समाजवादी विचारों का फैलाव और क्रांतिकारी आंदोलन - स्वतंत्रता संग्राम, इतिहास, यूपीएससी, आईएएस UPSC Notes | EduRev

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UPSC : समाजवादी विचारों का फैलाव और क्रांतिकारी आंदोलन - स्वतंत्रता संग्राम, इतिहास, यूपीएससी, आईएएस UPSC Notes | EduRev

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समाजवादी विचारों का फैलाव और क्रांतिकारी आंदोलन

 समाजवादी विचारों का फैलाव

  • भारत की आजादी के कुछ नेता, विशेषकर भारत के बाहर सक्रिय क्रांतिकारी, यूरोप के समाजवादी आंदोलन के नेताओं के सम्पर्क में आए थे और समाजवादी विचारों से प्रभावित हुए थे। 
  • भारत के बाहर रह रहे क्रांतिकारी मानवेन्द्रनाथ राय ने कई देशों की कम्युनिस्ट पार्टियों द्वारा स्थापित कम्युनिस्ट इंटरनेशनल में कई साल तक सक्रिय काम किया। 
  • समाजवादी विचारों तथा रूसी क्रांति से प्रभावित होकर भारत में समाजवादी विचारों का प्रचार करने के उद्देश्य से कई समाजवादी तथा कम्युनिस्ट समूहों की स्थापना हुई। इन समूहों के अधिकांश नेताआंे ने असहयोग आंदोलन में भाग लिया था। 
  • इन समूहों के कुछ नेता थे - श्रीपाद अमृत डांगे, एम. सिंगारवेलू, शौकत उस्मानी और मुजफ्फर अहमद। 
  • इनमें से कुछ समूह एक-दूसरे के नजदीक आए और उन्होंने 1925 ई. में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की। 
  • मजदूरों और किसानों को संगठित करने में कम्यूनिस्टों ने महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की।
  • समाजवादी विचारों और रूसी क्रांति का देश के तरुणों तथा राष्ट्रीय आंदोलन के तरुण नेताओं पर गहरा प्रभाव पड़ा। 
  • भारत में समाजवादी विचारों को लोकप्रिय बनाने वाले राष्ट्रीय आंदोलन के सबसे प्रमुख नेता जवाहरलाल नेहरू थे। 
  • जवाहरलाल के प्रभाव में 1934 ई. में ‘कांग्रेस समाजवादी पार्टी’ की स्थापना हुई। 
  • इस पार्टी ने कांग्रेस के साथ जुड़कर काम किया। इसने किसानों तथा मजदूरों को संगठित करने में और आजादी के संघर्ष के सामाजिक तथा आर्थिक उद्देश्यों से संबंधित कांग्रेस की नीतियों को प्रभावित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की।

क्रांतिकारी आंदोलन

  • प्रथम महायुद्ध के बाद कुछ साल तक क्रांतिकारियों की गतिविधियाँ शिथिल रहीं। 
  • असहयोग आंदोलन को वापस लेने से जो निराशा फैली थी उससे 1920 ई. के दशक में क्रांतिकारी गतिविधियाँ पुनः शुरू हुई। 
  • सचिन सान्याल, जोगेश चटर्जी तथा दूसरों ने मिलकर ‘हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ नामक एक संगठन स्थापित किया। 
  • इसका उद्देश्य था ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेकने के लिए एक सशस्त्र विद्रोह का संगठन करना। 
  • 1925 ई. में क्रांतिकारियों के एक दल ने हरदोई से लखनऊ जा रही एक रेल को काकोरी स्थान पर रोका और एक बक्से में बंद सरकारी खजाने को लूट लिया। 
  • क्रांतिकारी गतिविधियों के लिये पैसा जुटाने के उद्देश्य से यह काम किया गया था। 
  • इस घटना के बाद कई क्रांतिकारियों को पकड़ा गया और काकोरी षड्यंत्र केस के अंतर्गत उन पर मुकद्दमा चलाया गया। 
  • उनमें से चार - रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खां, रोशन सिंह और राजेन्द्र लाहिड़ी को मृत्युदंड सुनाकर फांसी दी गई। दूसरों को लंबे कारावास की सजाएं दी गई। 
  • चंद्रशेखर आजाद भी हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य थे, मगर वे पकड़े नहीं गए। 
  • उन्होंने दूसरे क्रांतिकारियों के साथ मिलकर 1928 ई. में ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी’ की स्थापना में योग दिया। 
  • इस संगठन के प्रमुख नेता भगत सिंह थे। 
  • दिसम्बर, 1928 ई. में पुलिस अफसर सैंडर्स की हत्या कर दी गई। पुलिस द्वारा पीटे जाने के कारण लाला लाजपत राय की मृत्यु हुई थी। स®डर्स को उस घटना के लिए जिम्मेदार समझा गया था। 
  • सबसे महत्त्वपूर्ण घटना 8 अप्रैल, 1929 ई. को केन्द्रीय विधान सभा में घटित हुई। भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने केन्द्रीय विधान सभा में दो बम फेंके। 
  • नए दमनकारी कानूनों और कुछ समय पहले मार्में की गई 31 मजदूर नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध प्रकट करने के लिये उन्होंने यह कार्य किया था। 
  • स्पष्ट था कि केवल विरोध प्रकट करने के लिए ही बम फेंके गए थे, न कि किसी की हत्या करने के लिए। 
  • भगत सिंह और दत्त ने भागने की कोशिश नहीं की। वे वहीं खड़े रहे और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का नारा लगाते रहे। 
  • वे गिरफ्तार कर लिए गए। बाद में इस दल के अधिकांश क्रांतिकारियों को पकड़ लिया गया। 
  • जेल में उनके साथ बुरा सलूक किया गया, तो विरोध में उन्होंने भूख-हड़ताल शुरू की। 
  • भूख-हड़ताल के 64वें दिन एक क्रांतिकारी, जतीन दास, की मृत्यु हो गई तो सारे देश को बड़ा सदमा पहुँचा। 
  • तीन क्रांतिकारियों - भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी की सजा दी गई। शेष क्रांतिकारियों में से सात को आजीवन कारावास की सजा दी गई। 
  • देशभर के लोगों के विरोध के बावजूद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 23 मार्च, 1931 ई. को फांसी दे दी गई। 
  • सारे देश में हड़तालें हुई, जुलूस निकाले गए और शोक-सभाएँ हुई। 
  • चन्द्रशेखर आजाद पुनः भाग निकलने में सफल हुए। मगर इलाहाबाद में पुलिस के साथ हुई एक भिड़ंत में उनकी मृत्यु हो गई।
  • क्रांतिकारी आंदोलन के इतिहास की एक सबसे महत्त्वूपर्ण घटना 1930 ई. में बंगाल में घटित हुई। 
  • 18 अप्रैल, 1930 ई. को इंडियन रिपब्लिकन आर्मी के क्रांतिकारियों ने सूर्यसेन के नेतृत्व में चटगांव के पुलिस शस्त्रागार पर हमला किया। कुछ समय तक चटगांव में ब्रिटिश शासन नहीं चला। 
  • उसके तुरंत बाद दूसरे स्थानों पर भी क्रांतिकारी हिंसा की घटनाएँ घटीं। 
  • पंजाब में हरिकिशन ने पंजाब के गवर्नर की हत्या की कोशिश की। 
  • दिसंबर 1930 ई. में तीन जवानों - विनय बोस, बादल गुप्ता और दिनेश गुप्ता - ने कलकत्ता की राइटर्स बिल्डिंग में प्रवेश करके जेलों के पुलिस अधीक्षक की हत्या कर दी। 
  • इंडियन रिपब्लिकन आर्मी के जो अधिकांश नेता ब्रिटिश फौज से लड़ने के बाद भाग निकले थे उन्हें बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। उनमें से दो - सूर्य सेन और तारकेश्वर दस्तीदार को मृत्यु दंड दिया गया। 
  • इंडियन रिपब्लिकन आर्मी की गतिविधियों में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाली दो तरूण लड़कियाँ थी - प्रीतिलता वदादार और कल्पना दत्त। 
  • अंग्रेजों के हाथों में न पड़े, प्रीतिलता ने जहर खा लिया। 
  • कल्पना दत्त को आजीवन कारावास की सजा दी गई।
  • यद्यपि राष्ट्रीय आंदोलन के अधिकांश नेता क्रांतिकारियों के तरीकों के विरोधी थे और अधिकांश लोगों ने संघर्ष का अहिंसात्मक तरीका अपनाया था, परन्तु लोगों के लिए क्रांतिकारी प्रेरणा के सतत स्रोत बने रहे। 
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