टि करता है। समानता के अधिकार के तहत् अनुच्छेद 18 ‘ए’ ने भारत के नागरिकाे के विशेषाधिकार (सैन्य या शैक्षणिक छोड़कर) समाप्त कर दिया गया है।

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